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तब कौड़ियों के भाव बेची गई थी नेकपुर चीनी मिल
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बरेली। बसपा शासन में प्रदेश की 21 चीनी मिलों को कौड़ियों के भाव बेच दिए जाने के मामले में सीबीआई की ओर से सात लोगों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद नेकपुर चीनी मिल के उन कामगारों में भी न्याय मिलने की उम्मीद जगी है जो इस सौदे के बाद खुद को बुरी तरह ठगा महसूस कर रहे थे। नेकपुर चीनी मिल को बिजनौर की नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सिर्फ 14.11 करोड़ में बेच दिया गया था जबकि इस चीनी मिल की 33 एकड़ जमीन की ही कीमत अरबों में थी। चीनी मिल बिकने से किसानों का तो बड़ा नुकसान हुआ ही, उसमें काम करने वाले एक हजार श्रमिक भी बेरोजगार हो गए थे।
नेकपुर चीनी मिल 1952 में स्थापित की गई थी। पहले यह मिल प्राइवेट थी, सन् 1973 में चीनी मिल का सरकार ने अधिग्रहण कर लिया था।1984 में इसे शुगर फेडरेशन के अधीन कर लिया गया। सन् 1995 में नेकपुर मिल को लक्ष्य से अधिक चीनी उत्पादन के लिए गोल्ड मेडल मिला था लेकिन तीन साल बाद ही 1998 में उसे घाटे में बताकर बंद कर दिया गया। वर्ष 2007 में बसपा सरकार बनी और उसने प्रदेश की 21 बंद पड़ी चीनी मिलों को बेचने का निर्णय कर लिया। उनमें बरेली की नेकपुर चीनी मिल भी थी। नेकपुर चीनी मिल को बिजनौर की नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के हाथों मात्र 14.11 करोड़ में बेचा गया था। मिल में स्थाई, संविदा और ठेके के मिलाकर लगभग एक हजार श्रमिक कार्यरत थे, चीनी मिल बिकने से सब बेरोजगार हो गए थे। इनका मिल पर पीएफ और फंड आज भी बकाया है। कुछ श्रमिकों का केस भी न्यायालय में चल रहा है। सीबीआई जांच में चीनी मिल बिक्री घोटाले में सात लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। इससे श्रमिक और किसान खुश हैं। दोनों का मानना है कि जिस तरह चीनी मिल की अरबों की संपत्ति कौड़ियों के दामों में बेचकर अफसरों और सत्ता नेताओं को फायदा पहुंचाया गया। उसकी निष्पक्ष जांच पूरी करने के बाद दोषियों को जेल भेजना चाहिए।
नेकपुर चीनी मिल बहुत अच्छी चल रही थी। उसको सैदपुर कुर्मियान में ट्रांसफर करने के लिए वहां 90 एकड़ जमीन खरीदी गई थी। चीनी मिल बिकने के बाद इस जमीन पर जेल बन गई। चीनी मिल बिक्री में बड़ा घोटाला किया गया। एक हजार श्रमिक बेरोजगार हो गए। सीबीआई इसकी जांच में बिल्कुल नरमी न बरते। दोषियों को तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए। सतीश मेहता, जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक
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नेकपुर शुगर मिल की जमीन ही अरबों की कीमत की थी। फिर उसे मात्र 14.11 करोड़ में बेचने की क्या जरूरत पड़ गई? शुगर मिल बिक्री में बड़े पैमाने पर खेल किया गया। इसकी गहन जांच कराकर दोषियों को जेल भेजने की जरूरत है। चीनी मिल बिकने से न केवल किसान बल्कि उसमें काम करने वाले श्रमिकों का भी बड़ा नुकसान हो गया। अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान
गन्ने का रकवा हर साल बढ़ रहा है। ऐसे में तत्कालीन बसपा सरकार ने मिल बेचकर दिखाया कि उसकी किसानों के प्रति कोई हमदर्दी नहीं। दूर मिल में गन्ना ले जाने से किसान का का भाड़ा बढ़ गया। तपती दोपहर में किसान का गन्ना खेत में खड़ा है। किसान को गन्ने की दिलाई दो से तीन गुनी देनी पड़ती है। किसान की मजबूरी का फायदा दलाल बिचौलिए उठा रहे हैं। दोषियों को सजा जरूर मिले। डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान
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नेकपुर चीनी मिल 1952 में स्थापित की गई थी। पहले यह मिल प्राइवेट थी, सन् 1973 में चीनी मिल का सरकार ने अधिग्रहण कर लिया था।1984 में इसे शुगर फेडरेशन के अधीन कर लिया गया। सन् 1995 में नेकपुर मिल को लक्ष्य से अधिक चीनी उत्पादन के लिए गोल्ड मेडल मिला था लेकिन तीन साल बाद ही 1998 में उसे घाटे में बताकर बंद कर दिया गया। वर्ष 2007 में बसपा सरकार बनी और उसने प्रदेश की 21 बंद पड़ी चीनी मिलों को बेचने का निर्णय कर लिया। उनमें बरेली की नेकपुर चीनी मिल भी थी। नेकपुर चीनी मिल को बिजनौर की नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के हाथों मात्र 14.11 करोड़ में बेचा गया था। मिल में स्थाई, संविदा और ठेके के मिलाकर लगभग एक हजार श्रमिक कार्यरत थे, चीनी मिल बिकने से सब बेरोजगार हो गए थे। इनका मिल पर पीएफ और फंड आज भी बकाया है। कुछ श्रमिकों का केस भी न्यायालय में चल रहा है। सीबीआई जांच में चीनी मिल बिक्री घोटाले में सात लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। इससे श्रमिक और किसान खुश हैं। दोनों का मानना है कि जिस तरह चीनी मिल की अरबों की संपत्ति कौड़ियों के दामों में बेचकर अफसरों और सत्ता नेताओं को फायदा पहुंचाया गया। उसकी निष्पक्ष जांच पूरी करने के बाद दोषियों को जेल भेजना चाहिए।
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नेकपुर चीनी मिल बहुत अच्छी चल रही थी। उसको सैदपुर कुर्मियान में ट्रांसफर करने के लिए वहां 90 एकड़ जमीन खरीदी गई थी। चीनी मिल बिकने के बाद इस जमीन पर जेल बन गई। चीनी मिल बिक्री में बड़ा घोटाला किया गया। एक हजार श्रमिक बेरोजगार हो गए। सीबीआई इसकी जांच में बिल्कुल नरमी न बरते। दोषियों को तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए। सतीश मेहता, जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक
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नेकपुर शुगर मिल की जमीन ही अरबों की कीमत की थी। फिर उसे मात्र 14.11 करोड़ में बेचने की क्या जरूरत पड़ गई? शुगर मिल बिक्री में बड़े पैमाने पर खेल किया गया। इसकी गहन जांच कराकर दोषियों को जेल भेजने की जरूरत है। चीनी मिल बिकने से न केवल किसान बल्कि उसमें काम करने वाले श्रमिकों का भी बड़ा नुकसान हो गया। अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान
गन्ने का रकवा हर साल बढ़ रहा है। ऐसे में तत्कालीन बसपा सरकार ने मिल बेचकर दिखाया कि उसकी किसानों के प्रति कोई हमदर्दी नहीं। दूर मिल में गन्ना ले जाने से किसान का का भाड़ा बढ़ गया। तपती दोपहर में किसान का गन्ना खेत में खड़ा है। किसान को गन्ने की दिलाई दो से तीन गुनी देनी पड़ती है। किसान की मजबूरी का फायदा दलाल बिचौलिए उठा रहे हैं। दोषियों को सजा जरूर मिले। डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान