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मैंने प्लांट बंद नहीं कराया, एजेंसी पैरालिसिस प्लांट चला रही
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बरेली। बाकरगंज में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के मिनी प्लांट के बंद कराने की बात को नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वह प्लांट बंद नहीं कराना चाहते हैं, लेकिन एजेंसी पैरालिसिस प्लांट चला रही है। एजेंसी मालिक प्लांट लगाने के बाद उनसे मिलने नहीं आए और न ही कूड़े से उत्पादित तेल का नमूना लेकर उसको पर्यावरण की सेंट्रल लैब से उसका परीक्षण कराया। नगर आयुक्त ने कहा कि एजेंसी इसी तरह के छह प्लांट प्लांट चलाना चाहती है, लेकिन जब एक ही प्लांट संतुष्ट करने लायक है तो छह प्लांट चलाने के लिए एनओसी कैसे दी जा सकती है। नगर आयुक्त ने एजेंसी मालिक को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर दफ्तर आकर स्थिति स्पष्ट करने की चेतावनी दी है।
नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में इस समय 450 मीट्रिक टन रोजाना कूड़ा निकलता है। बाकरगंज में 100 मीट्रिक टन कूड़ा भी ठीक से निस्तारित नहीं हो पा रहा। एजेंसी वह कूड़ा निस्तारित करने के बजाय जला रही है। कूड़ा निस्तारण से जो ऑयल निकल रहा है, उसका नमूना भी उनके सामने नहीं लिया गया। वह पर्यावरण अभियंता के साथ स्वयं प्लांट का विजिट कर चुके हैं, जिसमें प्लांट की स्थिति संतोषजनक नहीं पायी गई। एजेंसी ने प्लांट चलाने के लिए शहर में कोई ऑफिस नहीं बनाया। नगर आयुक्त ने कहा कि एजेंसी कूड़ा निस्तारण से होने वाले ऑयल का नमूना उनके सामने लेकर पर्यावरण की सेंट्रल लैब से उसका परीक्षण कराए। फिर भारत सरकार के मानकों के अनुसार वर्मी कंपोस्ट बनाए। जो कूड़ा रिसाइकिल के लायक नहीं है, उसको जमींदोज करने के इंतजाम हो। तभी प्लांट सफल होगा। नगर आयुक्त का दावा है कि बरेली में जबसे वह आए हैं, तबसे यहां कूड़ा सिर्फ इकट्ठा किया जा रहा है, उसका निस्तारण नहीं हो रहा। वह कूड़े कस निस्तारण कराने के लिए एक्शन प्लान बनाकर शासन को भेज चुके हैं, जिस पर मंजूरी मिलनी बाकी है। उन्होंने कहा कि वह प्लांट पर नोटिस चस्पा करा रहे हैं। एजेंसी तीन दिन के अंदर ऑयल बनाकर उसका नमूना उनके सामने भरकर परीक्षण कराने के लिए लैब भेजे। एजेंसी जिस तरह से काम कर रही है, उससे लगता है कि वह प्लांट चलाना नहीं चाहती। नगर निगम कूड़ा निस्तारण में 100 रुपए खर्च करके 10 रुपए वापसी पर काम करने की स्थिति में नहीं। कम से कम 80 या 90 रुपए वापस आने चाहिए।
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नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में इस समय 450 मीट्रिक टन रोजाना कूड़ा निकलता है। बाकरगंज में 100 मीट्रिक टन कूड़ा भी ठीक से निस्तारित नहीं हो पा रहा। एजेंसी वह कूड़ा निस्तारित करने के बजाय जला रही है। कूड़ा निस्तारण से जो ऑयल निकल रहा है, उसका नमूना भी उनके सामने नहीं लिया गया। वह पर्यावरण अभियंता के साथ स्वयं प्लांट का विजिट कर चुके हैं, जिसमें प्लांट की स्थिति संतोषजनक नहीं पायी गई। एजेंसी ने प्लांट चलाने के लिए शहर में कोई ऑफिस नहीं बनाया। नगर आयुक्त ने कहा कि एजेंसी कूड़ा निस्तारण से होने वाले ऑयल का नमूना उनके सामने लेकर पर्यावरण की सेंट्रल लैब से उसका परीक्षण कराए। फिर भारत सरकार के मानकों के अनुसार वर्मी कंपोस्ट बनाए। जो कूड़ा रिसाइकिल के लायक नहीं है, उसको जमींदोज करने के इंतजाम हो। तभी प्लांट सफल होगा। नगर आयुक्त का दावा है कि बरेली में जबसे वह आए हैं, तबसे यहां कूड़ा सिर्फ इकट्ठा किया जा रहा है, उसका निस्तारण नहीं हो रहा। वह कूड़े कस निस्तारण कराने के लिए एक्शन प्लान बनाकर शासन को भेज चुके हैं, जिस पर मंजूरी मिलनी बाकी है। उन्होंने कहा कि वह प्लांट पर नोटिस चस्पा करा रहे हैं। एजेंसी तीन दिन के अंदर ऑयल बनाकर उसका नमूना उनके सामने भरकर परीक्षण कराने के लिए लैब भेजे। एजेंसी जिस तरह से काम कर रही है, उससे लगता है कि वह प्लांट चलाना नहीं चाहती। नगर निगम कूड़ा निस्तारण में 100 रुपए खर्च करके 10 रुपए वापसी पर काम करने की स्थिति में नहीं। कम से कम 80 या 90 रुपए वापस आने चाहिए।
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