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मुस्लिम विद्वान भी शादी के पंजीकरण के पक्ष में
Updated Wed, 14 Jun 2017 06:11 PM IST
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बरेली।
मुस्लिमों को शादी के पंजीकरण पर बरेलवी मुस्लिम विद्वानों को कोई एतराज नहीं है । उनका मानना है है निकाहनामा शरई सनद है तो यह पंजीकरण एक कानूनी सनद भी हो जाएगी। हां इतना ध्यान रखना होगा कि ये आसान हो और शरीयत के खिलाफ न जाए।
सुन्नी बरेलवी मसलक के आलिम इमाम शाही जामा मस्जिद एवं शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम का कहना है कि शादी का पंजीकरण कराने में कोई शरई दिक्कत नहीं है। निकाह के बाद काजी निकाहनामा देता है वो शरई सनद है। जो पंजीकरण होगा वो कानूनी सनद होगी। इसमें कोई हर्ज नहीं है। अलबत्ता इस्लाम में चार शादियों तक की व्यवस्था है। पहली बीवी की इजाजत से कोई दूसरी शादी कर सकता। अगर मुस्लिम एक शादी के बाद दूसरा निकाह करता है और उसका भी पंजीकरण होता है तब ठीक ही है। यदि ऐसा नहीं है या एक से ज्यादा शादियों के पंजीकरण पर रोक होती है तो यह शरीयत में दखल होगा।
देवबंद मसलक के आलिम मदरसा काशीफुल उलूम के मुनतजिम एवं जिला जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद मियां कासमी ने कहा कि पंजीकरण में कोई हर्ज नहीं है, न ही इसमें कोई शरई अड़चन है। हां इतना जरूर है कि पंजीकरण के लिए जो भी नियम कानून बने उसकी प्रक्रिया सरल होनी चाहिए ताकि लोग परेशान न हों।
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इधर शिया मसलक के आलिम मौलाना हामिद अली जैदी लखनवी का कहना है कि निकाहनामा यूं तो हमारे मजहब के लिए है। इसके अलावा सरकारी तौर पर पंजीकरण के लिए कानून बनता है तो इसमें कोई हर्ज नहीं। इसके कुछ फायदे भी हो सकते हैं।
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मुस्लिमों को शादी के पंजीकरण पर बरेलवी मुस्लिम विद्वानों को कोई एतराज नहीं है । उनका मानना है है निकाहनामा शरई सनद है तो यह पंजीकरण एक कानूनी सनद भी हो जाएगी। हां इतना ध्यान रखना होगा कि ये आसान हो और शरीयत के खिलाफ न जाए।
सुन्नी बरेलवी मसलक के आलिम इमाम शाही जामा मस्जिद एवं शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम का कहना है कि शादी का पंजीकरण कराने में कोई शरई दिक्कत नहीं है। निकाह के बाद काजी निकाहनामा देता है वो शरई सनद है। जो पंजीकरण होगा वो कानूनी सनद होगी। इसमें कोई हर्ज नहीं है। अलबत्ता इस्लाम में चार शादियों तक की व्यवस्था है। पहली बीवी की इजाजत से कोई दूसरी शादी कर सकता। अगर मुस्लिम एक शादी के बाद दूसरा निकाह करता है और उसका भी पंजीकरण होता है तब ठीक ही है। यदि ऐसा नहीं है या एक से ज्यादा शादियों के पंजीकरण पर रोक होती है तो यह शरीयत में दखल होगा।
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देवबंद मसलक के आलिम मदरसा काशीफुल उलूम के मुनतजिम एवं जिला जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद मियां कासमी ने कहा कि पंजीकरण में कोई हर्ज नहीं है, न ही इसमें कोई शरई अड़चन है। हां इतना जरूर है कि पंजीकरण के लिए जो भी नियम कानून बने उसकी प्रक्रिया सरल होनी चाहिए ताकि लोग परेशान न हों।
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इधर शिया मसलक के आलिम मौलाना हामिद अली जैदी लखनवी का कहना है कि निकाहनामा यूं तो हमारे मजहब के लिए है। इसके अलावा सरकारी तौर पर पंजीकरण के लिए कानून बनता है तो इसमें कोई हर्ज नहीं। इसके कुछ फायदे भी हो सकते हैं।