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2010 दंगे : मौलाना से वापस ले लिए सभी आरोप, बार एसोसिएशन हो गया था दो फाड़

Tue, 30 Sep 2025 12:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 30 Sep 2025 12:56 AM IST
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2010 riots: All charges against Maulana withdrawn, Bar Association split
बरेली। बसपा और फिर सपा सरकार में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा का रसूख बुलंदी पर रहा। सपा सरकार में उसे लालबत्ती से भी नवाजा गया था। वर्ष 2010 के दंगों के आरोप में मौलाना को पहली बार जेल भेजा गया तो बसपा सरकार ने रातों-रात सीआरपीसी की धारा 169 के तहत उससे सभी आरोप वापस ले लिए। दो दिन में ही उसे जमानत मिल गई थी। बार एसोसिएशन ने भी इसका विरोध किया था। बार एसोसिएशन ने आईएमसी पर पाबंदी लगाने की मांग भी उठाई थी। उस समय मौलाना के मामले में एसोसिएशन दो फाड़ हो गया था।
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अमर उजाला में प्रकाशित 2010 के दंगों और मौलाना की जमानत संबंधी खबरें काफी कुछ बयां कर रही हैं। आईजी सिक्योरिटी आरपी सिंह की रिपोर्ट पर मौलाना को जेल भेजा गया था, लेकिन उसके वकीलों ने शहर में कर्फ्यू के बावजूद अगले ही दिन उसकी जमानत अर्जी दाखिल कर दी थी। सुनवाई के बाद सीजेएम ने अर्जी खारिज कर दी। 10 मार्च 2010 को अपर सत्र न्यायालय में सुनवाई से पहले बसपा सरकार ने मौलाना से सभी आरोप वापस ले लिए। धारा 153ए को भी हटा दिया गया था। मौलाना के वकीलों ने तर्क दिया था कि उसका नाम एफआईआर में नहीं है। इस पर कोर्ट ने उसकी जमानत मंजूर कर ली थी। कर्फ्यू के बावजूद सभी अदालती और पुलिस के काम काफी तेजी से हुए। 11 मार्च 2010 को मौलाना को रिहा कर दिया गया।
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मौलाना ने जेल से बाहर आने के बाद विवादित बयान देकर फिर हिंसा भड़का दी थी। उपद्रवियों ने कई निजी और सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया था। पुलिस पर पथराव और फायरिंग भी की गई थी। ऐसे में डीजीपी ने दंगाग्रस्त इलाकों में हेलिकॉप्टर से निगरानी शुरू कराई, लेकिन इसके बावजूद शहर कई दिनों तक धधकता रहा था। इस दंगे के दौरान 150 साल की परंपरा टूटी थी। वर्ष 2010 में होली पर निकलने वाली राम बरात नहीं निकली थी।
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मस्जिदों से ऐलान होने पर सड़कों पर आ गई थी भीड़

दो मार्च 2010 को दंगे के बाद पुलिस-प्रशासन ने 10 मार्च को कर्फ्यू में कुछ ढील दी थी। इससे पहले नौ मार्च को अदालत ने मौलाना की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। 10 मार्च 2010 को इसके विरोध में मस्जिदों से ऐलान कर लोगों से सड़कों पर आने का आह्वान किया गया था। इस दौरान शहर में कई स्थानों पर हिंसक झड़पें हुई थीं। उपद्रवियों ने कई बंद दुकानों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। संवाद
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