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बैंकों में थमी केंद्र सरकार की योजनाओं की रफ्तार
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बरेली। केंद्र सरकार ने जनता को सीधे फायदा देने के लिए पांच साल पहले प्रधानमंत्री जनधन योजना में खाते खुलवाने के लिए बैंकों के विशेष कैंप लगाए थे। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा, फसल बीमा, अटल पेंशन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, किसान ऋण माफी जैसी योजनाओं को संचालित करने के लिए बैंकों ने वैसा उत्साह नहीं दिखाया, जैसा अपेक्षित था। पांच साल में तमाम योजनाएं अफसरों की उदासीनता की शिकार हो गईं। इनको आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) :
इस योजना में हर किसान का बैंक से क्रेडिट कार्ड बनना जरूरी है। बैंक केसीसी से किसान को उसकी मौजूदा खेती के आधार पर लिमिट बनाकर रबी और खरीफ सीजन में सीजनल ऋण देते हैं। हर छमाही में नई फसल होने पर किसान को वह ऋण बैंक को 7.0 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करना होता है। जो किसान समय पर यानी रबी में 31 मार्च और खरीफ में 30 सितंबर से पहले ऋण चुका देते हैं तो बैंक ऐसे किसानों को ब्याज में 3.0 प्रतिशत छूट देकर किसान के खाते में वापस कर देते हैं। वर्तमान में बरेली के किसानों पर इस समय बैंकों का 2800 करोड़ से ज्यादा का ऋण है। इसमें वह ऋण शामिल नहीं है जो सरकार कृषि ऋण मोचन योजना में माफ कर चुकी है।
अटल पेंशन योजना :
इस योजना में 18 से 40 साल उम्र तक के लोग कम से कम प्रीमियम जमा कर 60 साल के बाद पेंशन का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। 18 साल की उम्र में अटल पेंशन योजना में 12 रुपये प्रति माह प्रीमियम है, लेकिन उम्र के हिसाब से यह बढ़ता जाता है। योजना में 1000 से 5000 रुपये तक पेंशन देने का प्रावधान है। अब तक सिर्फ 40 हजार आवेदकों ने ही अटल पेंशन योजना में पंजीकरण कराया है, जबकि इसका लक्ष्य असीमित था। सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति को रिटायरमेंट की उम्र के बाद पेंशन देना है।
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प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना :
यह योजना 9 मई, 2015 को शुरू की गई थी। यह एक इंश्योरेंस प्लान है। इसमें 330 रुपये की वार्षिक किस्त जमा करने के बाद अगर किसी व्यक्ति की अचानक मौत हो जाती है तो उसके परिवार को 2.0 लाख रुपये तक क्लेम मिलेगा। पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति समय पूरा होने के बाद भी ठीक रहता है तो उसे कोई लाभ नहीं मिलता है। अब तक इस योजना में सिर्फ 1.16 लाख ही पॉलिसी धारक बन पाए हैं।
प्रधानमंत्री जनधन योजना :
जिन परिवारों के बैंक में खाते नहीं थे, प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत उनके बैंकों में शून्य बैलेंस पर खाते खुलवाए गए। बरेली में 20 लाख से ज्यादा जनधन खाते शून्य बैलेंस पर खोले गए थे। नोटबंदी के समय इन खातों से लेन-देन के मामले सामने आए थे, मगर उसके बाद ज्यादातर खाताधारक लेन-देन नहीं कर पाए। अब 19.41 लाख जनधन खाते रह गए हैं। 59 हजार से ज्यादा खाते बंद हो चुके हैं। कुछ लोगों ने अपने खाते बचत खातों में तब्दील करा लिए हैं। बैंकों ने इन खातों को चलाने में बहुत ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
किसान ऋण माफी:
राज्य सरकार की किसान ऋण मोचन योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में 97 हजार सिकानों का 510 करोड़ रुपये का लोन माफ किया गया। मगर, 35 हजार से ज्यादा किसानों के ऋण माफ नहीं हो पाए। सरकार ने बाद में भी बचे किसानों के आवेदन लिए। मगर, यह आवेदन जांच के लिए इधर से उधर घूम रहे हैं। इन किसानों की ऋण माफी नहीं हो पायी है।
केंद्र सरकार की जो योजनाएं बैंकों के माध्यम से चल रही हैं, उनके प्रचार-प्रसार के लिए बैंकों ने बड़े पैमाने पर कैंप भी लगाए। बैंक अब भी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। पब्लिक का रिस्पांस भी आ रहा है।
- ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर
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किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) :
इस योजना में हर किसान का बैंक से क्रेडिट कार्ड बनना जरूरी है। बैंक केसीसी से किसान को उसकी मौजूदा खेती के आधार पर लिमिट बनाकर रबी और खरीफ सीजन में सीजनल ऋण देते हैं। हर छमाही में नई फसल होने पर किसान को वह ऋण बैंक को 7.0 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करना होता है। जो किसान समय पर यानी रबी में 31 मार्च और खरीफ में 30 सितंबर से पहले ऋण चुका देते हैं तो बैंक ऐसे किसानों को ब्याज में 3.0 प्रतिशत छूट देकर किसान के खाते में वापस कर देते हैं। वर्तमान में बरेली के किसानों पर इस समय बैंकों का 2800 करोड़ से ज्यादा का ऋण है। इसमें वह ऋण शामिल नहीं है जो सरकार कृषि ऋण मोचन योजना में माफ कर चुकी है।
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अटल पेंशन योजना :
इस योजना में 18 से 40 साल उम्र तक के लोग कम से कम प्रीमियम जमा कर 60 साल के बाद पेंशन का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। 18 साल की उम्र में अटल पेंशन योजना में 12 रुपये प्रति माह प्रीमियम है, लेकिन उम्र के हिसाब से यह बढ़ता जाता है। योजना में 1000 से 5000 रुपये तक पेंशन देने का प्रावधान है। अब तक सिर्फ 40 हजार आवेदकों ने ही अटल पेंशन योजना में पंजीकरण कराया है, जबकि इसका लक्ष्य असीमित था। सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति को रिटायरमेंट की उम्र के बाद पेंशन देना है।
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प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना :
यह योजना 9 मई, 2015 को शुरू की गई थी। यह एक इंश्योरेंस प्लान है। इसमें 330 रुपये की वार्षिक किस्त जमा करने के बाद अगर किसी व्यक्ति की अचानक मौत हो जाती है तो उसके परिवार को 2.0 लाख रुपये तक क्लेम मिलेगा। पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति समय पूरा होने के बाद भी ठीक रहता है तो उसे कोई लाभ नहीं मिलता है। अब तक इस योजना में सिर्फ 1.16 लाख ही पॉलिसी धारक बन पाए हैं।
प्रधानमंत्री जनधन योजना :
जिन परिवारों के बैंक में खाते नहीं थे, प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत उनके बैंकों में शून्य बैलेंस पर खाते खुलवाए गए। बरेली में 20 लाख से ज्यादा जनधन खाते शून्य बैलेंस पर खोले गए थे। नोटबंदी के समय इन खातों से लेन-देन के मामले सामने आए थे, मगर उसके बाद ज्यादातर खाताधारक लेन-देन नहीं कर पाए। अब 19.41 लाख जनधन खाते रह गए हैं। 59 हजार से ज्यादा खाते बंद हो चुके हैं। कुछ लोगों ने अपने खाते बचत खातों में तब्दील करा लिए हैं। बैंकों ने इन खातों को चलाने में बहुत ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
किसान ऋण माफी:
राज्य सरकार की किसान ऋण मोचन योजना के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में 97 हजार सिकानों का 510 करोड़ रुपये का लोन माफ किया गया। मगर, 35 हजार से ज्यादा किसानों के ऋण माफ नहीं हो पाए। सरकार ने बाद में भी बचे किसानों के आवेदन लिए। मगर, यह आवेदन जांच के लिए इधर से उधर घूम रहे हैं। इन किसानों की ऋण माफी नहीं हो पायी है।
केंद्र सरकार की जो योजनाएं बैंकों के माध्यम से चल रही हैं, उनके प्रचार-प्रसार के लिए बैंकों ने बड़े पैमाने पर कैंप भी लगाए। बैंक अब भी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। पब्लिक का रिस्पांस भी आ रहा है।
- ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर