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आज से माह भर तक वैवाहिक आयोजनों पर ग्रहण, खरमास प्रारंभ
Sun, 16 Dec 2018 01:43 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sun, 16 Dec 2018 01:43 AM IST
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बरेली। सात दिनों से गूंज रही शहनाइयों की धुन रविवार सुबह नौ बजे से एक माह के लिए बंद हो जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, सूर्यदेव के गुरु की राशि धनु में प्रवेश करते ही खरमास प्रारंभ हो जाएगा। शास्त्रानुसार जब सूर्य, गुरु की राशि धनु या मीन में विराजमान रहते हैं, तो उस मास को ‘खरमास’ कहते हैं।
खरमास के दौरान मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं। यह अवधि 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगी। 15 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद फिर से मांगलिक कार्य आरंभ हो सकेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. अनुराग शंखधार ने बताया कि अबकी बार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की नवमी को सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहा है, लेकिन सूर्य का प्रभाव होने से योगों की शुभता निम्न रहेगी। 16 दिसंबर को सुबह नौ बजे सूर्य, गुरु की धनु राशि में प्रवेश करेंगे।
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धनु राशि में पहुंचकर वह वहां पहले से मौजूद अपने पुत्र शनि के साथ युति बनाएंगे। दोनों पिता-पुत्र एक साथ धनु राशि में 30 दिन तक रहेंगे। खरमास में सूर्यदेव के रथ की गति धीमी होगी। ऐसे में सर्दी अधिक पड़ने के आसार हैं।
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खरमास के दौरान मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं। यह अवधि 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगी। 15 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद फिर से मांगलिक कार्य आरंभ हो सकेंगे।
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ज्योतिषाचार्य पं. अनुराग शंखधार ने बताया कि अबकी बार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की नवमी को सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहा है, लेकिन सूर्य का प्रभाव होने से योगों की शुभता निम्न रहेगी। 16 दिसंबर को सुबह नौ बजे सूर्य, गुरु की धनु राशि में प्रवेश करेंगे।
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धनु राशि में पहुंचकर वह वहां पहले से मौजूद अपने पुत्र शनि के साथ युति बनाएंगे। दोनों पिता-पुत्र एक साथ धनु राशि में 30 दिन तक रहेंगे। खरमास में सूर्यदेव के रथ की गति धीमी होगी। ऐसे में सर्दी अधिक पड़ने के आसार हैं।
क्यों कहा जाता है खरमास
लोककथा के अनुसार ब्रह्मांड की लगातार परिक्रमा करते-करते जब अपने रथ में जुते सातों घोड़े थक गए और उन्हें प्यास लगी तो उनकी दशा देखकर सूर्यदेव को उन पर दया आ गई, लेकिन सोचा यदि घोड़ों को विश्राम देते हैं तो संसार की गति का क्या होगा, तभी उन्हें गधे दिखाई दिए।
उन्होंने घोड़ों को एक माह के लिए तालाब पर छोड़कर अपने रथ में गधों को जोत लिया, इसलिए इस मास को ‘खर’ मास कहते हैं। मान्यता है कि इस माह में प्राण त्यागने से नरक मिलता है, इसीलिए भीष्म पितामह ने बाणों की शैया पर एक माह तक सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था।
राशियों पर प्रभाव
मेष - व्यर्थ के विवाद से बचें।
वृषभ - निवेश से सर्वोत्तम लाभ होगा।
मिथुन - कार्य में जल्दबाजी न करें।
कर्क - आर्थिक परेशानी रहेगी।
सिंह - अचल संपत्ति से लाभ।
कन्या - प्रभाव बढ़ने से शत्रु शांत।
तुला - शुभ कार्यों पर खर्च।
वृश्चिक - लंबी दूरी की यात्रा।
धनु - खर्चों पर काबू रखें।
मकर - सेहत का ध्यान रखें।
कुंभ - काम का दबाव बढ़ेगा।
मीन - धर्म/कर्म में रुचि बढ़ेगी।
उन्होंने घोड़ों को एक माह के लिए तालाब पर छोड़कर अपने रथ में गधों को जोत लिया, इसलिए इस मास को ‘खर’ मास कहते हैं। मान्यता है कि इस माह में प्राण त्यागने से नरक मिलता है, इसीलिए भीष्म पितामह ने बाणों की शैया पर एक माह तक सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था।
राशियों पर प्रभाव
मेष - व्यर्थ के विवाद से बचें।
वृषभ - निवेश से सर्वोत्तम लाभ होगा।
मिथुन - कार्य में जल्दबाजी न करें।
कर्क - आर्थिक परेशानी रहेगी।
सिंह - अचल संपत्ति से लाभ।
कन्या - प्रभाव बढ़ने से शत्रु शांत।
तुला - शुभ कार्यों पर खर्च।
वृश्चिक - लंबी दूरी की यात्रा।
धनु - खर्चों पर काबू रखें।
मकर - सेहत का ध्यान रखें।
कुंभ - काम का दबाव बढ़ेगा।
मीन - धर्म/कर्म में रुचि बढ़ेगी।