{"_id":"5f5fbdd88ebc3efbb2651942","slug":"300-bed-hospital-now-covid-hospital-bareilly-news-bly4198387129","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना डॉक्टर और दवाओं के तीन सौ बेड अस्पताल बना कोविड अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना डॉक्टर और दवाओं के तीन सौ बेड अस्पताल बना कोविड अस्पताल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल डॉक्टरों और दवाओं के साथ तमाम जरूरी इंतजाम की कमी के बावजूद अब कोविड चिकित्सालय के नाम से जाना जाएगा। पहली उपलब्धि के तौर पर अफसरों ने सोमवार को अस्पताल का नामकरण कर दिया। हालांकि कोविड चिकित्सालय के तौर पर इस अस्पताल के शुरू होने का अभी और इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल बड़ी दिक्कत यह है कि जिन सात डॉक्टरों को कोविड चिकित्सालय के लिए प्रशिक्षित किया गया था, वे भी यहां तैनाती के लिए तैयार नहीं हैं। इन सभी डॉक्टरों को नोटिस दिया गया है।
कोविड चिकित्सालय के तौर पर नामकरण के साथ सोमवार को यहां एल-1 और एल-2 कोविड मरीजों का विलय हो गया। यानी चिकित्सालय में अब लक्षण वाले और लक्षण रहित दोनों तरह के मरीज भर्ती किए जाएंगे। हालांकि आईसीयू शुरू न होने की वजह से इलाज के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। इस सोमवार को टलने के बाद अस्पताल का औपचारिक शुभारंभ अगले सोमवार यानी छह दिन बाद होने की बात कही जा रही है। सीएमएस डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक बरेली समेत मंडल के दूसरे जिलों से चार डॉक्टरों ने ज्वॉइन कर लिया है मगर शासन की ओर से भेजे गए सात डॉक्टर अभी नहीं पहुंचे हैं। पिछले दिनों प्रशिक्षण के लिए आए और डॉक्टरों में से भी कई ने अब तक ज्वॉइन नहीं किया है न ही नोटिस का जवाब दिया है। लिहाजा यह सवाल अब भी मुंह बाएं खड़ा है कि डॉक्टरों की कमी पूरी हुए बगैर अस्पताल कैसे चलेगा।
दवाएं न सिरिंज, अस्पताल में
फिर भी भर्ती हैं 42 मरीज
सीएमएस ने कहा- कई बार लिख चुका हूं फिर भी नहीं आईं दवाएं
कोविड चिकित्सालय में सोमवार की देर शाम तक 42 मरीज भर्ती थे जिनमें से 25 तो पुलिसकर्मी ही हैं। मगर मरीजों के लिए इलाज के लिए दवाओं की उपलब्धता नहीं था। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में सीरिंज की जरूरत भी पूरी नहीं हो सकी है। सीएमएस के मुताबबिक उन्होंने करीब आधा दर्जन पत्र दवा और सीरिंज उपलब्ध कराने के लिए लिखे हैं जिसके बाद सिर्फ आश्वासन मिला है दवाएं नहीं मिलीं।
विज्ञापन
पूरी होने में नहीं आ रहीं कमियां
अग्निशमन के इंतजाम भी अधूरे
अस्पताल में पिछले दिनों ऑक्सीजन सिस्टम के गायब होने का हल्ला मचा था। आनन-फानन में विभाग ने उपकरण को खोज निकाला मगर ऑटो कंट्रोल पैनल का काम अधूरा रह गया। रविवार को जैसे-तैसे पैनल लगा तो अब आग से बचाव के इंतजाम अधूरे होने की वजह से मामला अटका पड़ा है। अग्निशमन के लिए मेन कंट्रोल पैनल स्थापित कर दिया गया है मगर कनेक्शन नहीं हो पाया है। बगैर सुरक्षा उपकरण के अस्पताल का शुरू होना मुश्किल है।
डॉक्टरों को सौंपी गईं जिम्मेदारियां
सोमवार को अस्पताल में एल-1 और एल-2 मरीजों का विलय होने के बाद उपलब्ध डॉक्टरों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। डॉ. सुचित्रा गंगवार को फ्लू कॉर्नर पर सैंपलिंग और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजमेर सिंह को एल-1 कोविड मरीजों की देखरेख और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। एल-2 समेत दूसरी सभी यूनिट की मॉनीटिंरग सीएमएस डॉ. वागीश खुद संभालेंगे। उन्होंने बताया कि कार्य विभाजन होने से सभी ठीक से जिम्मेदारी निभा पाएंगे।
विज्ञापन
कोविड चिकित्सालय के तौर पर नामकरण के साथ सोमवार को यहां एल-1 और एल-2 कोविड मरीजों का विलय हो गया। यानी चिकित्सालय में अब लक्षण वाले और लक्षण रहित दोनों तरह के मरीज भर्ती किए जाएंगे। हालांकि आईसीयू शुरू न होने की वजह से इलाज के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। इस सोमवार को टलने के बाद अस्पताल का औपचारिक शुभारंभ अगले सोमवार यानी छह दिन बाद होने की बात कही जा रही है। सीएमएस डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक बरेली समेत मंडल के दूसरे जिलों से चार डॉक्टरों ने ज्वॉइन कर लिया है मगर शासन की ओर से भेजे गए सात डॉक्टर अभी नहीं पहुंचे हैं। पिछले दिनों प्रशिक्षण के लिए आए और डॉक्टरों में से भी कई ने अब तक ज्वॉइन नहीं किया है न ही नोटिस का जवाब दिया है। लिहाजा यह सवाल अब भी मुंह बाएं खड़ा है कि डॉक्टरों की कमी पूरी हुए बगैर अस्पताल कैसे चलेगा।
विज्ञापन
दवाएं न सिरिंज, अस्पताल में
फिर भी भर्ती हैं 42 मरीज
सीएमएस ने कहा- कई बार लिख चुका हूं फिर भी नहीं आईं दवाएं
कोविड चिकित्सालय में सोमवार की देर शाम तक 42 मरीज भर्ती थे जिनमें से 25 तो पुलिसकर्मी ही हैं। मगर मरीजों के लिए इलाज के लिए दवाओं की उपलब्धता नहीं था। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में सीरिंज की जरूरत भी पूरी नहीं हो सकी है। सीएमएस के मुताबबिक उन्होंने करीब आधा दर्जन पत्र दवा और सीरिंज उपलब्ध कराने के लिए लिखे हैं जिसके बाद सिर्फ आश्वासन मिला है दवाएं नहीं मिलीं।
विज्ञापन
पूरी होने में नहीं आ रहीं कमियां
अग्निशमन के इंतजाम भी अधूरे
अस्पताल में पिछले दिनों ऑक्सीजन सिस्टम के गायब होने का हल्ला मचा था। आनन-फानन में विभाग ने उपकरण को खोज निकाला मगर ऑटो कंट्रोल पैनल का काम अधूरा रह गया। रविवार को जैसे-तैसे पैनल लगा तो अब आग से बचाव के इंतजाम अधूरे होने की वजह से मामला अटका पड़ा है। अग्निशमन के लिए मेन कंट्रोल पैनल स्थापित कर दिया गया है मगर कनेक्शन नहीं हो पाया है। बगैर सुरक्षा उपकरण के अस्पताल का शुरू होना मुश्किल है।
डॉक्टरों को सौंपी गईं जिम्मेदारियां
सोमवार को अस्पताल में एल-1 और एल-2 मरीजों का विलय होने के बाद उपलब्ध डॉक्टरों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। डॉ. सुचित्रा गंगवार को फ्लू कॉर्नर पर सैंपलिंग और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजमेर सिंह को एल-1 कोविड मरीजों की देखरेख और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। एल-2 समेत दूसरी सभी यूनिट की मॉनीटिंरग सीएमएस डॉ. वागीश खुद संभालेंगे। उन्होंने बताया कि कार्य विभाजन होने से सभी ठीक से जिम्मेदारी निभा पाएंगे।