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भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ तथ्यों को छिपाने की शिकायत खारिज
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बदायूं। कैबिनेट मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री स्वामीप्रसाद मौर्य की बेटी भाजपा प्रत्याशी संघमित्रा मौर्य पर नामांकन पत्र में कई महत्वपूर्ण तत्थों को छिपाने का आरोप लगाते हुए अंबेडकर जनक्राति दल से पर्चा भरने वाले दिनेश कुुमार ने शुक्रवार को डीईओ/आरओ को पत्र देकर आपत्ति दर्ज कराई, साथ ही भाजपा प्रत्याशी के नामांकन को निरस्त करने की मांग की। हालांकि बाद में आरओ ने इसे खारिज कर दिया।
दिनेश कुमार ने कहा कि भाजपा प्रत्याशी ने पर्चा दाखिल करने के दौरान दिए गए हलफनामे में अपनी शादी की बात को जानबूझकर छिपाया है। विवाहिता होने के बाद भी उन्होंने अपने नामांकन पत्र में पिता का नाम दर्शाया है जबकि इस सूचना का संबंध उनकी संपत्ति और दायित्वों से जुड़ा हुआ है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि भाजपा प्रत्याशी के पति नवल किशोर शाक्य किसी भी विधि के अनुपालन में उनसे अलग नहीं हुए हैं और इस प्रकार कानून की दृष्टि में वह अब भी पति-पत्नी ही हैं। इस संबंध में दिनेश ने आरओ दिनेश कुमार सिंह के समक्ष कुछ कागजात भी पेश किए, लेकिन उनकी शिकायत को आरओ ने खारिज कर दिया। आरओ ने बताया कि चुनाव आयोग की गाइड लाइन के मुताबिक शपथ पत्र को पूरा भरना आवश्यक है, लेकिन उसमें प्रत्याशी ने क्या भरा है और क्या नहीं, इसकी जांच करने का अधिकार आरओ को नहीं है और इस आधार पर नामांकन पत्र खारिज नहीं किया जा सकता। इधर शिकायतकर्ता का कहना है कि इस आदेश के खिलाफ वह अब हाईकोर्ट में जाएंगे।
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दिनेश कुमार ने कहा कि भाजपा प्रत्याशी ने पर्चा दाखिल करने के दौरान दिए गए हलफनामे में अपनी शादी की बात को जानबूझकर छिपाया है। विवाहिता होने के बाद भी उन्होंने अपने नामांकन पत्र में पिता का नाम दर्शाया है जबकि इस सूचना का संबंध उनकी संपत्ति और दायित्वों से जुड़ा हुआ है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि भाजपा प्रत्याशी के पति नवल किशोर शाक्य किसी भी विधि के अनुपालन में उनसे अलग नहीं हुए हैं और इस प्रकार कानून की दृष्टि में वह अब भी पति-पत्नी ही हैं। इस संबंध में दिनेश ने आरओ दिनेश कुमार सिंह के समक्ष कुछ कागजात भी पेश किए, लेकिन उनकी शिकायत को आरओ ने खारिज कर दिया। आरओ ने बताया कि चुनाव आयोग की गाइड लाइन के मुताबिक शपथ पत्र को पूरा भरना आवश्यक है, लेकिन उसमें प्रत्याशी ने क्या भरा है और क्या नहीं, इसकी जांच करने का अधिकार आरओ को नहीं है और इस आधार पर नामांकन पत्र खारिज नहीं किया जा सकता। इधर शिकायतकर्ता का कहना है कि इस आदेश के खिलाफ वह अब हाईकोर्ट में जाएंगे।
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