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Bareilly News: यातना के 96 घंटे... पानी की जगह शराब पिलाई, बक्से में सुलाया

Wed, 22 Jan 2025 01:17 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2025 01:17 AM IST
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96 hours of torture... made to drink alcohol instead of water, made to sleep in a box
बरेली। बांदा निवासी अंडा कारोबारी हरीश कटियार ने यातना के 96 घंटों का दर्द बयां किया तो लोग अवाक रह गए। कहा कि वह जिस भाई की हमेशा मदद करते रहे, उसी ने उनकी जान खतरे में डाल दी। आरोपी उनको पानी की जगह शराब पिलाते थे। बक्से में सुलाया जाता था। फिरौती नहीं मिलने पर उनकी हत्या कर शव को बक्से में रखकर उत्तराखंड सीमा पर फेंकने की साजिश रची गई थी।
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हरीश के मुताबिक, जब उन्हें अगवा किया गया तो उन्होंने शोर मचाया। इस पर आरोपियों ने उनके सिर पर तमंचा सटाकर जान से मारने की धमकी दी और कार में बैठा लिया। रास्ते में मौका मिलने पर उन्होंने देखा तो खुद को पिछली सीट पर पाया। कार अनूप चला रहा था। अनूप के पीछे तमंचा लगाकर एक आदमी बैठा था। उन्हें लगा है कि अनूप और वह दोनों अगवा किए गए हैं। रात में एक बदमाश ने उनकी चेन और अंगूठी छीन ली। उन्हीं की जेब से रुपये निकालकर दोनों कारों में पेट्रोल डलवाया। दिन निकल आया तो वह शाहजहांपुर से हरदोई रोड पर घुमाते रहे। बीच-बीच में वह अनूप को इशारा करते थे कि कार थाने की ओर ले चलो पर अनूप उन्हें चुप करा देता था।
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बताया कि जिस अंकित कटियार ने मियांपुर में उदित के घर उन्हें रखवाया, वह अनूप का रिश्तेदार है। उनकी भी मियांपुर में रिश्तेदारी हैं, इसलिए आरोपी उनकी आंखें बंद कर वहां ले गए। यहां उन्हें एक ही टाइम खाना मिलता था। ज्यादातर समय उन्हें एक बक्से में सुलाया जाता था, जो ऊपर से खुला रहता था। बदमाश आपस में बात कर रहे थे कि रुपये नहीं मिलने या खतरा महसूस होने पर उनकी हत्या कर देंगे। बारादरी थाना प्रभारी धनंजय पांडेय ने जब हरीश को छुड़ाया तो वह बोले कि मैं जीना चाहता हूं, मुझे पानी चाहिए। फिर वह करीब दो लीटर पानी एक बार में ही पी गए।
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अनूप को लगातार रुपया दिया, राशन भी घर भिजवाया
हरीश ने बताया कि सफर के दौरान कई बार उसे लघुशंका लगी पर इन लोगों ने एकाध बार ही उन्हें अंधेरे या जंगली इलाके में लघुशंका कराई। जबकि कार चला रहा अनूप कई बार उतरकर लघुशंका करने गया। तब उन्हें उस पर शक हुआ, लेकिन बीच-बीच में आरोपी उसे गाली देकर तमाचा मारते थे तो लगता था कि दोनों ही फंस गए हैं। हरीश की पत्नी सीतापुर में सरकारी शिक्षक हैं। उनकी दो जुड़वां बेटियां अपनी दादी के साथ कानपुर में रहकर पढ़ाई करती हैं। वह भी मूल रूप से हरदोई के पांडेयपुर के निवासी हैं, पर कई साल से वह बांदा में रहकर अंडे का कारोबार कर रहे हैं।
हरीश ने बताया कि जब भी अनूप परेशानी में आया, उन्होंने उसको रुपये दिए। डेढ़ लाख रुपये पिछले साल दिए। अपनी पत्नी से पचास हजार दिलवाए। अनूप और रुपये मांग रहा था तो उन्होंने कहा था कि वह अपनी जमीन बेचने जा रहे हैं। उसका एग्रीमेंट कराकर उसे रुपये दे देंगे। यहां तक कि उसके घर राशन खत्म हो गया था तो सरसों से लेकर गेहूं व चावल तक उन्होंने बांदा से भिजवाया था। उन्हें नहीं पता था कि अनूप उन्हें आसान शिकार बना लेगा।
कोरोना महामारी के दौरान फेल हुआ प्रॉपर्टी का काम, खर्चे थे बेहिसाब
अनूप ने पुलिस को बताया कि उसके दो भाई इंजीनियरिंग करके अच्छी नौकरी कर रहे हैं। पिता को भी पेंशन मिल रही है। वह भी प्रॉपर्टी का काम करता था। कोरोना महामारी के दौरान उस पर काफी कर्ज हो गया था। कार और बाहर का खाना, दोस्तों के साथ पार्टी का शौक उसने फिर भी नहीं छोड़ा तो स्थिति खराब हो गई। उसने कृष्णानगर के सेवानिवृत्त फौजी देवेंदर सिंह से तीन साल पहले पांच लाख रुपये उधार लेकर फर्रुखाबाद में प्राॅपर्टी में लगाए तो वहां भी घाटा हो गया। फौजी लगातार उससे रुपये मांग रहा था। उसने हरीश से तीन लाख रुपये मांगे थे और 15 दिन बाद देने का वादा भी किया था। अनूप के मुताबिक उसके परिवार ने उसकी मदद बंद कर दी थी। तब उसे उम्मीद थी कि उसे बचाने के लिए पिता, भाई और ससुरालवाले पांच लाख रुपये तो दे ही देंगे। बाकी 15 लाख वह गिरोह के बाकी लोगों में बांट देगा। उसके गुर्गों पर पुराना कोई केस नहीं मिला है। उसने जरूरत के हिसाब से उनको अपने साथ जोड़ा था। जैसे कि शाहिद नाम के राज मिस्त्री को गिरोह में केवल इसलिए जोड़ा गया ताकि वह गांव और आसपास में नए बने खाली घर बता सके, जहां अगले कुछ दिनों के लिए हरीश को शिफ्ट किया जा सके।
टोल प्लाजा की फुटेज से पहचान में आई कार, सर्विलांस से शक गहराया
एसएसपी ने बताया कि हरीश का मकान मालिक अनूप को जानता था। उसने क्लू दिया कि रात में अनूप ही घर पर रुके थे। उनकी कार भी गायब है। तब बांदा पुलिस के अधिकारियों से बात कर रास्ते के टोल प्लाजा की फुटेज निकलवाई। इनमें एक टोल की फुटेज में अनूप कार चलाता दिख गया। वहीं डेढ़ साल पुराना सिम चालू कर कॉल कराने से भी यह बात साफ हो गई थी कि घटना में अनूप की भूमिका सही नहीं है। 19 जनवरी को अनूप और अंकित बहेड़ी के टोल प्लाजा से बचकर उत्तराखंड पहुंचे। वहां से फिरौती की कॉल कर फोन स्विच ऑफ कर दिया, ताकि उनको पकड़ा न जा सके। एसपी सिटी मानुष पारीक, एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा सहित अन्य अधिकारी खुलासे के दौरान मौजूद रहे।

हरीश नहीं गया बाहर तो दो बार फेल हुई अपहरण की योजना
अनूप ने पुलिस को बताया कि एक महीने पहले भी उन लोगों ने हरीश का अपहरण करने की योजना बनाई थी। तब अंकित, शाहिद, खेमेंद्र, आकाश, ललित, रजत व वीरू के साथ वह अपने गांव पांडेयपुर गया। इन लोगों को उसने गांव के बाहर रखा। अनूप ने रात में हरीश से ढाबे पर चलकर खाना खाने के लिए कहा। हरीश ने जरूरी काम बताकर मना कर दिया। दूसरे दिन भी योजना सफल न होने पर ये लोग लौट आए। इसके बाद सभी साथी जल्दी ही अपहरण करने का दबाव बना रहे थे। सभी को रुपयों की जरूरत थी। एक बार वह दोबारा गए तो हरीश से चित्रकूट चलने के लिए कहा। तब हरीश ने अंडे की गाड़ी आने की बात कहकर फिर मना कर दिया था। अमर उजाला ब्यूरो
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