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वक्री गुरु का वृश्चिक में प्रवेश, प्राकृतिक आपदा के संकेत
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बरेली। बैसाख कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि सोमवार की देर रात वक्री गुरु बृहस्पति का वृश्चिक राशि में प्रवेश हो गया। करीब साढ़े तीन माह तक गुरु वृश्चिक राशि में गोचर को करेंगे। ज्योतिषाचार्य इस गोचर को अशुभ मान रहे हैं। उनके मुताबिक इस दौरान हुए मांगलिक अनुष्ठान का शुभ फलदायी नहीं होगा। कहीं, अतिवृष्टि, भूकंप तो कहीं सूखा, अग्निकांड आदि प्राकृतिक आपदाएं और आपराधिक घटनाएं होने के संकेत हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के अनुसार 29 मार्च को देव गुरु का धनु राशि में प्रवेश हुआ था। फिर धनु राशि में 10 अप्रैल को वक्री हुए थे और अब 22 अप्रैल की रात 1:02 बजे वृश्चिक में प्रवेश करेंगे। करीब साढ़े तीन माह यानी 11 अगस्त तक वृश्चिक राशि में रहेंगे। इसके बाद वृश्चिक राशि में ही मार्गी होकर पांच नवंबर की सुबह 5:16 बजे फिर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु का धनु राशि में गोचर नव संवत्सर 2020 तक रहेगा। 30 अप्रैल से 15 सितंबर तक नव संवत्सर के राजा शनि भी धनु राशि में वक्री रहेंगे यानी 30 अप्रैल के बाद अशुभ प्रभाव दिखाई देने लगेंगे, ऐसे आसार जताए जा रहे हैं।
हिंसक घटनाओं के मिल रहे संकेत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि वक्री और देव गुरु बृहस्पति समेत अन्य कोई सौम्य ग्रह अतिचार गति को प्राप्त हो तो यह संयोग शुभ नहीं होता। इस दौरान मूलभूत सुविधाओं का अभाव, महंगाई बढ़ने, आपसी विवाद, महामारी फैलने, राज्य में सत्ता परिवर्तन समेत हिंसक घटनाएं घटित होने के आसार रहते हैं। हालांकि, वृश्चिक राशि में रहने के दौरान गुरु की मित्र राशि मीन पर स्वग्रही और कर्क राशि पर उच्च दृष्टि होगी। इसलिए इन राशि के जातकों को विशेष लाभ होंगे।
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राशियों पर प्रभाव
मेष - आय कम खर्च अधिक, उलझने बढ़ेंगी।
वृष - आपराधिक तत्वों से खतरे के संकेत।
मिथुन - रोग, शत्रु भय, भाई से बैर संभव।
कर्क - वाहन, जमीन का योग, धर्म में रुचि बढ़ेगी।
सिंह - भागदौड़, आर्थिक तंगी से तनाव रहेगा।
कन्या - खर्च बढ़ेगा। शारीरिक कष्ट के संकेत हैं।
तुला - धन लाभ, भाग्य वृद्धि, यात्रा का सुख।
वृश्चिक - सामाजिक प्रतिष्ठा, विरोधी परास्त होंगे।
धनु - वाणी पर संयम रखें। मित्रों से बैर संभव।
मकर - धन लाभ, प्रॉपर्टी विवाद में जीत होगी।
कुंभ - मित्रों से धोखा मिलेगा। तनावग्रस्त रहेंगे।
मीन - बिगड़े काम में सुधारेंगे। वाहन सुख संभव।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के अनुसार 29 मार्च को देव गुरु का धनु राशि में प्रवेश हुआ था। फिर धनु राशि में 10 अप्रैल को वक्री हुए थे और अब 22 अप्रैल की रात 1:02 बजे वृश्चिक में प्रवेश करेंगे। करीब साढ़े तीन माह यानी 11 अगस्त तक वृश्चिक राशि में रहेंगे। इसके बाद वृश्चिक राशि में ही मार्गी होकर पांच नवंबर की सुबह 5:16 बजे फिर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु का धनु राशि में गोचर नव संवत्सर 2020 तक रहेगा। 30 अप्रैल से 15 सितंबर तक नव संवत्सर के राजा शनि भी धनु राशि में वक्री रहेंगे यानी 30 अप्रैल के बाद अशुभ प्रभाव दिखाई देने लगेंगे, ऐसे आसार जताए जा रहे हैं।
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हिंसक घटनाओं के मिल रहे संकेत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि वक्री और देव गुरु बृहस्पति समेत अन्य कोई सौम्य ग्रह अतिचार गति को प्राप्त हो तो यह संयोग शुभ नहीं होता। इस दौरान मूलभूत सुविधाओं का अभाव, महंगाई बढ़ने, आपसी विवाद, महामारी फैलने, राज्य में सत्ता परिवर्तन समेत हिंसक घटनाएं घटित होने के आसार रहते हैं। हालांकि, वृश्चिक राशि में रहने के दौरान गुरु की मित्र राशि मीन पर स्वग्रही और कर्क राशि पर उच्च दृष्टि होगी। इसलिए इन राशि के जातकों को विशेष लाभ होंगे।
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राशियों पर प्रभाव
मेष - आय कम खर्च अधिक, उलझने बढ़ेंगी।
वृष - आपराधिक तत्वों से खतरे के संकेत।
मिथुन - रोग, शत्रु भय, भाई से बैर संभव।
कर्क - वाहन, जमीन का योग, धर्म में रुचि बढ़ेगी।
सिंह - भागदौड़, आर्थिक तंगी से तनाव रहेगा।
कन्या - खर्च बढ़ेगा। शारीरिक कष्ट के संकेत हैं।
तुला - धन लाभ, भाग्य वृद्धि, यात्रा का सुख।
वृश्चिक - सामाजिक प्रतिष्ठा, विरोधी परास्त होंगे।
धनु - वाणी पर संयम रखें। मित्रों से बैर संभव।
मकर - धन लाभ, प्रॉपर्टी विवाद में जीत होगी।
कुंभ - मित्रों से धोखा मिलेगा। तनावग्रस्त रहेंगे।
मीन - बिगड़े काम में सुधारेंगे। वाहन सुख संभव।