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नाबार्ड ने किसानों के लिए बनाई थी 2646 करोड़ की योजना
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बरेली। लोकसभा चुनाव नजदीक देखकर भले ही अब राजनैतिक दल किसानों को अपने एजेंडे में रखकर कर्ज माफी और ब्याज मुक्त ऋण देने का आश्वासन दे रहे हों, लेकिन छह साल पहले नाबार्ड ने बरेली के किसानों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण मंजूर करने के लिए 2446 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। केंद्र में भाजपा सरकार बनते ही यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इस योजना की खास बात यह थी कि लघु उद्योग शुरू करने के लिए एक करोड़ रुपये तक के लोन के लिए किसी भी तरह की सिक्योरिटी की जरूरत नहीं थी।
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन की पहल पर नाबार्ड ने किसानों को बैंकों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ी पहल की थी। वर्ष 2013 में जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति के चेयरमैन की हैसियत से बरेली के लीड बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस योजना से किसानों को एक करोड़ तक का लोन बिना सिक्योरिटी के देने का खाका तैयार किया था। बैंकों ने उस समय तत्कालीन वित्तमंत्री से बरेली के लिए 2646 करोड़ का अतिरिक्त पैकेज मांगा था। इससे किसान अपने घर पर ही खेती के अलावा लघु एवं कुटीर उद्योग लगाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते थे। मगर, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में सरकार बदल गई। भाजपा सरकार में यह स्कीम आगे नहीं बढ़ सकी। किसान जहां के तहां रह गए।
यह उद्यम लगाने के लिए मिलना था लोन
महिलाओं को ब्यूटी पार्लर खोलने, डेयरी उद्योग, लघु सिंचाई, फूड एंड एग्रो प्रोसेसिंग, हार्टी कल्चर फार्म, फोरेस्ट्री फार्मिंग, स्टोरेज एवं मार्केट, भेंड, बकरी और सुअर पालन, एनर्जी उत्पन्न करने वाली बैलगाड़ी, बैल खरीदकर खेती करने, छोटी-मोटी दुकान खोलने, टैंपो खरीदने, डीसीएम या ट्रक खरीदने समेत 15 से ज्यादा लघु एवं मध्यम उद्यम स्थापित करने के लिए।
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पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन की पहल पर नाबार्ड ने किसानों को बैंकों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ी पहल की थी। वर्ष 2013 में जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति के चेयरमैन की हैसियत से बरेली के लीड बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस योजना से किसानों को एक करोड़ तक का लोन बिना सिक्योरिटी के देने का खाका तैयार किया था। बैंकों ने उस समय तत्कालीन वित्तमंत्री से बरेली के लिए 2646 करोड़ का अतिरिक्त पैकेज मांगा था। इससे किसान अपने घर पर ही खेती के अलावा लघु एवं कुटीर उद्योग लगाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते थे। मगर, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में सरकार बदल गई। भाजपा सरकार में यह स्कीम आगे नहीं बढ़ सकी। किसान जहां के तहां रह गए।
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यह उद्यम लगाने के लिए मिलना था लोन
महिलाओं को ब्यूटी पार्लर खोलने, डेयरी उद्योग, लघु सिंचाई, फूड एंड एग्रो प्रोसेसिंग, हार्टी कल्चर फार्म, फोरेस्ट्री फार्मिंग, स्टोरेज एवं मार्केट, भेंड, बकरी और सुअर पालन, एनर्जी उत्पन्न करने वाली बैलगाड़ी, बैल खरीदकर खेती करने, छोटी-मोटी दुकान खोलने, टैंपो खरीदने, डीसीएम या ट्रक खरीदने समेत 15 से ज्यादा लघु एवं मध्यम उद्यम स्थापित करने के लिए।
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