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Bareilly News: 29 हजार ने ऋण लिया, 8700 ने नहीं लौटाई रकम
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बरेली। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में 30 प्रतिशत खाते एनपीए हो गए हैं। लाभार्थियों के रकम न चुकाने की वजह से बैंकों को नुकसान हो रहा है। योजना की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत सूक्ष्म व लघु उद्योग लगाने वाले लोगों को 50 हजार रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक का ऋण बिना किसी गारंटी के दिया जा रहा है। ऋण धारकों से कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है।
जिलाधिकारी हर माह होने वाली मासिक बैठक में इसकी समीक्षा करते है और बैंक अधिकारियों को एनपीए को कम करने की बात कह रहे है। इसके बाद भी योजना के तहत करीब 30 प्रतिशत खाते एनपीए होने की कगार पर है। आंकड़ों के मुताबिक जून तक 29,001 लाभार्थी 290.87 करोड़ रुपये की रकम ऋण के रूप में ले चुके है। इसमें से अलग-अलग बैंक के करीब 8700 खाते एनपीए हो चुके हैं।
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ये सभी खाता धारक ऋण लेने के बाद बैंक को मासिक किस्त नहीं चुका पा रह है। औद्योगिक संगठनों के मुताबिक किसी भी उद्योग को चलाने के लिए करीब तीन साल का समय लगता है, कभी-कभी नया उद्योग होने की वजह से कम चल पाता है या बंदी की कगार पर आ जाता है ऐसे में ऋण की किस्त चुकाना बहुत मुश्किल होता है।
भेजा जा रहा नोटिस
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण न चुका पाने वाले खाताधारकों को खाता एनपीए होने के बाद नोटिस भेजा जा रहा है। एलडीएम वीके अरोरा ने बताया कि जिन सरकारी योजनाओं में खाते एनपीए हो रहे है, उनकी हर माह समीक्षा करके संबंधित बैंक अधिकारियों को एनपीए कम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। संवाद
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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत सूक्ष्म व लघु उद्योग लगाने वाले लोगों को 50 हजार रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक का ऋण बिना किसी गारंटी के दिया जा रहा है। ऋण धारकों से कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है।
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जिलाधिकारी हर माह होने वाली मासिक बैठक में इसकी समीक्षा करते है और बैंक अधिकारियों को एनपीए को कम करने की बात कह रहे है। इसके बाद भी योजना के तहत करीब 30 प्रतिशत खाते एनपीए होने की कगार पर है। आंकड़ों के मुताबिक जून तक 29,001 लाभार्थी 290.87 करोड़ रुपये की रकम ऋण के रूप में ले चुके है। इसमें से अलग-अलग बैंक के करीब 8700 खाते एनपीए हो चुके हैं।
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ये सभी खाता धारक ऋण लेने के बाद बैंक को मासिक किस्त नहीं चुका पा रह है। औद्योगिक संगठनों के मुताबिक किसी भी उद्योग को चलाने के लिए करीब तीन साल का समय लगता है, कभी-कभी नया उद्योग होने की वजह से कम चल पाता है या बंदी की कगार पर आ जाता है ऐसे में ऋण की किस्त चुकाना बहुत मुश्किल होता है।
भेजा जा रहा नोटिस
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण न चुका पाने वाले खाताधारकों को खाता एनपीए होने के बाद नोटिस भेजा जा रहा है। एलडीएम वीके अरोरा ने बताया कि जिन सरकारी योजनाओं में खाते एनपीए हो रहे है, उनकी हर माह समीक्षा करके संबंधित बैंक अधिकारियों को एनपीए कम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। संवाद