फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   माफिया खुलेआम फर्जी गेहूं केंद्र खोलेगा, मगर सिस्टम कुछ नहीं बोलेगा

माफिया खुलेआम फर्जी गेहूं केंद्र खोलेगा, मगर सिस्टम कुछ नहीं बोलेगा

Tue, 02 Apr 2019 02:08 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Tue, 02 Apr 2019 02:08 AM IST
विज्ञापन
माफिया खुलेआम फर्जी गेहूं केंद्र खोलेगा, मगर सिस्टम कुछ नहीं बोलेगा
बरेली। चुनाव का मौका है और सिस्टम की आंखें बंद, ऐसे ही माहौल में गेहूं की सरकारी खरीद होनी है लिहाजा इसमें खुलकर खेल भी शुरू हो गया है। गेहूं की सरकारी खरीद हर साल की तरह इस बार भी पहली अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन चुनाव आचार संहिता की वजह से इसके टेंडर फाइनल नहीं हो पाए हैं। निर्वाचन आयोग से टेंडरों को खोलने और उन्हें मंजूरी देने के लिए अनुमति मांगी गई है, मगर टेंडर फाइनल होने से पहले ही सरकारी गेहूं खरीद पर राशन माफिया ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। फतेहगंज पूर्वी में ऐसे ही एक राशन माफिया ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद के लिए न सिर्फ क्रय केंद्र बना लिया है बल्कि यहां बैनर लगाकर कांटा-बाट और बारदाना जैसी सुविधाएं भी जुटा ली हैं। ऐसे ही कई केंद्र बरेली मंडल में और भी जगह नजर आ रहे हैं। मगर ‘चुनाव में व्यस्त’ सिस्टम को इन फर्जी केंद्रों पर ध्यान देने की फुर्सत नहीं मिल रही है।
विज्ञापन

गेहूं की सरकारी खरीद संभागीय खाद्य रसद विभाग, राज्य खाद्य निगम, भारतीय खाद्य निगम, यूपी एग्रो, पीसीएफ, कल्याण निगम समेत सात एजेंसियों को करनी है। इसके लिए बरेली मंडल में क्रय केंद्र भी चिह्नित हो गए हैं। गेहूं खरीद शुरू होने से पहले इन विभागों की ओर क्रय केंद्रों पर तौल, बारदाना और गोदामों तक गेहूं पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्टिंग के ठेके दिए जाने हैं। इसके लिए विभागों की ओर से टेंडर भी मांग लिए गए हैं, लेकिन इसी बीच चुनाव आचार संहिता लागू होने से यह प्रक्रिया जहां के तहां रुक गई। किसी भी ठेके के लिए अभी तक टेंडर नहीं खुल पाए हैं। विभागों ने टेंडरों को खोलने के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी है। अभी तक चुनाव आयोग से यह अनुमति नहीं मिली है लेकिन राशन के माफिया ने अनुमति मिलने से पहले ही सरकारी गेहूं खरीद पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन

राशन माफिया की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बरेली मंडल में कई स्थानों पर उन्होंने बगैर टेंडर हुए ही बैनर क्रय केंद्र बना लिए हैं। किसानों को गुमराह करके यहां उनका गेहूं औने-पौने दामों में खरीदने की पूरी तैयारी है। फर्जी केंद्रों पर गेहूं खरीदने के लिए निजी स्टाफ भी लगा दिया गया है। बैनर पर गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1840 रुपये प्रति क्विंटल लिख दिया गया है। ऐसा ही एक फर्जी गेहूं क्रय केंद्र फतेहगंज पूर्वी में खोला गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


माफिया पर दर्ज है गेहूं के गबन का मुकदमा
फतेहगंज पूर्वी में जिस माफिया ने फर्जी गेहूं क्रय केंद्र खोला है, उसका नाम सुनील बताया जाता है। सूत्रों के मुताबिक यह शख्स राशन की हेराफेरी का पुराना खिलाड़ी है। उस पर 2002 में गेहूं के गबन का मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। हालांकि उसके बाद भी वह सिस्टम से सांठगांठ कर गेहूं खरीद के ठेके लेता रहा है। इस बार भी उसने गेहूं खरीद में घपले करने की तैयारी शुरू की है। विभागीय अफसर जानकर अनजान बने हुए हैं।

चुनाव के शोर में किसानों को ठगने की तैयारी
सूत्र बताते हैं कि राशन माफिया ने इस पर चुनाव का पूरा फायदा उठाने की तैयारी की है। गेहूं के गोरखधंधे से जुड़े इन पुराने खिलाड़ियों की योजना यह है कि चुनाव के शोर में इस बार उनके खेल पर आसानी से किसी की निगाह नहीं पड़ने वाली। इरादा यह है कि फर्जी गेहूं क्रय केंद्रों पर किसानों का गेहूं औने-पौने दामों में खरीदकर उसे बाद में सरकारी रेट पर बेच दिया जाए। चूंकि किसानों को अंदाजा नहीं है कि यह केंद्र फर्जी है, इसलिए उनका पैसा मारे जाने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

टेंडर प्रक्रिया आचार संहिता लगने की वजह से लंबित है। चुनाव आयोग की अनुमति के बाद ही केंद्रों पर खरीद होगी। अभी मंडी में गेहूं भी नहीं आया है। चुनाव आयोग की अनुमति के बाद ही टेंडर फाइनल होंगे और खरीद होगी। इसलिए अभी कोई केंद्र शुरू नहीं हुआ है। - सुनील भारती, जिला खाद्य विपणन अधिकारी

होते रहे और दबते रहे खाद्यान्न घोटाले
बरेली। राशन घोटालों से पूरे बरेली मंडल का नाम जुड़ा हुआ है। शाहजहांपुर सबसे आगे बताया जाता है। इसके बाद पीलीभीत और बरेली का नंबर है। चूंकि शाहजहांपुर और पीलीभीत में गेहूं व धान की पैदावार सर्वाधिक होती है, इसलिए सबसे ज्यादा घपले भी इन्हीं जिलों में होते हैं।

केस- 1
करीब चार महीने पहले भुता के सरकारी गोदाम से चावल उठाकर रिठौरा में एक निजी गोदाम में पहुंचाया गया था। देर शाम जब यह खेल चल रहा था तभी तत्कालीन एसपी ग्रामीण ने छापा मार दिया था। बाद में इस मामले को प्रशासन और राज्य खाद्य निगम समेत सभी विभाग रफादफा करने में जुट गए। तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट जांच अधिकारी बनाए गए तो उन्होंने भी खेल कर दिया। अमर उजाला ने लगातार इस पर खबरें दीं तब कहीं राशन माफिया और उसके गुर्गों पर मुक दमा लिखा गया। इस घोटाले में पुलिस भी राशन माफिया की पैरवी में जुटी हुई थी।


केस- 2
परसाखेड़ा की एक निजी राइस मिल परिसर में हो रही अवैध धान खरीद का मामला पकड़ा गया। इसके भी जांच अधिकारी तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ही थे। राइस मिल मालिक ने दिल्ली के एक कारोबारी को परिसर किराए पर दिया था। उसने रिठौरा के ही एक माफिया को शामिल कर जमकर अवैध खरीदारी की और प्रशासन की मिलीभगत से चावल और धान विभिन्न आढतियों को उठवा दिया। इस मामले में काफी शोर-शराबा हुआ लेकिन भ्रष्ट सिस्टम राशन माफिया के साथ ही खड़ा दिखाई दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed