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‘कलयुग में संकीर्तन से ध्यान साधना का जगता है भाव’

Mon, 25 Mar 2019 01:47 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Mon, 25 Mar 2019 01:47 AM IST
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‘कलयुग में संकीर्तन से ध्यान साधना का जगता है भाव’
‘कलयुग में संकीर्तन से ध्यान साधना का जगता है भाव’ - फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। कत्था फैक्ट्री परिसर में चल रही श्रीराम कथा ‘मानस अपराध’ के दूसरे दिन रविवार को संत मोरारी बापू ने राम नाम का महात्म्य बताकर श्रद्धालुुओं को श्रीराम नाम का ह्रदय से जप करने का सुझाव दिया। कहा कि राम नाम का जप करने में व्यतीत होने वाला जीवन ही कलयुग में सार्थक है। कहा कि गुरु के बिना परमतत्व का स्वभाव जानना कठिन है।
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उन्होंने बताया कि राम की प्राप्ति भी गुरु के माध्यम से ही संभव है। श्रीराम निमंत्रण का जप नहीं, बल्कि सात्विक मार्ग पर चलने को प्रेरित करने वाली पुकार है। कहा, कलयुग में लोग लक्ष्मी यानी धन संपदा के पीछे भाग रहे हैं, जबकि जहां भगवान का ध्यान होगा, वहां लक्ष्मी का निवास तय है। अगर भगवान के बिना लक्ष्मी का आगमन होता है तो वह तमाम बुराइयां भी साथ में लाती हैं। धर्म-अधर्म की चर्चा करते हुए कहा, धार्मिक व्यक्ति का स्वभाव सरल एवं सात्विक होता है। कथा में कुंडली की जागृति का माध्यम कान होते हैं। तन्मयता से संकीर्तन सुनने पर सात्विक तरंगें चक्रों को जगाने का कार्य करती हैं। कहा कि अगर सच्चे मन से भगवान को पुकारा जाए तो जैसे शिशु के रोने पर मां दौड़ी आती है उसी प्रकार परमात्मा भी दौड़े चले आते हैं। उन्होंने ‘जो अपराध भगत कर करई, राम रोष पावक सो जरई’, ‘सुन सुरेश रघुनाथ सुभाऊ, निज अपराध रिसाई न काहू’ चौपाई सुनाकर श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम की भक्ति का मर्म बताया।
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सुमधुर भजनों से गूंजा पंडाल
श्रीराधा माधव संकीर्तन मंडल और श्रीबांके बिहारी मंदिर के भजन गायक जगदीश भाटिया ने अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने ‘आवाज देकर हमें तुम बुलाओ, मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ’, ‘जिंदगी वह है जो तेरे जलवों में बसर हो, वरना यह जीना भी कोई जीना है’ आदि सुमधुर भजन सुनाए।
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राधेश्याम कथावाचक ने बरेली का नाम दुनिया भर में पहुंचाया
संत मोरापी बापू ने कथावाचक पं. राधेश्याम कथावाचक का भी मंच से जिक्र किया। कहा कि उनके द्वारा रचित ‘राधेश्याम रामायण’ ने बरेली की पहचान को दुनिया भर तक पहुंचा दिया है। कार्यक्रम में मोहता परिवार, काशी नाथ शर्मा, गिरधर गोपाल खंडेलवाल, रमेश खानीजो आदि मौजूद रहे।
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