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कई दिन बाद पूरी तरह खुली ओपीडी में उमड़ी बुखार के मरीजों की भीड़
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ओपीडी में उमड़ी मरीजों की भीड़।
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करीब 18 सौ लोगों ने बनवाए नए परचे, चार सौ से ज्यादा मरीज बुखार के
पैथोलॉजी में भी मलेरिया और डेंगू की जांच कराने के लिए लगी रही लाइन
बरेली। दिवाली पर जिला अस्पताल में कई दिनों अवकाश से मरीजों की बुरी गत हुई। करीब पांच दिन इंतजार के बाद सोमवार को पूरे दिन जिला अस्पताल की ओपीडी खुली तो मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। करीब 18 सौ मरीजों ने नए परचे बनवाए जिनमें करीब चार सौ सिर्फ बुखार के थे। सर्वाधिक मरीज फिजिशियन और चेस्ट फिजिशियन को दिखाने पहुंचे। लक्षण के आधार पर कई मरीजों की मलेरिया, डेंगू और कोरोना की भी जांच कराई गई।
जिला अस्पताल की ओपीडी के लिए सोमवार को दोपहर एक बजे तक काउंटर पर परचा बनवाने के लिए मरीजों और तीमारदारों की कतार लगी रही। परचा बनवाकर लोग ओपीडी में पहुंचे तो वहां लंबी लाइन में काफी देर तक इंतजार करने के बाद उनका नंबर आया। भीड़ इस कदर थी कि मरीजों की कतार ओपीडी के बाहर तक पहुंच गई। पैथोलॉजी और दवा काउंटर भी भारी भीड़भाड़ लगी रही। बाल विशेषज्ञ के कक्ष में 22 बुखार पीड़ित बच्चे भी पहुंचे।
पुलिस चौकी स्थित पैथोलॉजी के सामने डेंगू, मलेरिया समेत रक्त की अन्य जांच कराने के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। अस्पताल में भीड़ अधिक होने की वजह से कोरोना गाइडलाइन का पालन होता नहीं दिखाई दिया। एडीएसआईसी और जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सुबोध शर्मा ने बताया कि मौसम में बदलाव की वजह से वायरल बीमारियों समेत बुखार के मरीज बढ़े हैं।
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सुबह-शाम तापमान का अंतर कर सकता है बीमार
जिला अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेयी के मुताबिक नवंबर की शुरुआत से सर्दी बढ़ने लगी है। दिन में धूप और रात आठ बजे के बाद ठंड का एहसास होने लगा है। सुबह, शाम और दोपहर के तापमान में काफी अंतर भी है। इसलिए सर्दी के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है। लापरवाही से सर्दी जुकाम जैसी संक्रामक बीमारियों के साथ हाइपोथर्मिया, टॉन्सिलाइटिस, अस्थमा, बेल्स पाल्सी (फेसियल पैरालिसिस), त्वचा पर चकत्ते और खून के जमाव से हार्ट अटैक होने की भी आशंका रहती है।
शरीर मुश्किल से झेल पाता है शुरुआती सर्दी
डॉ. राहुल के अनुसार शुरुआती सर्दी के लिए शरीर पूरी तरह तैयार नहीं होता इसलिए खुद को मजबूत समझने के बजाय सर्दी का एहसास होने पर गर्म कपड़े पहनना शुरू कर दें। खानपान पौष्टिक और सुपाच्य होना चाहिए ताकि शरीर में ऊष्मा का स्तर सामान्य रहे। सर्दी में देर रात तक जागना गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है। टीबी और गठिया के मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। रात में लंबी दूरी की यात्रा या शाम को टहलने से बचना चाहिए। सुबह-शाम कान, हाथ, पैर आदि अंग को ढकें। वाहन चलाते समय भी यही सावधानी बरतें।
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पैथोलॉजी में भी मलेरिया और डेंगू की जांच कराने के लिए लगी रही लाइन
बरेली। दिवाली पर जिला अस्पताल में कई दिनों अवकाश से मरीजों की बुरी गत हुई। करीब पांच दिन इंतजार के बाद सोमवार को पूरे दिन जिला अस्पताल की ओपीडी खुली तो मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। करीब 18 सौ मरीजों ने नए परचे बनवाए जिनमें करीब चार सौ सिर्फ बुखार के थे। सर्वाधिक मरीज फिजिशियन और चेस्ट फिजिशियन को दिखाने पहुंचे। लक्षण के आधार पर कई मरीजों की मलेरिया, डेंगू और कोरोना की भी जांच कराई गई।
जिला अस्पताल की ओपीडी के लिए सोमवार को दोपहर एक बजे तक काउंटर पर परचा बनवाने के लिए मरीजों और तीमारदारों की कतार लगी रही। परचा बनवाकर लोग ओपीडी में पहुंचे तो वहां लंबी लाइन में काफी देर तक इंतजार करने के बाद उनका नंबर आया। भीड़ इस कदर थी कि मरीजों की कतार ओपीडी के बाहर तक पहुंच गई। पैथोलॉजी और दवा काउंटर भी भारी भीड़भाड़ लगी रही। बाल विशेषज्ञ के कक्ष में 22 बुखार पीड़ित बच्चे भी पहुंचे।
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पुलिस चौकी स्थित पैथोलॉजी के सामने डेंगू, मलेरिया समेत रक्त की अन्य जांच कराने के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। अस्पताल में भीड़ अधिक होने की वजह से कोरोना गाइडलाइन का पालन होता नहीं दिखाई दिया। एडीएसआईसी और जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सुबोध शर्मा ने बताया कि मौसम में बदलाव की वजह से वायरल बीमारियों समेत बुखार के मरीज बढ़े हैं।
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सुबह-शाम तापमान का अंतर कर सकता है बीमार
जिला अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. राहुल बाजपेयी के मुताबिक नवंबर की शुरुआत से सर्दी बढ़ने लगी है। दिन में धूप और रात आठ बजे के बाद ठंड का एहसास होने लगा है। सुबह, शाम और दोपहर के तापमान में काफी अंतर भी है। इसलिए सर्दी के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है। लापरवाही से सर्दी जुकाम जैसी संक्रामक बीमारियों के साथ हाइपोथर्मिया, टॉन्सिलाइटिस, अस्थमा, बेल्स पाल्सी (फेसियल पैरालिसिस), त्वचा पर चकत्ते और खून के जमाव से हार्ट अटैक होने की भी आशंका रहती है।
शरीर मुश्किल से झेल पाता है शुरुआती सर्दी
डॉ. राहुल के अनुसार शुरुआती सर्दी के लिए शरीर पूरी तरह तैयार नहीं होता इसलिए खुद को मजबूत समझने के बजाय सर्दी का एहसास होने पर गर्म कपड़े पहनना शुरू कर दें। खानपान पौष्टिक और सुपाच्य होना चाहिए ताकि शरीर में ऊष्मा का स्तर सामान्य रहे। सर्दी में देर रात तक जागना गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है। टीबी और गठिया के मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। रात में लंबी दूरी की यात्रा या शाम को टहलने से बचना चाहिए। सुबह-शाम कान, हाथ, पैर आदि अंग को ढकें। वाहन चलाते समय भी यही सावधानी बरतें।