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रोजे के बाद ज्यादा रेड मीट यानी जान खतरे में

Tue, 30 May 2017 01:33 AM IST
महबूब आलम
महबूब आलम Updated Tue, 30 May 2017 01:33 AM IST
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After the Roses, more red meat is in danger
After the Roses, more red meat is in danger - फोटो : After the Roses, more red meat is in danger
रमजान के दिनों में रोजा रखने वाले आम तौर मीट खाना ज्यादा पसंद करते हैं। जो सेहत के एतबार के बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। यहां तक कि ब्रेन हैमरेज, हार्ट अटैक और कैंसर होने तक की आशंका रहती है।
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यह खुलासा हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड फीजियो रिहैबिलीटेशन अमेरिका के अध्ययन मेें हुआ है। इसके मुताबिक रमजान में रेड मीट अत्यधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो हम अपने शरीर में गंभीर बीमारियों को आमंत्रित कर रहे हैं। 20 साल तक रोजेदारों पर रिसर्च करने के बाद यह नतीजा सामने आया है।
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इसमें यह बात भी साफ की गई है कि  रेड मीट में हीमी आयरन होता है जो हार्ट अटैक की  प्रमुख वजह है। पूरे दिन भूखे रहने के बाद अचानक रेड मीट खाने से सोडियम की मात्रा तेजी से बढ़ जाती है। अप्रत्याशित रूप से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इस कारण  हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक का खतरा आम दिनों के मुकाबले रमजान में ज्यादा होता है। 
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रोजे में रेड मीट रोजाना खाने से आंतों के कैंसर की आशंकाएं अत्यधिक बढ़ जाती हैं। शरीर को रेड मीट पचाने के लिए अधिक एनर्जी चाहिए जो रमजान में कम हो जाती है। आंतों का मूवमेंट बिगड़ जाता है। इस वजह से आंतों का कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। रेड मीट का हीमी आयरन होता है जो शरीर के ऑक्सीडेटिव सेल्स को डैमेज कर देता है। रेड मीट अधिक तापमान पर गलता है, इस कारण वो कारसीनों जैनिक कंपाउंड (कैंसर को बढ़ावा देने वाले कारक) में तब्दील हो जाता है। महिलाओं में ब्रैस्ट कैंसर का खतरा रहता है। 
मिशन हास्पिटल में पेन मैनेजमेंट एंड स्पोर्ट्स इंजरीज के डायरेक्टर डा. एसई हुदा ने इस रिपोर्ट में उल्लेख करते हुए बताया कि अल्लाह के नबी मोहम्मद साहब ने कभी रोजे में मीट खाने की वकालत नहीं की है। बहुत लोग जो इफ्तार में मीट खाना पसंद करते हैं वो ये सोचते हैं कि वे इस्लाम की परंपरा को निभा रहे हैं, पर ये सही नहीं है। डा. हुदा ने यह राय भी दी है कि मीट सेवन की अधिकता से बचें। खाना है तो कुछ-कुछ दिनों के अंतर से खाएं।       

दिल पर देता है लोड 
फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन कहते हैं कि लंबे समय तक खाली पेट रहना और उसके बाद एकदम से भर पेट खाना गलत है। इससे आंत तो प्रभावित होती ही हैं साथ ही खाना नहीं पच पाता। रेड मीट दिल के मरीजों के लिए एक तरह का स्ट्रेस देता है जो लोड बढ़ाता है। हर रोज मीट खाते हैं तो एक माह में कोलेस्ट्रोल 20 से 40 मिलीग्राम तक बढ़ सकता है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी शर्मा बताते हैं कि कोलेस्ट्रोल बढ़ने से धमनियां में रक्त की रुकावट से ही हार्टअटैक का खतरा बढ़ता है। 
डॉक्टरों की सलाह
-रेट मीट कम से कम खाएं
- रोजा खोलने के बाद हल्का खाएं, चाहे तीन घंटे के बाद कुछ फिर हल्का खा लें
- पूरे रोजे में दो से तीन बार ही रेड मीट का सेवन करें
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