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घूसखोर अफसर से बंद कमरे में तीन घंटे पूछताछ
Bareilly
Updated Thu, 04 Apr 2013 05:30 AM IST
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बरेली। सीबीआई ने घूस लेने के आरोप में पकड़े पूर्वोत्तर रेलवे के बरेली और लखनऊ मंडल के वित्त प्रबंधक डीके मेहरोत्रा से बंद कमरे में करीब तीन घंटे पूछताछ की। इस दौरान रेलवे के अफसरों में खलबली मची रही। जबकि अधिकांश कर्मचारी खुश नजर आए।
बुधवार शाम सवा चार बजे सीबीआई टीम ने मंडल वित्त प्रबंधक डीके मेहरोत्रा को रिश्वत लेते पकड़ा। इसके बाद कमरे का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया। सीबीआई ने करीब तीन घंटे तक गहन पूछताछ की। इस दौरान वीडियो रिकार्डिंग भी की गई। सीबीआई ने मंडल वित्त प्रबंधक के दफ्तर का सारा रिकॉर्ड चेक किया। शिकायत संबंधी कागजों को कब्जे में ले लिया।
सीबीआई के छापे का पता लगने पर कार्यालय में मौजूद अफसर सन्न रह गए। आपस में एक-दूसरे से फोन पर संपर्क करते रहे। कई अफसर तो नजारा देखने के लिए मंडल वित्त अधिकारी कक्ष के सामने से होकर इधर-उधर जाते रहे। कई कर्मचारियों का कहना था कि इस दफ्तर में घूसखोरी ने बुरी तरह से पैर जमा लिए है। बाहर के लोगों को की बात छोड़ो कर्मचारियों तक का काम बगैर घूस दिए नहीं होता। सीबीआई की कार्रवाई से कर्मचारी मन ही मन काफी खुश लग रहे थे। शाम सवा सात बजे सीबीआई ने आरोपी मंडल वित्त प्रबंधक डीके मेहरोत्रा को दफ्तर से निकालकर गाड़ी में बैठाया और अपने साथ ले गए। मीडिया के सामने आने पर मेहरोत्रा ने अपने मुंह पर रुमाल ढक लिया। यहां बता दें कि डीके मेहरोत्रा मूल रूप से कानपुर का रहने वाला है। सन् 1987 में वह बतौर क्लर्क रेलवे में भर्ती हुआ। फिर एक के बाद एक प्रमोशन पाता गया। लखनऊ में उसकी आलीशान कोठी बताई जाती है।
बुधवार शाम सवा चार बजे सीबीआई टीम ने मंडल वित्त प्रबंधक डीके मेहरोत्रा को रिश्वत लेते पकड़ा। इसके बाद कमरे का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया। सीबीआई ने करीब तीन घंटे तक गहन पूछताछ की। इस दौरान वीडियो रिकार्डिंग भी की गई। सीबीआई ने मंडल वित्त प्रबंधक के दफ्तर का सारा रिकॉर्ड चेक किया। शिकायत संबंधी कागजों को कब्जे में ले लिया।
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सीबीआई के छापे का पता लगने पर कार्यालय में मौजूद अफसर सन्न रह गए। आपस में एक-दूसरे से फोन पर संपर्क करते रहे। कई अफसर तो नजारा देखने के लिए मंडल वित्त अधिकारी कक्ष के सामने से होकर इधर-उधर जाते रहे। कई कर्मचारियों का कहना था कि इस दफ्तर में घूसखोरी ने बुरी तरह से पैर जमा लिए है। बाहर के लोगों को की बात छोड़ो कर्मचारियों तक का काम बगैर घूस दिए नहीं होता। सीबीआई की कार्रवाई से कर्मचारी मन ही मन काफी खुश लग रहे थे। शाम सवा सात बजे सीबीआई ने आरोपी मंडल वित्त प्रबंधक डीके मेहरोत्रा को दफ्तर से निकालकर गाड़ी में बैठाया और अपने साथ ले गए। मीडिया के सामने आने पर मेहरोत्रा ने अपने मुंह पर रुमाल ढक लिया। यहां बता दें कि डीके मेहरोत्रा मूल रूप से कानपुर का रहने वाला है। सन् 1987 में वह बतौर क्लर्क रेलवे में भर्ती हुआ। फिर एक के बाद एक प्रमोशन पाता गया। लखनऊ में उसकी आलीशान कोठी बताई जाती है।
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