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पितरों को शांत कर कष्टों से मुक्ति प्रदान करेगी देव पितृ अमावस्या
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बरेली। अबकी बार पांच अप्रैल को चैत्र माह में पड़ रही देव पितृ अमावस्या पितरों का श्राद्ध और देवताओं के पूजन के लिए विशेष है। जिन लोगों की जन्मपत्री में पित्र दोष, देव दोष अथवा काल सर्प दोष है, वह इन दोषों की शांति के लिए व्रत रखकर विधि विधान से दोष शांति उपाय करा सकते हैं। साथ ही, तांत्रिक क्रियाएं सिद्ध करने वालों के लिए भी यह अमावस्या बेहद शुभ मानी जा रही है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि एकसाल में 12 अमावस्या होती है। जिनके विभिन्न नाम और पूजन विधि होती है। अमावस्या पर दोषों की शांति कराने से विकृतियों का नाश होता है और इस दिन किया गया व्रत मनोकामना पूर्ण करता है। बताया कि ज्योतिष में चन्द्र को मन का देवता माना गया है। अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता। इसलिए कमजोर ह्रदय वाले लोगों पर इस दिन का खासा प्रभाव होता है। नकारात्मक शक्तियां तेजी से हावी होती हैं। उन्होंने बताया कि कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्तियों को इस दिन हवन या शिव पूजन कराना लाभदायक होगा। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। इसलिए अमावस्या की रात में विशेष सावधानी रखने को कहा गया है।
अमावस्या पर क्या करें
उदयांचल सूर्य को जल अर्पित करें। गाय को भोजन कराएं। पितरों के निमित्त खीर बनाएं। नारियल पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाकर हनुमान मंदिर में अर्पित करें। बताया कि अमावस्या पर चन्द्रमा का क्षय और उदय नहीं होता। शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव माने गए हैं। अमावस्या सूर्य और चन्द्र के मिलन का काल है। इस दिन दोनों एक ही राशि में रहते हैं।
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किए जाते हैं कई टोटके
उन्होंने बताया कि अमावस्या की हर रात कुएं में एक चम्मच दूध डालने से सुख/शांति आती है। दूसरा, प्रत्येक माह के प्रारंभ में लाल धागा गले में बांधकर अमावस्या की रात सुनसान जगह रखने से छाया का असर नहीं होता। अमावस्या पर मछलियों को आटे की गोली खिलाने से कष्ट कम होते हैं। वहीं, अन्य टोटेके भी अमावस्या पर किए जाते हैं।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि एकसाल में 12 अमावस्या होती है। जिनके विभिन्न नाम और पूजन विधि होती है। अमावस्या पर दोषों की शांति कराने से विकृतियों का नाश होता है और इस दिन किया गया व्रत मनोकामना पूर्ण करता है। बताया कि ज्योतिष में चन्द्र को मन का देवता माना गया है। अमावस्या के दिन चन्द्रमा दिखाई नहीं देता। इसलिए कमजोर ह्रदय वाले लोगों पर इस दिन का खासा प्रभाव होता है। नकारात्मक शक्तियां तेजी से हावी होती हैं। उन्होंने बताया कि कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्तियों को इस दिन हवन या शिव पूजन कराना लाभदायक होगा। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। इसलिए अमावस्या की रात में विशेष सावधानी रखने को कहा गया है।
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अमावस्या पर क्या करें
उदयांचल सूर्य को जल अर्पित करें। गाय को भोजन कराएं। पितरों के निमित्त खीर बनाएं। नारियल पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाकर हनुमान मंदिर में अर्पित करें। बताया कि अमावस्या पर चन्द्रमा का क्षय और उदय नहीं होता। शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव माने गए हैं। अमावस्या सूर्य और चन्द्र के मिलन का काल है। इस दिन दोनों एक ही राशि में रहते हैं।
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किए जाते हैं कई टोटके
उन्होंने बताया कि अमावस्या की हर रात कुएं में एक चम्मच दूध डालने से सुख/शांति आती है। दूसरा, प्रत्येक माह के प्रारंभ में लाल धागा गले में बांधकर अमावस्या की रात सुनसान जगह रखने से छाया का असर नहीं होता। अमावस्या पर मछलियों को आटे की गोली खिलाने से कष्ट कम होते हैं। वहीं, अन्य टोटेके भी अमावस्या पर किए जाते हैं।