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350 साल बाद रंग बदल रहा शहामतगंज चौराहा
बरेली, ब्यूरो
Updated Mon, 24 Oct 2016 01:18 AM IST
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करीब साढ़े तीन सौ साल पहले आंवला से जिला मुख्यालय बरेली में शिफ्ट होने के बाद शहामतगंज चौराहा बना था। पहले गल्लामंडी की ओर वाला चौराहा शहामतगंज के नाम से जाना जाता था। जो कि दिल्ली से लखनऊ के लिए सीधा रास्ता था। इस रोड पर ट्रैफिक बढ़ा और बाजार बना तो सकरा हो हुआ तो करीब 200 साल पहले इस रोड को कालीबाड़ी वाले रास्ते पर शिफट कर दिया। उसी समय एक और नया चौराहा बना जिसे शहामतगंज के नाम से पहचान मिली। अब इन दोनों ही चौराहों के ऊपर फ्लाई ओवर बनने जा रहा है।
करीब 400 साल पहले अफगानिस्तान से मुगलों के साथ नवाब शहामत अली खां बरेली आए थे। वह पुराने शहर के सैलानी इलाके में बस गए। जो इलाका आज बारादरी के नाम से जाना जाता है, यह भी उन्हीं की बनवाई हुई है। जहां आज भी उनकी जर्जर कोठी वहां मौजूद है।
कोट फोटो के साथ
‘हमारे पर दादा नवाब शहामत अली के नाम से इस चौराहे का नाम शहामतगंज पड़ा था। यहां के आसपास की आधा किलोमीटर तक की प्रापर्र्टी उन दिनों पर दाता की संपत्ति रही थी।’ इंजीनियर नवाब अयूब हसन खां
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बरेली कालेज से शहामतगंज का रास्ता बंद
- सोमवार सुबह 11 बजे से शुरू होगा भूमिपूजन
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
शहामतगंज फ्लाई ओवर का काम सोमवार से शुरू हो जाएगा। रविवार शाम चार बजे के बाद बरेली कालेज से शहामतगंज आने वाले वाहनों को रोक दिया गया। इस मार्ग पर भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए टेंट लगाया जा रहा है।
मेयर डॉ. आईएस तोमर और कमिश्नर प्रमांशु कुमार सुबह 11 बजे भूमि पूजन में शामिल होंगे। इस दौरान सिर्फ शहामतगंज चौराहा ही खुला रहेगा। शहामतगंज से विकास भवन और विकास भवन से शहामतगंज आने वालों पर रोक रहेगी। यहां का यातायात डायवर्ट किया गया है। 30.30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस फ्लाईओवर के लिए अभी शासन की ओर से 10 करोड़ रुपये जारी किये गए हैं।
इधर से आएंगे और जाएंगे वाहन
रास्ता आनंद आश्रम से लेकर शहामतगंज चौराहे तक बंद हो जाएगा। शाहमतगंज से कोई वाहन गांधी उद्यान की तरफ नहीं जा सकेगा। इधर के वाहन कालीबाड़ी, बरेली कॉलेज पश्चिमी गेट और चौकी चौराहा होकर गांधी उद्यान जा सकते हैं। इसी तरह गांधी उद्यान के सामने होकर कोई भी वाहन शाहमतगंज चौराहा नहीं जाएगा। इधर के वाहन बियावानी कोठी, खुर्रम गौंटिया और मालियों की पुलिया चौराहा होकर शाहमतगंज जाएंगे। गांधी उद्यान से विकास भवन तक आ सकते हैं।
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करीब 400 साल पहले अफगानिस्तान से मुगलों के साथ नवाब शहामत अली खां बरेली आए थे। वह पुराने शहर के सैलानी इलाके में बस गए। जो इलाका आज बारादरी के नाम से जाना जाता है, यह भी उन्हीं की बनवाई हुई है। जहां आज भी उनकी जर्जर कोठी वहां मौजूद है।
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‘हमारे पर दादा नवाब शहामत अली के नाम से इस चौराहे का नाम शहामतगंज पड़ा था। यहां के आसपास की आधा किलोमीटर तक की प्रापर्र्टी उन दिनों पर दाता की संपत्ति रही थी।’ इंजीनियर नवाब अयूब हसन खां
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बरेली कालेज से शहामतगंज का रास्ता बंद
- सोमवार सुबह 11 बजे से शुरू होगा भूमिपूजन
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
शहामतगंज फ्लाई ओवर का काम सोमवार से शुरू हो जाएगा। रविवार शाम चार बजे के बाद बरेली कालेज से शहामतगंज आने वाले वाहनों को रोक दिया गया। इस मार्ग पर भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए टेंट लगाया जा रहा है।
मेयर डॉ. आईएस तोमर और कमिश्नर प्रमांशु कुमार सुबह 11 बजे भूमि पूजन में शामिल होंगे। इस दौरान सिर्फ शहामतगंज चौराहा ही खुला रहेगा। शहामतगंज से विकास भवन और विकास भवन से शहामतगंज आने वालों पर रोक रहेगी। यहां का यातायात डायवर्ट किया गया है। 30.30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस फ्लाईओवर के लिए अभी शासन की ओर से 10 करोड़ रुपये जारी किये गए हैं।
इधर से आएंगे और जाएंगे वाहन
रास्ता आनंद आश्रम से लेकर शहामतगंज चौराहे तक बंद हो जाएगा। शाहमतगंज से कोई वाहन गांधी उद्यान की तरफ नहीं जा सकेगा। इधर के वाहन कालीबाड़ी, बरेली कॉलेज पश्चिमी गेट और चौकी चौराहा होकर गांधी उद्यान जा सकते हैं। इसी तरह गांधी उद्यान के सामने होकर कोई भी वाहन शाहमतगंज चौराहा नहीं जाएगा। इधर के वाहन बियावानी कोठी, खुर्रम गौंटिया और मालियों की पुलिया चौराहा होकर शाहमतगंज जाएंगे। गांधी उद्यान से विकास भवन तक आ सकते हैं।