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मरम्मत को आया कोच जला, एक करोड़ का नुकसान
Bareilly
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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बरेली। इज्जतनगर रेल कारखाने में मरम्मत के लिए एमजी कैरिज वर्कशॉप में खड़ा एक कोच इतवार की रात जलकर राख हो गया। इस घटना में रेलवे को एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। कारखाने में आरपीएफ जवानों का कड़ा पहरा रहता है लेकिन उन्हें इसकी भनक नहीं लगी। मुख्य कारखाना प्रबंधक मनोज विश्वास भी घटना से सकते में हैं। उन्होंने अफसरों की टीम के साथ मौके पर पहुंचकर छानबीन की। मामले की जांच आरपीएफ कमांडर और उप मुख्य उत्पादन इंजीनियर समेत तीन सदस्यीय टीम को सौंप दी गई है।
शनिवार को रेल कारखाना की एमजी कैरिज वर्कशॉप में एक कोच मरम्मत के लिए आया था। दोपहर एक बजे कारखाना बंद हो गया। अगले दिन इतवार की छुट्टी होने की वजह से वर्कशॉप का स्टाफ नहीं आया। सोमवार को वर्कशॉप के कर्मचारी पहुंचे तो उन्हें कोच पूरी तरह जला मिला। उन्होंने तुरंत फोरमैन को जानकारी दी। सूचना पर मुख्य कारखाना प्रबंधक (सीडब्ल्यूएम) ने आरपीएफ के सहायक कमांडर बाबूलाल सागर को बुला लिया। घटना की जांच के लिए आरपीएफ कमांडर एनएस राना और उप मुख्य उत्पादन इंजीनियर एमएन दुबे समेत तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। आग लगने की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है।
कोच में आग लगने से एक करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की बात कही जा रही है। शॉप में शनिवार को ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को भी कार्रवाई का डर सता रहा है। जांच शुरू होने पर कोच के आसपास बैरीकेटिंग करा दी गई है। ताकि साक्ष्यों से कोई छेड़छाड़ न कर सके। मुख्य कारखाना प्रबंधक ने बताया कि अभी तक यह पता नहीं लग पाया है कि कोच में आग कैसे लगी। मामले की जांच कराई जा रही है। इसके लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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इंसेट
अंधेरे में डूबा रहता है कारखाना
बरेली। रेल अफसरों के घर तो रात में रोशनी से जगमगाते रहते हैं लेकिन बिजली बचाने के नाम पर रेल कारखाना रात को अंधेरे में रहता है। कारखाने में चार हाईमास्ट लाइटें लगी हैं लेकिन जलती सिर्फ एक ही है। आरपीएफ के जवानों की जिम्मेदारी है कि कारखाना बंद होने के बाद वह रात में लगातार गश्त करते रहें लेकिन अंधेरा होने की वजह से वे सभी 18 वर्कशॉप की निगरानी नहीं रख पाते हैं।
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शनिवार को रेल कारखाना की एमजी कैरिज वर्कशॉप में एक कोच मरम्मत के लिए आया था। दोपहर एक बजे कारखाना बंद हो गया। अगले दिन इतवार की छुट्टी होने की वजह से वर्कशॉप का स्टाफ नहीं आया। सोमवार को वर्कशॉप के कर्मचारी पहुंचे तो उन्हें कोच पूरी तरह जला मिला। उन्होंने तुरंत फोरमैन को जानकारी दी। सूचना पर मुख्य कारखाना प्रबंधक (सीडब्ल्यूएम) ने आरपीएफ के सहायक कमांडर बाबूलाल सागर को बुला लिया। घटना की जांच के लिए आरपीएफ कमांडर एनएस राना और उप मुख्य उत्पादन इंजीनियर एमएन दुबे समेत तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। आग लगने की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है।
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कोच में आग लगने से एक करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की बात कही जा रही है। शॉप में शनिवार को ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को भी कार्रवाई का डर सता रहा है। जांच शुरू होने पर कोच के आसपास बैरीकेटिंग करा दी गई है। ताकि साक्ष्यों से कोई छेड़छाड़ न कर सके। मुख्य कारखाना प्रबंधक ने बताया कि अभी तक यह पता नहीं लग पाया है कि कोच में आग कैसे लगी। मामले की जांच कराई जा रही है। इसके लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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अंधेरे में डूबा रहता है कारखाना
बरेली। रेल अफसरों के घर तो रात में रोशनी से जगमगाते रहते हैं लेकिन बिजली बचाने के नाम पर रेल कारखाना रात को अंधेरे में रहता है। कारखाने में चार हाईमास्ट लाइटें लगी हैं लेकिन जलती सिर्फ एक ही है। आरपीएफ के जवानों की जिम्मेदारी है कि कारखाना बंद होने के बाद वह रात में लगातार गश्त करते रहें लेकिन अंधेरा होने की वजह से वे सभी 18 वर्कशॉप की निगरानी नहीं रख पाते हैं।