{"_id":"120-97664","slug":"Bareilly-97664-120","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिचित है टीचर सावित्री का कातिल!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिचित है टीचर सावित्री का कातिल!
Bareilly
Updated Fri, 11 Jul 2014 05:34 AM IST
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बरेली। टीचर सवित्री सक्सेना का घर संकरी और बंद गली में है। अपरिचित व्यक्ति घर में घुसना तो दूर गली में जाने तक की हिम्मत नहीं जुटा सकता। उनके मकान की चहारदीवारी नीची है लेकिन कमरे में प्रवेश के लिए गेट के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। गेट से सटे कमरे में बैठक, फिर बेडरूम और अंदर स्टोर है। बेडरूम के बराबर में सटी हुई किचिन है।
परिजनों के मुताबिक सावित्री रात को मुख्य दरवाजा और कमरे के गेट पर अंदर से ताला लगाकर सोती थीं। मगर बृहस्पतिवार सुबह दोनों गेट खुले हुए थे। बाहरी कमरे की खिड़की भी खुली थी। कमरे में गेट के पास ताले की चाबी पड़ी थीं। यानी सावित्री ने दरवाजा किसी परिचित व्यक्ति के लिए खोला होगा। सावित्री की लाश बेडरूम में बेड के पास पड़ी मिली। हरी चूड़ियां टूटी पड़ी थीं। फर्श पर कान से निकला एक कुंडल पड़ा था। इकट्ठी की हुई फोल्डिंग चारपाई व मेज पड़ी थी। यानी दम तोड़ने से पहले सावित्री ने हमलावरों से संघर्ष किया होगा। सवित्री के सिर, चेहरे और हाथों पर धारदार हथियार से कटने के घाव थे। मगर मौके पर खून से सना कोई हथियार नहीं मिला। बेड पर रखे पर्स में कुछ रुपये और सामान था। बेड पर तह बने कपड़े और कलम, चेकबुक, कई कागजात थे। घर में सावित्री का मोबाइल नहीं मिला, जो स्विच ऑफ है। परिजनों के मुताबिक सावित्री अपना मोबाइल पॉलीथिन में रखती थीं। बेड पर पड़ा सामान भी पॉलीथिन से पलटा लग रहा था। किचिन में खाना बनाने और खाने जैसा कुछ नहीं मिला। फ्रिज भी खाली था। किचिन में रखे फ्राइ पैन में कप भर पानी में चाय पत्ती पड़ी थी। अनुमान है कि सावित्री चाय बनाने जा रही होंगी। तभी हमला कर दिया गया होगा।
घटना को अंजाम इतने शातिराना अंदाज में दिया गया कि मौके पर कातिलों के हाथ, पैरों के कोई निशान नहीं मिले। सावित्री के एक हाथ में लाल चूड़ियां पड़ी थीं। जबकि मौके पर हरी चूड़ियों के टुकड़े मिले। इससे घटना में किसी महिला के शामिल होने का आशंका है। घर में रखी दो मेज और अन्य सामान पर धूल जमी थी। यानी हिमलावरों ने किसी सामान को नहीं छुआ। बड़े बेटे कैलाश चंद्र उर्फ मिंटू ने बताया कि मम्मी ने दलाल के जरिए एमबी कॉलेज के रिटायर प्रिंसिपल के बेटों से मकान का सौदा किया था। बुधवार रात साढ़े दस बजे छोटे भाई रिंकू से फोन पर मम्मी की बात हुई। मम्मी ने रिंकू को बताया कि वह मकान खरीदने को दिए एडवांस रुपये लेने गए थीं, जो नहीं मिल पाए हैं। दलाल ने रुपये चार बजे तक देने को कहा था। फिर क्या हुआ नहीं मालूम।
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क्रूरता से किया टीचर का कत्ल
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक टीचर सावित्री के शरीर पर घाव ओर चोटों के सोलह निशान पाए गए। सिर, चेहरे और हाथों पर घाव थे। पीठ और कमर पर गुम चोटों के निशान पाए गए। पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार शाम पांच बजे हुआ। घटना पोस्टमार्टम से करीब 12 घंटे पहले हुई होगी।
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नाले में फेंका खून से सना हथियार!
टीचर सावित्री का खून धारदार हथियार से किया गया, जो घटना स्थल पर नहीं मिला। चर्चा है कि हत्यारों ने खून से सना हथियार घटना स्थल से कुछ दूर गंदे नाले में फेंक दिया। पड़ोस के लोगों ने कूड़े के ऊपर पड़ा देखा भी था, लेकिन बाद में पानी के अंदर बैठ गया।
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मोबाइल से हो सकता है खुलासा
कातिलों ने घर का कोई सामान नहीं छुआ। मगर टीचर सवित्री का मोबाइल नहीं मिला। इस घटना से पहले कातिलों ने फोन पर बात की होगी। इसीलिए कातिल सावित्री का मोबाइल ले गए। मोबाइल कॉल डिटेल से कातिलों का पता चल सकता है।
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मकान को लेकर पार्षद से हुआ झगड़ा
घर के ठीक सामने होने से पार्षद कमल सक्सेना टीचर का मकान खरीदना चाहते हैं। बेचने का पता चलने पर पार्षद ने बातचीत की थी। जबकि टीचर अपना मकान पार्षद को देना नहीं चाहती थीं। इससे दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था।
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पड़ोसियों से नहीं थे अच्छे संबंध
टीचर सावित्री रिजर्व स्वभाव की थीं। उनके पड़ोसियों से संबंध अच्छे नहीं थे। ड्यूटी से लौटने पर अपने घर में बंद हो जाती थीं। पड़ोसियों के नमस्ते तक का जवाब नहीं देती थीं।
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ढाई दशक से अलग गांव में रह रहे थे पति
रमेश सक्सेना ने बताया कि सात भाइयों में सबसे बड़ा होने के नाते वह पैतृक गांव बगरैन में रहते थे। मगर सावित्री गांव में रहने को राजी नहीं थीं। मनमुटाव के चलते पिछले 25 वर्षों से सावित्री पति से अलग शहर में रहती थीं। बड़ा बेटा कैलाश उर्फ मिंटू गांव में रहकर पिता का कारोबार संभालता है। छोटा बेटा विकास उर्फ रिंकू मां के साथ शहर में रहा। रिंकू की शादी भी सावित्री ने अपने मकान में की थी। फिलहाल वह पूना में एक नामचीन बिस्कुट कंपनी का मैनेजर है। करीब पांच साल पहले रिंकू के बेटे के नामकरण पर रमेश पत्नी के मकान में आए थे। रमेश को पैरालाइसिस हो चुका है।
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पिछले महीने गांव गई थीं सावित्री
पिछले महीने सावित्री गांव बगैरन गई थीं, दो दो दिन रहकर 29 जून को शहर लौटी। इससे पहले छोटे बेटे रिंकू के पास पूना गई थीं। वहां आठ दिन रुकी थीं। 105 साल की हो चुकी सास मुन्नी देवी की तबियत खराब चलने से सावित्री लगभग रोजाना ही बड़ी बहू से बात करती थीं। बुधवार शाम चार बजे भी फोन पर सास का हाल चाल पूछता था।
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शनिवार को होनी थी भांजी की गोद भराई
बरेली। सवित्री के बड़े भाई रामप्रकाश की बेटी की शादी तय हो गई है और शनिवार को गोद भराई की रस्म होनी तय थी। रामप्रकाश का मकान छोटा होने से कार्यक्रम सावित्री के घर में होना था। बुधवार को सावित्री ड्यूटी से लौटने पर भाई रामप्रकाश के घर गई थीं। रात में रामप्रकाश कार्यक्रम के संबंध में बातचीत करने गए। मेनगेट खुला होने से रामप्रकाश घर के आंगन में पड़ी फोल्डिंग पर करीब घंटे भर बैठे रहे। फोन करने पर सावित्री ने खुद को कर्मचारी नगर में बताया। इंतजार करने के बाद करीब दस बजे रामप्रकाश अपने घर चले गए।
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परिजनों के मुताबिक सावित्री रात को मुख्य दरवाजा और कमरे के गेट पर अंदर से ताला लगाकर सोती थीं। मगर बृहस्पतिवार सुबह दोनों गेट खुले हुए थे। बाहरी कमरे की खिड़की भी खुली थी। कमरे में गेट के पास ताले की चाबी पड़ी थीं। यानी सावित्री ने दरवाजा किसी परिचित व्यक्ति के लिए खोला होगा। सावित्री की लाश बेडरूम में बेड के पास पड़ी मिली। हरी चूड़ियां टूटी पड़ी थीं। फर्श पर कान से निकला एक कुंडल पड़ा था। इकट्ठी की हुई फोल्डिंग चारपाई व मेज पड़ी थी। यानी दम तोड़ने से पहले सावित्री ने हमलावरों से संघर्ष किया होगा। सवित्री के सिर, चेहरे और हाथों पर धारदार हथियार से कटने के घाव थे। मगर मौके पर खून से सना कोई हथियार नहीं मिला। बेड पर रखे पर्स में कुछ रुपये और सामान था। बेड पर तह बने कपड़े और कलम, चेकबुक, कई कागजात थे। घर में सावित्री का मोबाइल नहीं मिला, जो स्विच ऑफ है। परिजनों के मुताबिक सावित्री अपना मोबाइल पॉलीथिन में रखती थीं। बेड पर पड़ा सामान भी पॉलीथिन से पलटा लग रहा था। किचिन में खाना बनाने और खाने जैसा कुछ नहीं मिला। फ्रिज भी खाली था। किचिन में रखे फ्राइ पैन में कप भर पानी में चाय पत्ती पड़ी थी। अनुमान है कि सावित्री चाय बनाने जा रही होंगी। तभी हमला कर दिया गया होगा।
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घटना को अंजाम इतने शातिराना अंदाज में दिया गया कि मौके पर कातिलों के हाथ, पैरों के कोई निशान नहीं मिले। सावित्री के एक हाथ में लाल चूड़ियां पड़ी थीं। जबकि मौके पर हरी चूड़ियों के टुकड़े मिले। इससे घटना में किसी महिला के शामिल होने का आशंका है। घर में रखी दो मेज और अन्य सामान पर धूल जमी थी। यानी हिमलावरों ने किसी सामान को नहीं छुआ। बड़े बेटे कैलाश चंद्र उर्फ मिंटू ने बताया कि मम्मी ने दलाल के जरिए एमबी कॉलेज के रिटायर प्रिंसिपल के बेटों से मकान का सौदा किया था। बुधवार रात साढ़े दस बजे छोटे भाई रिंकू से फोन पर मम्मी की बात हुई। मम्मी ने रिंकू को बताया कि वह मकान खरीदने को दिए एडवांस रुपये लेने गए थीं, जो नहीं मिल पाए हैं। दलाल ने रुपये चार बजे तक देने को कहा था। फिर क्या हुआ नहीं मालूम।
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क्रूरता से किया टीचर का कत्ल
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक टीचर सावित्री के शरीर पर घाव ओर चोटों के सोलह निशान पाए गए। सिर, चेहरे और हाथों पर घाव थे। पीठ और कमर पर गुम चोटों के निशान पाए गए। पोस्टमार्टम बृहस्पतिवार शाम पांच बजे हुआ। घटना पोस्टमार्टम से करीब 12 घंटे पहले हुई होगी।
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नाले में फेंका खून से सना हथियार!
टीचर सावित्री का खून धारदार हथियार से किया गया, जो घटना स्थल पर नहीं मिला। चर्चा है कि हत्यारों ने खून से सना हथियार घटना स्थल से कुछ दूर गंदे नाले में फेंक दिया। पड़ोस के लोगों ने कूड़े के ऊपर पड़ा देखा भी था, लेकिन बाद में पानी के अंदर बैठ गया।
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मोबाइल से हो सकता है खुलासा
कातिलों ने घर का कोई सामान नहीं छुआ। मगर टीचर सवित्री का मोबाइल नहीं मिला। इस घटना से पहले कातिलों ने फोन पर बात की होगी। इसीलिए कातिल सावित्री का मोबाइल ले गए। मोबाइल कॉल डिटेल से कातिलों का पता चल सकता है।
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मकान को लेकर पार्षद से हुआ झगड़ा
घर के ठीक सामने होने से पार्षद कमल सक्सेना टीचर का मकान खरीदना चाहते हैं। बेचने का पता चलने पर पार्षद ने बातचीत की थी। जबकि टीचर अपना मकान पार्षद को देना नहीं चाहती थीं। इससे दोनों के बीच झगड़ा भी हुआ था।
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पड़ोसियों से नहीं थे अच्छे संबंध
टीचर सावित्री रिजर्व स्वभाव की थीं। उनके पड़ोसियों से संबंध अच्छे नहीं थे। ड्यूटी से लौटने पर अपने घर में बंद हो जाती थीं। पड़ोसियों के नमस्ते तक का जवाब नहीं देती थीं।
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ढाई दशक से अलग गांव में रह रहे थे पति
रमेश सक्सेना ने बताया कि सात भाइयों में सबसे बड़ा होने के नाते वह पैतृक गांव बगरैन में रहते थे। मगर सावित्री गांव में रहने को राजी नहीं थीं। मनमुटाव के चलते पिछले 25 वर्षों से सावित्री पति से अलग शहर में रहती थीं। बड़ा बेटा कैलाश उर्फ मिंटू गांव में रहकर पिता का कारोबार संभालता है। छोटा बेटा विकास उर्फ रिंकू मां के साथ शहर में रहा। रिंकू की शादी भी सावित्री ने अपने मकान में की थी। फिलहाल वह पूना में एक नामचीन बिस्कुट कंपनी का मैनेजर है। करीब पांच साल पहले रिंकू के बेटे के नामकरण पर रमेश पत्नी के मकान में आए थे। रमेश को पैरालाइसिस हो चुका है।
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पिछले महीने गांव गई थीं सावित्री
पिछले महीने सावित्री गांव बगैरन गई थीं, दो दो दिन रहकर 29 जून को शहर लौटी। इससे पहले छोटे बेटे रिंकू के पास पूना गई थीं। वहां आठ दिन रुकी थीं। 105 साल की हो चुकी सास मुन्नी देवी की तबियत खराब चलने से सावित्री लगभग रोजाना ही बड़ी बहू से बात करती थीं। बुधवार शाम चार बजे भी फोन पर सास का हाल चाल पूछता था।
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शनिवार को होनी थी भांजी की गोद भराई
बरेली। सवित्री के बड़े भाई रामप्रकाश की बेटी की शादी तय हो गई है और शनिवार को गोद भराई की रस्म होनी तय थी। रामप्रकाश का मकान छोटा होने से कार्यक्रम सावित्री के घर में होना था। बुधवार को सावित्री ड्यूटी से लौटने पर भाई रामप्रकाश के घर गई थीं। रात में रामप्रकाश कार्यक्रम के संबंध में बातचीत करने गए। मेनगेट खुला होने से रामप्रकाश घर के आंगन में पड़ी फोल्डिंग पर करीब घंटे भर बैठे रहे। फोन करने पर सावित्री ने खुद को कर्मचारी नगर में बताया। इंतजार करने के बाद करीब दस बजे रामप्रकाश अपने घर चले गए।