{"_id":"5c65c9e0bdec227395217e9b","slug":"31550174688-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेयर और पूर्व मेयर फिर आमने-सामने, अब मेयर का हमला.. डॉ. तोमर के वक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेयर और पूर्व मेयर फिर आमने-सामने, अब मेयर का हमला.. डॉ. तोमर के वक्त
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर और मेयर उमेश गौतम एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। डॉ. तोमर के करीबी मुनीश शर्मा की ओर से हाईकोर्ट में अपने खिलाफ बर्खास्तगी की याचिका दायर करने के बाद मेयर उमेश गौतम ने तगड़ा हमला बोलते हुए उन दोनों को भ्रष्टाचार का नायक करार दिया है। मेयर ने कहा कि मुनीश ने डॉ. तोमर के मेयर रहते करोड़ों रुपये के ठेकों में दखलंदाजी की। वह पूरे मामले की जांच कराएंगे और शासन को अवगत कराकर रिपोर्ट भी दर्ज कराएंगे।
पिछले दिनों मुनीश शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके मेयर उमेश गौतम को बर्खास्त करने की मांग की। आरोप लगाया कि उन्होंने नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। इसके बाद मेयर उमेश गौतम ने जवाबी हमला बोलते हुए आदित्य इंजीकॉन नाम की फर्म के करीब 70 लाख रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी थी। निगम के रिकॉर्ड में इस फर्म के केयरटेकर के तौर पर मुनीश का नाम दर्ज है। आईवीआरआई रोड के चौड़ीकरण का 70 लाख रुपये का काम पूरा न करने पर भी इस फर्म को नोटिस देकर ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई। हालांकि मुनीश इस फर्म से कोई लेनादेना न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ चुके हैं। इसके साथ नगर निगम के भवन का अवैध रूप से निर्माण कराने की कमिश्नर से शिकायत कर दी। मुनीश की शिकायत का जवाब देते हुए गुरुवार को मेयर उमेश गौतम ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए। इनमें मुनीश शर्मा की ओर से दिए गए वो जवाब भी थे जो उन्होंने आदित्य इंजीकॉन को दिए गए नोटिस पर खुद दिए थे।
मुनीश के खिलाफ हुई जांच की रिपोर्ट भी दबा दी
मेयर ने बताया कि वर्ष 2015 में तत्कालीन उपसभापति ऊषा अरोरा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से मुनीश शर्मा की शिकायत की थी और अपने रसूख के बल पर नगर निगम में करोड़ों रुपये के काम करने का आरोप लगाया था। इसकी जांच तत्कालीन नगर आयुक्त शीलधर यादव को दी गई लेकिन मुनीश शर्मा ने उन्हें गुमराह कर दिया। शपथ पत्र देकर कहा कि जल आकाश या आदित्य इंजीकॉन से उनका कोई लेनादेना नहीं है जबकि निगम की फाइलों में आदित्य इंजीकॉन के अधिकृत व्यक्ति के रूप में मुनीश का ही नाम दर्ज है। फिर भी यह जांच रिपोर्ट दबा दी गई। मेयर ने उमेश गौतम ने कहा कि जो लोग ईमानदारी की दुहाई देते थे, अब उनके घपलों के खुलासे हो रहे हैं। भाजपा सरकार में मंत्रियों के तीन निजी सचिव जेल जा रहे हैं और यहां मेयर के निजी सचिव करोड़ों के ठेके दिलाने के काम करते रहे। यह एक बड़ा खुलासा हुआ है। वह पूरे मामले की जांच कराएंगे और शासन को भी तथ्यों से अवगत कराकर रिपोर्ट लिखाएंगे।
विज्ञापन
जल आकाश की फाइल तो मेयर हाउस मंगाकर गायब कराई
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2014 में जब डॉ. तोमर मेयर थे तब जल आकाश के कब्जे की फाइल मेयर हाउस पर मंगवाई गई थी लेकिन वहां से फाइल लौटाई नहीं गई। इसके बाद फाइल के कुछ दस्तावेज गायब करके उसे लौटाने की कोशिश की गई। यह मामला पकड़ में आया तो तत्कालीन अधिकारियों ने मामले की जांच की और यह आरोप सही भी पाए गए।
मेयर साहब मेरे बड़े हैं। उन्हें व्यक्तिगत हमलों से बचना चाहिए। कारोबार करना कोई अपराध नहीं है। भाजपा नेता तो शराब का कारोबार भी कर रहे हैं। पॉवर ऑफ अटार्नी निरस्त होने के बाद मैंने कोई काम नहीं किया है। उन्हें जो भी कार्रवाई करनी है, मेरे खिलाफ करें। दूसरे को प्रताड़ित न करें। जो भी वह करेंगे, वह सब कोर्ट में बताऊंगा। - मुनीश शर्मा
मेयर ईमानदार हैं तो ग्रीन बेल्ट की जमीन छोड़ें : डॉ. तोमर
पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के अनुसार जो भी दोषी हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। जब मुनीश शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की तब यह सब याद क्यों आया। अगर वह गलत थे तो पहले ही कार्रवाई की जाती। रही मेरी ईमानदारी की बात तो वह सबूत लाकर दें। उनके खिलाफ तो 5998 वर्ग मीटर जमीन दबाने के सबूत दिए गए हैं। उस जमीन से वह कब्जा क्यों नहीं छोड़ते। जनता को क्यों नहीं बताते कि वर्ष 2013 से मिशन अस्पताल का कितना टैक्स जमा किया।
विज्ञापन
पिछले दिनों मुनीश शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके मेयर उमेश गौतम को बर्खास्त करने की मांग की। आरोप लगाया कि उन्होंने नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। इसके बाद मेयर उमेश गौतम ने जवाबी हमला बोलते हुए आदित्य इंजीकॉन नाम की फर्म के करीब 70 लाख रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी थी। निगम के रिकॉर्ड में इस फर्म के केयरटेकर के तौर पर मुनीश का नाम दर्ज है। आईवीआरआई रोड के चौड़ीकरण का 70 लाख रुपये का काम पूरा न करने पर भी इस फर्म को नोटिस देकर ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई। हालांकि मुनीश इस फर्म से कोई लेनादेना न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ चुके हैं। इसके साथ नगर निगम के भवन का अवैध रूप से निर्माण कराने की कमिश्नर से शिकायत कर दी। मुनीश की शिकायत का जवाब देते हुए गुरुवार को मेयर उमेश गौतम ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए। इनमें मुनीश शर्मा की ओर से दिए गए वो जवाब भी थे जो उन्होंने आदित्य इंजीकॉन को दिए गए नोटिस पर खुद दिए थे।
विज्ञापन
मुनीश के खिलाफ हुई जांच की रिपोर्ट भी दबा दी
मेयर ने बताया कि वर्ष 2015 में तत्कालीन उपसभापति ऊषा अरोरा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से मुनीश शर्मा की शिकायत की थी और अपने रसूख के बल पर नगर निगम में करोड़ों रुपये के काम करने का आरोप लगाया था। इसकी जांच तत्कालीन नगर आयुक्त शीलधर यादव को दी गई लेकिन मुनीश शर्मा ने उन्हें गुमराह कर दिया। शपथ पत्र देकर कहा कि जल आकाश या आदित्य इंजीकॉन से उनका कोई लेनादेना नहीं है जबकि निगम की फाइलों में आदित्य इंजीकॉन के अधिकृत व्यक्ति के रूप में मुनीश का ही नाम दर्ज है। फिर भी यह जांच रिपोर्ट दबा दी गई। मेयर ने उमेश गौतम ने कहा कि जो लोग ईमानदारी की दुहाई देते थे, अब उनके घपलों के खुलासे हो रहे हैं। भाजपा सरकार में मंत्रियों के तीन निजी सचिव जेल जा रहे हैं और यहां मेयर के निजी सचिव करोड़ों के ठेके दिलाने के काम करते रहे। यह एक बड़ा खुलासा हुआ है। वह पूरे मामले की जांच कराएंगे और शासन को भी तथ्यों से अवगत कराकर रिपोर्ट लिखाएंगे।
विज्ञापन
जल आकाश की फाइल तो मेयर हाउस मंगाकर गायब कराई
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2014 में जब डॉ. तोमर मेयर थे तब जल आकाश के कब्जे की फाइल मेयर हाउस पर मंगवाई गई थी लेकिन वहां से फाइल लौटाई नहीं गई। इसके बाद फाइल के कुछ दस्तावेज गायब करके उसे लौटाने की कोशिश की गई। यह मामला पकड़ में आया तो तत्कालीन अधिकारियों ने मामले की जांच की और यह आरोप सही भी पाए गए।
मेयर साहब मेरे बड़े हैं। उन्हें व्यक्तिगत हमलों से बचना चाहिए। कारोबार करना कोई अपराध नहीं है। भाजपा नेता तो शराब का कारोबार भी कर रहे हैं। पॉवर ऑफ अटार्नी निरस्त होने के बाद मैंने कोई काम नहीं किया है। उन्हें जो भी कार्रवाई करनी है, मेरे खिलाफ करें। दूसरे को प्रताड़ित न करें। जो भी वह करेंगे, वह सब कोर्ट में बताऊंगा। - मुनीश शर्मा
मेयर ईमानदार हैं तो ग्रीन बेल्ट की जमीन छोड़ें : डॉ. तोमर
पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के अनुसार जो भी दोषी हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। जब मुनीश शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की तब यह सब याद क्यों आया। अगर वह गलत थे तो पहले ही कार्रवाई की जाती। रही मेरी ईमानदारी की बात तो वह सबूत लाकर दें। उनके खिलाफ तो 5998 वर्ग मीटर जमीन दबाने के सबूत दिए गए हैं। उस जमीन से वह कब्जा क्यों नहीं छोड़ते। जनता को क्यों नहीं बताते कि वर्ष 2013 से मिशन अस्पताल का कितना टैक्स जमा किया।