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मंत्री जी! कुछ तो गड़बड़ है तभी फट गए बच्चों के जूते
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बरेली। नए सत्र की तैयारियां शुरू होते ही स्टिंग में बेसिक शिक्षा विभाग में जूते-मोजे, स्कूल बैग, ट्रांसफर पोस्टिंग आदि के लिए लेनदेन का भंडाफोड़ हो गया। कमीशनबाजी के इस खेल के चलते ही तीन महीने पहले बच्चों को दिए जूते अभी से ही फटने लगे हैं जबकि ठंड के अभी कई महीने बाकी हैं।
बुधवार को लखनऊ में तीन मंत्री ओमप्रकाश राजभर, अर्चना पांडेय और संदीप सिंह के निजी सचिव एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में फंस गए। यह लोग जूते-मोजे एवं स्कूल बैग की सप्लाई के ठेके एवं कमीशनबाजी और ट्रांसफर-पोस्टिंग आदि को लेकर सौदेबाजी कर रहे थे। कमीशनबाजी के इस खेल में गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में आ गई। इसके चलते बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने प्राथमिक विद्यालय कालीबाड़ी प्रथम, द्वितीय और आजमनगर द्वितीय में जायजा लिया। इस दौरान कई बच्चों के जूते फटे मिले। बच्चों ने बताया कि जूते सितंबर-अक्टूबर में जूते मिले थे लेकिन फट गए। ऐसे ही कई बच्चों के स्कूल बैग भी कुछ ही समय बाद फट गए।
लखनऊ से सप्लाई, बरेली में जुगाड़
जूते-मोजे और स्कूल बैग का ठेका राज्य स्तर पर होता है इसलिए सप्लाई भी सीधे लखनऊ से होती है। मगर फिर भी कुछ लोग सेटिंग के लिए बीएसए कार्यालय में आए दिन यहां चक्कर लगाते देखे जाते हैं। हालांकि विभागीय लोगों का कहना है कि वे भ्रम के चलते यहां आ जाते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि वे स्थानीय स्तर से ऊपर का कनेक्शन तलाश रहे होते हैं।
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स्वेटर वितरण पर भी मचा था बड़ा बवाल
पिछले दिनों स्वेटर वितरण को लेकर भी बरेली में काफी बवाल मचा था। कमीशनखोरी के चलते सीडीओ ने स्वेटर वितरण का काम शिक्षकों से छीनकर एनजीओ एवं स्वयं सहायता समूहों को दे दिया। इसके चलते लंबे समय तक तनातनी मची रही और स्वेटर वितरण का काम काफी देरी से पूरा हो सका।
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बुधवार को लखनऊ में तीन मंत्री ओमप्रकाश राजभर, अर्चना पांडेय और संदीप सिंह के निजी सचिव एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में फंस गए। यह लोग जूते-मोजे एवं स्कूल बैग की सप्लाई के ठेके एवं कमीशनबाजी और ट्रांसफर-पोस्टिंग आदि को लेकर सौदेबाजी कर रहे थे। कमीशनबाजी के इस खेल में गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में आ गई। इसके चलते बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने प्राथमिक विद्यालय कालीबाड़ी प्रथम, द्वितीय और आजमनगर द्वितीय में जायजा लिया। इस दौरान कई बच्चों के जूते फटे मिले। बच्चों ने बताया कि जूते सितंबर-अक्टूबर में जूते मिले थे लेकिन फट गए। ऐसे ही कई बच्चों के स्कूल बैग भी कुछ ही समय बाद फट गए।
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लखनऊ से सप्लाई, बरेली में जुगाड़
जूते-मोजे और स्कूल बैग का ठेका राज्य स्तर पर होता है इसलिए सप्लाई भी सीधे लखनऊ से होती है। मगर फिर भी कुछ लोग सेटिंग के लिए बीएसए कार्यालय में आए दिन यहां चक्कर लगाते देखे जाते हैं। हालांकि विभागीय लोगों का कहना है कि वे भ्रम के चलते यहां आ जाते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि वे स्थानीय स्तर से ऊपर का कनेक्शन तलाश रहे होते हैं।
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स्वेटर वितरण पर भी मचा था बड़ा बवाल
पिछले दिनों स्वेटर वितरण को लेकर भी बरेली में काफी बवाल मचा था। कमीशनखोरी के चलते सीडीओ ने स्वेटर वितरण का काम शिक्षकों से छीनकर एनजीओ एवं स्वयं सहायता समूहों को दे दिया। इसके चलते लंबे समय तक तनातनी मची रही और स्वेटर वितरण का काम काफी देरी से पूरा हो सका।