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Bareilly News: जमीन के विवाद में भतीजे व भाई-भाभी की हत्या की सुपारी देने का आरोप
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जमीन के विवाद से जुड़े हत्या की साजिश और मारपीट के मामले में स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट अभय श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। फरीदपुर निवासी तरुण कुमार ने आरोप लगाया था कि चाचा ने पांच लाख रुपये में उन्हें और उनके माता-पिता को मारने की सुपारी दी थी।
तरुण ने वकील के जरिये अदालत को बताया कि उनके पिता नेत्रपाल व चाचा शिशुपाल में जमीन को लेकर विवाद है। इसी रंजिश में शिशुपाल और उसके बेटे मनोज ने पांच लाख रुपये में आठ लोगों को हत्या की सुपारी दी। 23 जनवरी को रात साढ़े साठ बजे हमलावर लाठी-डंडों और अवैध हथियारों से लैस होकर उसके घर में घुस आए। उनकी मां गायत्री के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पीटा। चाची सरोज बचाने आईं तो उनको भी पीट दिया। हमलावरों ने पिस्तौल से गोली चलाई, इसमें तरुण बाल-बाल बचे। पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो तरुण ने साक्ष्यों सहित कोर्ट की शरण ली। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 मई को होगी।
पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप
तरुण कुमार ने ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वह थाने गए, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय जांच के नाम पर उन्हें गुमराह किया। उन्होंने 24 जनवरी को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई तो पुलिस ने 25 जनवरी को चाची सरोज का मेडिकल कराया, लेकिन कार्रवाई फिर भी नहीं की।
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तरुण ने वकील के जरिये अदालत को बताया कि उनके पिता नेत्रपाल व चाचा शिशुपाल में जमीन को लेकर विवाद है। इसी रंजिश में शिशुपाल और उसके बेटे मनोज ने पांच लाख रुपये में आठ लोगों को हत्या की सुपारी दी। 23 जनवरी को रात साढ़े साठ बजे हमलावर लाठी-डंडों और अवैध हथियारों से लैस होकर उसके घर में घुस आए। उनकी मां गायत्री के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पीटा। चाची सरोज बचाने आईं तो उनको भी पीट दिया। हमलावरों ने पिस्तौल से गोली चलाई, इसमें तरुण बाल-बाल बचे। पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो तरुण ने साक्ष्यों सहित कोर्ट की शरण ली। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 मई को होगी।
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पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप
तरुण कुमार ने ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वह थाने गए, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय जांच के नाम पर उन्हें गुमराह किया। उन्होंने 24 जनवरी को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई तो पुलिस ने 25 जनवरी को चाची सरोज का मेडिकल कराया, लेकिन कार्रवाई फिर भी नहीं की।
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