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बरेली कॉलेज विवादः रिसीवर का फैसला कमिश्नर की नाइंसाफी...
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बरेली। मैनेजमेंट कमेटी पर उठे विवाद और रिसीवर बैठाने की तैयारियों के बीच बरेली कॉलेज का बोर्ड भी बचाव और सख्ती के मूड में है। बोर्ड की ओर से कमिश्नर रणवीर प्रसाद को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा गया है। दूसरी ओर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं बोर्ड के सदस्य डॉ. दिनेश जौहरी ने रिसीवर बैठाने के फैसले को गलत और नाइंसाफी बताया है। कहा, अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद कमिश्नर से मिलेंगे।
इन दिनों बरेली कॉलेज प्रबंधन, प्रशासन और विश्वविद्यालय के बीच बोर्ड एवं मैनेजमेंट कमेटी को लेकर तनातनी है। एमजेपी रुहेलखंड विश्व विद्यालय के पर्यवेक्षक बोर्ड के 14 सदस्यों को अवैध घोषित कर चुके हैं। उन्होंने पहले हुए चुनाव को भी अवैध करार दिया है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन ने विवि के निर्देशों को मानने से इंकार कर दिया है। इस जुबानी जंग के बीच कमिश्नर ने बरेली कॉलेज में फुल टाइम प्रिंसिपल लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्होंने शासन को पत्र लिखा है। वहीं, कमिश्नर के रुख को लेकर बोर्ड के कुछ सदस्यों में नाराजगी है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दिनेश जौहरी ने इसे कमिश्नर की नाइंसाफी बताया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए लेकिन कोई आदमी सामने नहीं आया। बोर्ड ने कमिश्नर को पत्र लिखा है, कम से कम वह बात तो सुनें।
विवि भी रिसीवर बैठाने की जुगत में
विवि भी बरेली कॉलेज में रिसीवर बैठाने की तैयारी लगभग पूरी कर चुका है। शासन को भेजने के लिए रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। चर्चा है कि विवि के पर्यवेक्षक प्रोफेसर एके जेटली शुक्रवार को यह रिपोर्ट शासन को भेज देंगे।
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सपा नेता और कारोबारी के चक्कर में आई ये नौबत
बोर्ड के सदस्य एमसी गुप्ता का कहना है कि सत्तापक्ष के लोगों को जगह बनाने के लिए सपा से जुड़े दो सदस्यों को लेकर यह सब हो रहा है। शासन से सदस्यों का अप्रूवल क्यों नहीं आया, मैं नहीं बता सकता। पिछले साल भी प्रशासन ने आपत्ति जताई थी, मगर फिर भी चुनाव हुए। जिन नियमों के आधार पर चुनाव हुए, अब उन्हीं को अवैध बताया जा रहा है।
सत्ता पक्ष को काबिज करने के लिए हिट एंड रन
पूर्व मेयर एवं बोर्ड सदस्य सुप्रिया ऐरन का कहना है कि प्रशासन वैध तरीके से सब अवैध कर रहा है। अनैतिक तरीके से कार्रवाई हो रही है, कुछ भी लिखित नहीं दिया है कि कहीं कोर्ट न चले जाएं। हिट एंड रन जैसी स्थिति है। सत्ता पक्ष के लोगों को कमेटी में शामिल कराने के लिए यह सब कवायद हो रही है। सिस्टम गलत तरीके से काम कर रहा है।
बोर्ड के सदस्यों में बातचीत चल रही है। सभी सदस्यों की ओर से कमिश्नर को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा गया है ताकि उनके समक्ष अपनी बात रखी जा सके। - डॉ. रजनी अग्रवाल, सचिव, बरेली कॉलेज बोर्ड
कमिश्नर से समय मिलने का इंतजार है। उनके साथ मीटिंग करके ही आगे ही चीजें तय हो सकेंगी। बोर्ड के सदस्य भी आपस में लगातार संपर्क में हैं। - देवमूर्ति, सचिव बरेली कॉलेज प्रबंध समिति
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इन दिनों बरेली कॉलेज प्रबंधन, प्रशासन और विश्वविद्यालय के बीच बोर्ड एवं मैनेजमेंट कमेटी को लेकर तनातनी है। एमजेपी रुहेलखंड विश्व विद्यालय के पर्यवेक्षक बोर्ड के 14 सदस्यों को अवैध घोषित कर चुके हैं। उन्होंने पहले हुए चुनाव को भी अवैध करार दिया है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन ने विवि के निर्देशों को मानने से इंकार कर दिया है। इस जुबानी जंग के बीच कमिश्नर ने बरेली कॉलेज में फुल टाइम प्रिंसिपल लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्होंने शासन को पत्र लिखा है। वहीं, कमिश्नर के रुख को लेकर बोर्ड के कुछ सदस्यों में नाराजगी है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दिनेश जौहरी ने इसे कमिश्नर की नाइंसाफी बताया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए लेकिन कोई आदमी सामने नहीं आया। बोर्ड ने कमिश्नर को पत्र लिखा है, कम से कम वह बात तो सुनें।
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विवि भी रिसीवर बैठाने की जुगत में
विवि भी बरेली कॉलेज में रिसीवर बैठाने की तैयारी लगभग पूरी कर चुका है। शासन को भेजने के लिए रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। चर्चा है कि विवि के पर्यवेक्षक प्रोफेसर एके जेटली शुक्रवार को यह रिपोर्ट शासन को भेज देंगे।
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सपा नेता और कारोबारी के चक्कर में आई ये नौबत
बोर्ड के सदस्य एमसी गुप्ता का कहना है कि सत्तापक्ष के लोगों को जगह बनाने के लिए सपा से जुड़े दो सदस्यों को लेकर यह सब हो रहा है। शासन से सदस्यों का अप्रूवल क्यों नहीं आया, मैं नहीं बता सकता। पिछले साल भी प्रशासन ने आपत्ति जताई थी, मगर फिर भी चुनाव हुए। जिन नियमों के आधार पर चुनाव हुए, अब उन्हीं को अवैध बताया जा रहा है।
सत्ता पक्ष को काबिज करने के लिए हिट एंड रन
पूर्व मेयर एवं बोर्ड सदस्य सुप्रिया ऐरन का कहना है कि प्रशासन वैध तरीके से सब अवैध कर रहा है। अनैतिक तरीके से कार्रवाई हो रही है, कुछ भी लिखित नहीं दिया है कि कहीं कोर्ट न चले जाएं। हिट एंड रन जैसी स्थिति है। सत्ता पक्ष के लोगों को कमेटी में शामिल कराने के लिए यह सब कवायद हो रही है। सिस्टम गलत तरीके से काम कर रहा है।
बोर्ड के सदस्यों में बातचीत चल रही है। सभी सदस्यों की ओर से कमिश्नर को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा गया है ताकि उनके समक्ष अपनी बात रखी जा सके। - डॉ. रजनी अग्रवाल, सचिव, बरेली कॉलेज बोर्ड
कमिश्नर से समय मिलने का इंतजार है। उनके साथ मीटिंग करके ही आगे ही चीजें तय हो सकेंगी। बोर्ड के सदस्य भी आपस में लगातार संपर्क में हैं। - देवमूर्ति, सचिव बरेली कॉलेज प्रबंध समिति