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25 हजार लोगों पर शिकंजे की तैयारी
बरेली
Updated Mon, 22 Feb 2016 02:25 AM IST
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बरेली। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अधिक आमदनी वाले बरेली के 25 हजार नए लोगों की तलाश में आयकर विभाग ने विभागों से आंकड़े मांगे हैं। ये आंकड़े पांच लाख से अधिक की संपत्ति खरीदने वालों के अलावा हवाई जहाज से यात्रा, गहने, टीवी और अन्य आरामदायक सामान की खरीद फरोख्त करने वालों के मांगे गए हैं। इन सभी का ब्योरा दो किश्तों में मांगा है। पहले फेज में दिसंबर 2015 के लोगों की जानकारी मांगी गई है, जबकि दूसरे फेज में 31 मार्च 2016 तक खरीद फरोख्त करने वालों का आंकड़ा देने को कहा है।
पिछले सप्ताह आयकर विभाग की ओर से जिले के छह सब रजिस्ट्रार के यहां से जमीन खरीदने वालों का रिकार्ड मांगा गया। यह ब्योरा पांच लाख से 30 लाख और 30 लाख से ऊपर की संपत्ति की खरीद का अलग-अलग है। संपत्ति खरीदने और बेचने वाले दोनों के पेन और मोबाइल नंबर भी अंकित करने को कहा गया है। इसी तरह एक लाख या इससे अधिक के गहने तथा अन्य सामान खरीदने वालों का भी ब्योरा मांगा गया है। पेन कार्ड के आधार पर इन सभी का पिछले सालों में की गई खरीद फरोख्त के आंकड़ों के साथ मिलान कराकर आयकर के नए स्रोत तलाशे जाएंगे।
आयकर विभाग ने पिछले महीने दो साल पहले की जांच में 125 फर्जी पते दर्शाकर दाखिल किए गए रिटर्न का खुलासा किया था। उनके पते पर रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजे गए। डाक विभाग से पता चला कि वह इस पते पर रहते ही नहीं हैं। अब रजिस्ट्री आफिस और पुलिस थानों से भी जानकारी कराई गई थी लेकिन वह भी उनका सही पता नहीं बता पाए, इसलिए इस बार मोबाइल और लेंड लाइन नंबर के साथ डिटेल मांगी गई है, ताकि उनको आसानी से ट्रेस किया जा सके।
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पिछले सप्ताह आयकर विभाग की ओर से जिले के छह सब रजिस्ट्रार के यहां से जमीन खरीदने वालों का रिकार्ड मांगा गया। यह ब्योरा पांच लाख से 30 लाख और 30 लाख से ऊपर की संपत्ति की खरीद का अलग-अलग है। संपत्ति खरीदने और बेचने वाले दोनों के पेन और मोबाइल नंबर भी अंकित करने को कहा गया है। इसी तरह एक लाख या इससे अधिक के गहने तथा अन्य सामान खरीदने वालों का भी ब्योरा मांगा गया है। पेन कार्ड के आधार पर इन सभी का पिछले सालों में की गई खरीद फरोख्त के आंकड़ों के साथ मिलान कराकर आयकर के नए स्रोत तलाशे जाएंगे।
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आयकर विभाग ने पिछले महीने दो साल पहले की जांच में 125 फर्जी पते दर्शाकर दाखिल किए गए रिटर्न का खुलासा किया था। उनके पते पर रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजे गए। डाक विभाग से पता चला कि वह इस पते पर रहते ही नहीं हैं। अब रजिस्ट्री आफिस और पुलिस थानों से भी जानकारी कराई गई थी लेकिन वह भी उनका सही पता नहीं बता पाए, इसलिए इस बार मोबाइल और लेंड लाइन नंबर के साथ डिटेल मांगी गई है, ताकि उनको आसानी से ट्रेस किया जा सके।
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