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सौ दिन की मशक्कत के बाद बेहोश हुआ फंदा लटकाए घूम रहा बाघ
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किशनपुर सेंक्चुरी में शिकारियों के फंदे से छूटकर भागे बाघ की गर्दन में कसा रह गया था रस्सी का फंदा
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। किशनपुर सेंक्चुरी में शिकारियों के चंगुल से छूटकर भागे बाघ की गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा कसा रह गया था। टीमें काफी समय से उसे बेहोश करने में लगी हुई थीं, लेकिन कभी मौसम तो कभी अन्य कारणों से उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही थी। बीते दिनों एक बार फिर शुरू किए अभियान के सौवें दिन आखिरकार टीम ने बाघ को बेहोश करने में सफलता पा ली। फंदा निकालने के बाद टीम में शामिल चिकित्सकों ने मामूली इलाज के बाद बाघ को फिर से जंगल में छोड़ दिया।
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनुपर सेंक्चुरी की कटैया बीट में 17 दिसंबर 2020 को जंगल में लगे कैमरे में एक बाघ की तस्वीर ट्रैप हुई थी जिसकी गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा पड़ा था। इसके एक दिन पहले ही दुधवा नेशनल पार्क के प्रभारी उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने किशनपुर सेंक्चुरी में ही दो शिकारियों को गिरफ्तार किया था।
गर्दन में फंदे सहित बाघ की तस्वीर दिखने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव ने बाघ को बेहोश करके गर्दन से फंदा निकालने के निर्देश दिए थे। तभी से टीमें किशनपुर सेंक्चुरी में डेरा डाले थीं, लेकिन घनी झाड़ियों और ऊंची घास के कारण बाघ टीम को लगातार चकमा दे जा रहा था।
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अथक प्रयास के बाद बृहस्पतिवार को टीम में शामिल डॉ. दया ने बाघ को बेहोश करने में सफलता पा ली। बाघ के बेहोश होते ही डॉक्टरों की टीम ने बाघ का स्वास्थ्य परीक्षण किया। गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा कस जाने से उसकी गर्दन में मामूली घाव हो गया था, जिसके चलते बाघ को एक पिंजरे में रखकर उसका विधिवत इलाज के बाद उसे फिर जंगल में छोड़ दिया गया।
दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बाघ को बेहोश किए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि बाघ की गर्दन में मामूली घाव हो गया था, इलाज करने के बाद उसे जंगल में फिर छोड़ दिया गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनुपर सेंक्चुरी की कटैया बीट में 17 दिसंबर 2020 को जंगल में लगे कैमरे में एक बाघ की तस्वीर ट्रैप हुई थी जिसकी गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा पड़ा था। इसके एक दिन पहले ही दुधवा नेशनल पार्क के प्रभारी उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने किशनपुर सेंक्चुरी में ही दो शिकारियों को गिरफ्तार किया था।
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गर्दन में फंदे सहित बाघ की तस्वीर दिखने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव ने बाघ को बेहोश करके गर्दन से फंदा निकालने के निर्देश दिए थे। तभी से टीमें किशनपुर सेंक्चुरी में डेरा डाले थीं, लेकिन घनी झाड़ियों और ऊंची घास के कारण बाघ टीम को लगातार चकमा दे जा रहा था।
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अथक प्रयास के बाद बृहस्पतिवार को टीम में शामिल डॉ. दया ने बाघ को बेहोश करने में सफलता पा ली। बाघ के बेहोश होते ही डॉक्टरों की टीम ने बाघ का स्वास्थ्य परीक्षण किया। गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा कस जाने से उसकी गर्दन में मामूली घाव हो गया था, जिसके चलते बाघ को एक पिंजरे में रखकर उसका विधिवत इलाज के बाद उसे फिर जंगल में छोड़ दिया गया।
दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक एवं फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बाघ को बेहोश किए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि बाघ की गर्दन में मामूली घाव हो गया था, इलाज करने के बाद उसे जंगल में फिर छोड़ दिया गया है।