फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   A is not a crime... Now prisoners are learning Kakhara from A.

Bareilly News: अ से अपराध नहीं... अब क से ककहरा सीख रहे कैदी

Fri, 11 Oct 2024 06:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 11 Oct 2024 06:24 AM IST
विज्ञापन
A is not a crime... Now prisoners are learning Kakhara from A.
बरेली। अब तक अ से अपराध, प से पिस्टल, त से तमंचा, च से चाकू, ह से हत्या की समझ रखने वाले कैदी व बंदी जेल की चहारदीवारी में ककहरा सीख रहे हैं। जिन्हें उम्रकैद हो चुकी है, वह भी अक्षरों की पहचान को आतुर हैं। अक्षर ज्ञान के बाद उनका दुनिया को देखने का नजरिया बदल चुका है। अब तक जिला जेल (सेंट्रल जेल-2) के 93 बंदी अंगूठाटेक होने का दाग मिटाकर साक्षर हो चुके हैं। इनमें से कई अखबार पढ़कर देश-दुनिया की खबर ले रहे हैं। कई आध्यात्मिक साहित्य पढ़कर अपने अंदर बदलाव महसूस कर रहे हैं।
विज्ञापन

हत्या के जुर्म में उम्रकैद काट रहा हेम सिंह जेल में आया तो निरक्षर था। अब वह न सिर्फ दस्तखत कर लेता है, बल्कि अखबार भी पढ़ लेता है। बेसिक शिक्षा विभाग व एक संस्था के सहयोग से जेल में रोज दो घंटे कैदियों-बंदियों की क्लास लगती है। 93 बंदियों का पहला बैच पासआउट हो चुका है। इसमें शामिल 79 पुरुष और 14 महिला बंदी शामिल हैं। अब 35 बंदियों का नया बैच अपनी अंगूठाटेक की छवि को बदलने के लिए प्रयासरत है।
विज्ञापन

अभ्यस्त अपराधी भी सीख रहे ककहरा
अमरपाल व धर्मपाल नाम के दो अपराधी चोरी के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। फिरोज, अजीत व राकेश के खिलाफ दुष्कर्म के मुकदमे दर्ज हैं। फरीद एसिड अटैक का आरोपी है। ये सभी निरक्षर थे। अब साक्षर बनने के बाद यह शिक्षकों और जेल अधिकारियों को बताते हैं कि यह ज्ञान उन्होंने बचपन में लिया होता तो शायद वह अपराध की दुनिया में ही नहीं आते। जेलर शैलेश सिंह ने बताया कि अभ्यस्त या पुराने अपराधी पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। वे दूसरों के मुकाबले जल्दी सीख रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
बेसिक शिक्षा विभाग व एक संस्था के सहयोग से जेल में बंदियों व कैदियों को साक्षर करने की मुहिम चल रही है। उन्हें रोज 12 से दो बजे तक पढ़ाया जाता है। पहले जो लोग अंगूठा लगाते थे, उम्मीद है कि जेल से जाते वक्त वह दस्तखत करेंगे। शिक्षा के साथ उनमें सकारात्मक बदलाव की भी उम्मीद जताई जा रही है। - विपिन मिश्रा, वरिष्ठ अधीक्षक, सेंट्रल जेल टू
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed