फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Agency behind cash crunch in ATM

एजेंसियों की मनमानी के आगे बैंक अफसर भी हेल्पलेस 

Thu, 05 Apr 2018 07:03 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Thu, 05 Apr 2018 07:03 PM IST
विज्ञापन
Agency behind cash crunch in ATM
- फोटो : अमर उजाला
हाईएप्रोच आउट सोर्सिंग एजेंसियों की मनमानी भी एक वजह है जिससे एटीएम में कैश की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कोई एक्शन न होने के कारण बैंक अफसर अक्सर इनकी शिकायत करने से गुरेज करते हैं। इसका असर एटीएम सेवा पर पड़ने से लोगों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। जरूरत के हिसाब से कैश न उपलब्ध न होने के कारण यह हालात मार्केट में मंदी का कारण भी बन रहे हैं। 
विज्ञापन

जिन बैंकों के एटीएम उनकी ब्रांच में लगे हुए हैं, उनकी बात छोड़ दी जाए तो बाकी सभी एटीएम में कैश डालने का जिम्मा आउट सोर्सिंग एजेंसियां ही कर रही हैं। जिले में सरकारी और निजी बैंक शाखाओं के 473 एटीएम लगे हुए हैं। इनमें 95 प्रतिशत से ज्यादा एटीएम में कैश भरने का काम एजेंसियां ही करती हैं। करार के तहत इन एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है कि कोई भी एटीएम कैशलेस न होने पाए। इसके उन्हें एटीएम में नकदी की मॉनीटरिंग करने के साथ ही समय से कैश मुहैया होता रहे। एजेंसियां कांट्रेक्ट तो ले लेती हैं, लेकिन अपनी जिम्मेदारी को पूरा करने में लापरवाही दिखाती हैं। यही वजह है कि तमाम बैंकों के एटीएम कई-कई दिनों तक खाली पड़े रहते हैं। ग्राहक शिकायत करते रहते हैं लेकिन इसका संज्ञान न एजेंसियां लेती हैं और न संबंधित बैंकों के अफसर कोई गंभीरता दिखाते है। 
विज्ञापन

बैंक अफसरों की इन एजेंसियों को लेकर बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि इनके कर्ताधर्ता की ‘पहुंच’ काफी ऊंची होती है। हाईएप्रोच होने के कारण आम तौर पर बैंक अफसर इन एजेंसियों की मनमानी के खिलाफ किसी तरह की शिकायत करने से बचते हैं। इसके बाद कोई हिम्मत जुटा कर ऊपर लिखा-पढ़ी भी करता है तो अपनी ‘उच्च संरक्षण’ की वजह से ऐसी शिकायतों का एजेंसियों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। बैंक के अधिकारियों की बेबसी और आउट सोर्सिंग एजेंसियों की मनमर्जी का खामियाजा आखिरकार लोगों को ही भुगतान पड़ रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 

नए नोटों की गड्डी पर कमीशन का खेल 
एटीएम में कैश सप्लाई करने का ठेका लेने वाली कई एजेंसियां नए नोटों की गड्डी को लेकर कमीशन का खेल भी खेलती हैं। सूत्र बताते हैं कि एजेंसियां बैंक या करेंसी चेस्ट से नई नकदी तो ले जाती हैं लेकिन एटीएम में कैश डालने से पहले नए नोटों की गडड्ी की जगह बदलकर पुराने नोट भर दिए जाते हैं। इसकी क्रास चेकिंग नहीं होती है। इसके अलावा इस खेल में बैंक के कर्मचारी भी शामिल रहते हैं। बताते हैं कि नोटों की नई गड्डी से पांच से दस प्रतिशत के कमीशन पर बिक जाती है।


कटे-फटे और नकली नोट निकलने के मामले भी पी जाते हैं अफसर
एटीएम में डाले जाने वाले नोट अगर कटे-फटे या नकली निकलते हैं तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित आउट सोर्सिंग कंपनी की ही होती है जबकि एटीएम से निकलने वाले ऐसे नोट को बदलने के लिए ग्राहक भले ही परेशान घूमते रहते हो लेकिन ऐसे मामलों में अब तक शायद ही किसी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की गई हो। ऐसे मामलों को भी बैंक के अफसर टालमटोल करते हुए पी जाते हैं। कई बार एटीएम से राइटिंग और स्याही लगे नोट निकलने के मामलों में भी ग्राहक दौड़ लगाते ही रह जाते हैं।    
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed