Bareilly News: आला हजरत ने अंग्रेजों के खिलाफ दिया था फतवा, जंग-ए-आजादी में परिवार ने दिया अहम योगदान
आला हजरत ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा दिया था। उन्होंने अंग्रेजों के कार्यक्रमों में मुसलमानों के जाने पर पाबंदी लगा दी थी। वह मुसलमानों को आपस में बैठाकर उनके मसले हल कराते थे।
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बरेली के आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के घराने का जंग-ए-आजादी में अहम किरदार रहा। आला हजरत ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा दिया था। अग्रेजों से नफरत का आलम यह था कि वह रानी विक्टोरिया और जार्ज पंचम का डाक टिकट पोस्टकार्ड पर हमेशा उल्टा चिपकाते थे।
दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने बताया कि आला हजरत ने अंग्रेजों की ओर से आयोजित तमाशे व व्याख्यान में मुसलमानों के जाने पर पाबंदी लगाई थी। वे हिंदुस्तानियों के अंग्रेजों के कोर्ट-कचहरी में जाने के खिलाफ थे। वह मुसलमानों को आपस में बैठाकर उनके मसले हल कराते थे।
आला हजरत के वालिद ने 1857 की जंग में लिया था हिस्सा
अहसन मियां के अनुसार, आला हजरत के वालिद मुफ्ती नकी अली खान ने रुहेलखंड में अंग्रेजों के खिलाफ 1857 की जंग में हिस्सा लिया था। उनको आजादी के लिए संघर्ष करने वालों को घोड़ों की आपूर्ति करने और उनका रख-रखाव करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
दरगाह के नासिर कुरैशी बताते हैं कि आला हजरत ने पूरी दुनिया को अमन और शांति का पैगाम देते हुए इस्लाम के बुनियादी उसूलों पर चलने का आह्वान किया। हिंदुस्तान के मौजूदा दौर में आला हजरत जैसा आलिम पैदा नहीं हुआ।
इस्लामिया मैदान पर सज गया आला हजरत का मेला
बरेली में आला हजरत के उर्स के लिए मेला सज गया है। दरगाह से लेकर इस्लामिया इंटर काॅलेज के मैदान तक तैयारियां पूरी हो चुकीं हैं। दरगाह सहित आसपास के इलाके जायरीन की आमद से गुलजार हो रहे हैं। उर्स स्थल इस्लामिया इंटर काॅलेज मैदान पर बड़ा मंच व भव्य पंडाल तैयार हो गया है।
यहां पर अस्थायी कुतुबखाना भी तैयार किया गया है, जहां इस्लामी किताबें उपलब्ध रहेंगी। मैदान पर पूछताछ कार्यालय, पुलिस कैंप, मेडिकल कैंप सहित अन्य शिविर लगाए जा रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस के वाच टावर लगाए गए हैं। नगर निगम ने पेयजल की व्यवस्था सहित वजूखाना, स्नानघर आदि तैयार किए हैं।
गरीब नवाज की दरगाह से आया संदल
रविवार रात दरगाह पर गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसमें अजमेर शरीफ से ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह का संदल और गुलाब पेश किया गया। इस दौरान अजमेर के गद्दीनशीन भी मौजूद रहे। दरगाह प्रबंधन ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, नेपाल आदि देशों से जायरीन शहर आ गए हैं।