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आरटीओ के पेंच से वाहन संचालक परेशान
Bareilly
Updated Sun, 24 Aug 2014 05:30 AM IST
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केस 01
फरीदपुर के योगेंद्र शर्मा अपने स्कूल की खुद की वैन चलवाने के लिए आरटीओ दफ्तर में परमिट बनवाने गए थे। वाहन की कीमत साढे़ 13 लाख रुपये थी। आरटीओ कार्यालय के टैक्स सेक्शन में जब वे परमिट लेने गए तो उन्हें स्कूल वाहन का नहीं बल्कि कांट्रैक्ट कैरिज का परमिट लेने का दबाव बनाया गया। जो टैक्स जमा करना था, वह भी वाहन की राशि से सात फीसदी ज्यादा था।
केस 02
एक निजी स्कू ल के प्रधानाचार्य अपना वाहन चलवाना चाहते हैं। उन्होंने साढे़ छह लाख रुपये का वाहन शोरूम से जब निकलवाया तो उन्हें कुछ छूट भी मिली। इसका इनवाइस बना, लेकिन जब आरटीओ में परमिट लेने गए तो उनका टैक्स कंपनी की वेबसाइट पर दिखा रहे दाम के आधार पर बनाया जा रहा था। इनवाइस के आधार पर नहीं। उन्हाेंने इसकी शिकायत अधिकारियाें से की, लेकिन मदद नहीं मिली।
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। स्कूल वैन चलाने के लिए अब कुछ स्कूल परमिशन दे रहे हैं लेकिन इसमें आरटीओ की ओर से पेंच फंसाया जा रहा है। वाहन मालिक स्कूल वाहन के नाम पर परमिट मांग रहे हैं, जबकि आरटीओ दफ्तर में बैठे बाबू वाहनाें का परमिट कांटैक्ट कैरिज यानी ठेका परमिट के आधार पर बना रहे हैं। वाहनाें का टैक्स भी इनवायस के आधार पर नहीं बल्कि वाहन कं पनी की वेबसाइट पर जारी रेट के आधार पर बनाने का दबाव बनाया जा रहा है। वैन मालिकाें ने आरोप लगाया कि इनवायस के आधार पर टैक्स जमा करने के लिए सेक्शन के कर्मचारी घूस भी मांग रहे हैं। शुक्रवार और शनिवार को कई वाहन मालिकाें ने इस पर आपत्ति भी जताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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स्कूल परमिट की शर्त
- आठ सीटर वैन हो
- सीएनजी किट हो
- वाहन की छत धातु की हो
कोट
टैक्स इनवाइस के आधार पर लिया जाएगा न कि वेबसाइट पर जारी रेट के आधार पर। कुछ वाहनों में नियम के अनुसार कुछ कमी थी इसलिए उन्हें ठेका परमिट दिया जा रहा है।
-उमाशंकर यादव, एआरटीओ
फरीदपुर के योगेंद्र शर्मा अपने स्कूल की खुद की वैन चलवाने के लिए आरटीओ दफ्तर में परमिट बनवाने गए थे। वाहन की कीमत साढे़ 13 लाख रुपये थी। आरटीओ कार्यालय के टैक्स सेक्शन में जब वे परमिट लेने गए तो उन्हें स्कूल वाहन का नहीं बल्कि कांट्रैक्ट कैरिज का परमिट लेने का दबाव बनाया गया। जो टैक्स जमा करना था, वह भी वाहन की राशि से सात फीसदी ज्यादा था।
केस 02
एक निजी स्कू ल के प्रधानाचार्य अपना वाहन चलवाना चाहते हैं। उन्होंने साढे़ छह लाख रुपये का वाहन शोरूम से जब निकलवाया तो उन्हें कुछ छूट भी मिली। इसका इनवाइस बना, लेकिन जब आरटीओ में परमिट लेने गए तो उनका टैक्स कंपनी की वेबसाइट पर दिखा रहे दाम के आधार पर बनाया जा रहा था। इनवाइस के आधार पर नहीं। उन्हाेंने इसकी शिकायत अधिकारियाें से की, लेकिन मदद नहीं मिली।
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अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। स्कूल वैन चलाने के लिए अब कुछ स्कूल परमिशन दे रहे हैं लेकिन इसमें आरटीओ की ओर से पेंच फंसाया जा रहा है। वाहन मालिक स्कूल वाहन के नाम पर परमिट मांग रहे हैं, जबकि आरटीओ दफ्तर में बैठे बाबू वाहनाें का परमिट कांटैक्ट कैरिज यानी ठेका परमिट के आधार पर बना रहे हैं। वाहनाें का टैक्स भी इनवायस के आधार पर नहीं बल्कि वाहन कं पनी की वेबसाइट पर जारी रेट के आधार पर बनाने का दबाव बनाया जा रहा है। वैन मालिकाें ने आरोप लगाया कि इनवायस के आधार पर टैक्स जमा करने के लिए सेक्शन के कर्मचारी घूस भी मांग रहे हैं। शुक्रवार और शनिवार को कई वाहन मालिकाें ने इस पर आपत्ति भी जताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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स्कूल परमिट की शर्त
- आठ सीटर वैन हो
- सीएनजी किट हो
- वाहन की छत धातु की हो
कोट
टैक्स इनवाइस के आधार पर लिया जाएगा न कि वेबसाइट पर जारी रेट के आधार पर। कुछ वाहनों में नियम के अनुसार कुछ कमी थी इसलिए उन्हें ठेका परमिट दिया जा रहा है।
-उमाशंकर यादव, एआरटीओ