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Bareilly News: पहली बार में 85 फीसदी लोग ड्राइविंग टेस्ट में हो रहे फेल
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बरेली। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 85 फीसदी आवेदक पहली बार में ड्राइविंग टेस्ट पास नहीं कर पा रहे। अतिरिक्त फीस देकर दूसरी बार पहुंचने वाले 60 फीसदी लोग भी इसमें नाकाम साबित हो रहे हैं। ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक ने आवेदकों की परेशानी बढ़ा दी है। टेस्ट देने के लिए रोज औसतन 200 लोग परसाखेड़ा पहुंच रहे हैं। इनमें से कुछ ही पास हो पाते हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। परसाखेड़ा स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर लगे सेंसर टेस्ट के दौरान आवेदक की हर छोटी-बड़ी गलती को पकड़ लेते हैं। दूसरी बार टेस्ट देने के लिए उनको दोबारा फीस भरनी पड़ती है, साथ ही 50 रुपये अतिरक्त भी जमा करना पड़ता है। लगातार तीन बार फेल होने पर लाइसेंस के लिए नए सिरे से आवेदन करना होता है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों मुताबिक 40 फीसदी लोग तीसरी बार भी टेस्ट में पास नहीं हो पाते। वे मौका गंवाने के बाद नए सिरे से आवेदन कर रहे हैं। इससे जहां आवेदक परेशान हो रहे हैं, वहीं परिवहन विभाग का राजस्व बढ़ रहा है।
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ड्राइविंग टेस्ट फीस
- 350 रुपये दो और चार पहिया दोनों तरह के वाहनों के लिए।
- 200 किसी एक प्रकार के वाहन के लिए।
- 50 रुपये अतिरिक्त दोबारा टेस्ट के लिए।
स्थायी लाइसेंस फीस
- 700 रुपये चार पहिया या दो पहिया वाहन के लिए।
- 1,000 रुपये चार पहिया और दो पहिया दोनों वाहनों के लिए।
वर्जन
डीएल के लिए टेस्ट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड है। ऑटोमेटेड टेस्टिंग में 85 फीसदी लोग पहली बार में टेस्ट पास नहीं कर पा रहे। दूसरी बार में भी 60 फीसदी लोग फेल हो रहे हैं। तीसरी बार फेल होने पर आवेदक को नए सिरे से आवेदन करना होता है। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रशासन
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टेस्टिंग ट्रैक खराब, 95 आवेदक लौटे
टेस्टिंग ट्रैक खराब होने के कारण मंगलवार को ड्राइविंग टेस्ट नहीं हो सके। सोमवार को भी ट्रैक खराब होने के कारण लोगों को मायूस लौटना पड़ा था। सोमवार को 45 और मंगलवार को 50 लोगों को ड्राइविंग टेस्ट के लिए बुलाया गया था। ट्रैक खराब होने के कारण इनको बिना टेस्ट के ही वापस लौटना पड़ा।
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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। परसाखेड़ा स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक पर लगे सेंसर टेस्ट के दौरान आवेदक की हर छोटी-बड़ी गलती को पकड़ लेते हैं। दूसरी बार टेस्ट देने के लिए उनको दोबारा फीस भरनी पड़ती है, साथ ही 50 रुपये अतिरक्त भी जमा करना पड़ता है। लगातार तीन बार फेल होने पर लाइसेंस के लिए नए सिरे से आवेदन करना होता है।
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परिवहन विभाग के आंकड़ों मुताबिक 40 फीसदी लोग तीसरी बार भी टेस्ट में पास नहीं हो पाते। वे मौका गंवाने के बाद नए सिरे से आवेदन कर रहे हैं। इससे जहां आवेदक परेशान हो रहे हैं, वहीं परिवहन विभाग का राजस्व बढ़ रहा है।
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ड्राइविंग टेस्ट फीस
- 350 रुपये दो और चार पहिया दोनों तरह के वाहनों के लिए।
- 200 किसी एक प्रकार के वाहन के लिए।
- 50 रुपये अतिरिक्त दोबारा टेस्ट के लिए।
स्थायी लाइसेंस फीस
- 700 रुपये चार पहिया या दो पहिया वाहन के लिए।
- 1,000 रुपये चार पहिया और दो पहिया दोनों वाहनों के लिए।
वर्जन
डीएल के लिए टेस्ट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड है। ऑटोमेटेड टेस्टिंग में 85 फीसदी लोग पहली बार में टेस्ट पास नहीं कर पा रहे। दूसरी बार में भी 60 फीसदी लोग फेल हो रहे हैं। तीसरी बार फेल होने पर आवेदक को नए सिरे से आवेदन करना होता है। - मनोज कुमार, एआरटीओ प्रशासन
टेस्टिंग ट्रैक खराब, 95 आवेदक लौटे
टेस्टिंग ट्रैक खराब होने के कारण मंगलवार को ड्राइविंग टेस्ट नहीं हो सके। सोमवार को भी ट्रैक खराब होने के कारण लोगों को मायूस लौटना पड़ा था। सोमवार को 45 और मंगलवार को 50 लोगों को ड्राइविंग टेस्ट के लिए बुलाया गया था। ट्रैक खराब होने के कारण इनको बिना टेस्ट के ही वापस लौटना पड़ा।