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विवि में कर्मचारी की अवैध नियुक्ति, लाखों का भुगतान, फिर भी वित्त अधिकारी खामोश
Updated Wed, 14 Nov 2018 11:27 PM IST
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एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में वित्तीय गड़बड़ियों के मामले में लोक लेखा समिति की जांच के दौरान एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। अधिकारियों ने राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) में मानदेय पर अवैध रूप से एक कर्मचारी की नियुक्ति कर ुसे लाखों का भुगतान करा दिया। ऑडिट आपत्ति के बाद यह मामला खुला तो अब आनन- फानन में एक समिति बनाकर रिकवरी का आदेश दिया गया है।
विश्वविद्यालय के एनएसएस विभाग में इस कर्मचारी की नियुक्ति बगैर किसी आदेश के की गई थी। अधिकारियों की मेहरबानी से वह कई साल तक विभाग से वेतन लेता रहा। कई बार शिकायतें हुईं लेकिन अधिकारियों ने अनसुनी कर दी। ऑडिट आपत्ति में कहा गया है कि एनएसएस में शासनादेश के बगैर नियुक्ति नहीं हो सकती। विभाग में पहले ही पूर्णकालिक लिपिक तैनात है। आडिट आपत्ति के बाद रिकवरी के डर से कर्मचारी नौकरी छोड़कर भाग गया। कुलपति ने प्रो. बृजेश त्रिपाठी, वित्त अधिकारी और डॉ. सोमपाल सिंह समन्वयक को जांच सौंपी। कर्मचारी से रिकवरी के आदेश किए हुए हैं। इस संबंध में वित्त अधिकारी सुरेश उपाध्याय से बात करनी चाहिए तो वह चुप्पी साध गए। विश्वविद्यालय ने कर्मचारी से रिकवरी के आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन यह जांच नहीं की जा रही कि उसकी फर्जी नियुक्ति आखिर कराई किसने।
पीएसी ने अब 19 नवंबर को तलब किया
विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं की जांच लोक लेखा समिति कर रही है। तीन दिन पूर्व ही वित्त अधिकारी और कुलसचिव को लखनऊ तलब किया था। विश्वविद्यालय पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाया। अब समिति ने और रिकॉर्ड मांगे हैं। इसमें भी कई गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं। अब समिति ने 19 नवंबर को अधिकारियों को लखनऊ तलब किया है।
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विश्वविद्यालय के एनएसएस विभाग में इस कर्मचारी की नियुक्ति बगैर किसी आदेश के की गई थी। अधिकारियों की मेहरबानी से वह कई साल तक विभाग से वेतन लेता रहा। कई बार शिकायतें हुईं लेकिन अधिकारियों ने अनसुनी कर दी। ऑडिट आपत्ति में कहा गया है कि एनएसएस में शासनादेश के बगैर नियुक्ति नहीं हो सकती। विभाग में पहले ही पूर्णकालिक लिपिक तैनात है। आडिट आपत्ति के बाद रिकवरी के डर से कर्मचारी नौकरी छोड़कर भाग गया। कुलपति ने प्रो. बृजेश त्रिपाठी, वित्त अधिकारी और डॉ. सोमपाल सिंह समन्वयक को जांच सौंपी। कर्मचारी से रिकवरी के आदेश किए हुए हैं। इस संबंध में वित्त अधिकारी सुरेश उपाध्याय से बात करनी चाहिए तो वह चुप्पी साध गए। विश्वविद्यालय ने कर्मचारी से रिकवरी के आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन यह जांच नहीं की जा रही कि उसकी फर्जी नियुक्ति आखिर कराई किसने।
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पीएसी ने अब 19 नवंबर को तलब किया
विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं की जांच लोक लेखा समिति कर रही है। तीन दिन पूर्व ही वित्त अधिकारी और कुलसचिव को लखनऊ तलब किया था। विश्वविद्यालय पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाया। अब समिति ने और रिकॉर्ड मांगे हैं। इसमें भी कई गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं। अब समिति ने 19 नवंबर को अधिकारियों को लखनऊ तलब किया है।
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