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180 अवैध ईंट भट्ठों ने सांस लेना किया दूभर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Thu, 22 Feb 2018 07:29 PM IST
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जिले में अवैध ईंट भट्ठों के दिन पर दिन बढ़ते जा रहे बेतहाशा प्रदूषण ने आम लोगों का सांस लेना दूभर कर दिया है। आबादी के बीच में निर्धारित मानक के विरुद्ध लगे इन ईंट भट्ठों की चिमनी से निकलने वाले धुएं से ग्रामीण इलाकों की घनी आबादी में सांस, खांसी, दाद, खुजली जैसे रोग फैल रहे हैं। चिकित्सकों की मानें तो प्रदूषित धुएं से फेफड़े और किडनी पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बरेली की विभिन्न तहसीलों के ग्रामीण इलाकों में 234 ईंट भट्ठे चल रहे हैं। अगर इनमें निर्धारित मानकों के पालन की बात करें तो केवल 54 ही वैध हैं। बाकी 180 ईंट भट्ठा मालिकों ने न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी ली है, न ही उनको खनन करने की सरकारी परमीशन मिली है। ईंट भट्ठा मालिक खेतों से बिना परमीशन बेतहाशा खनन कर रहे हैं। भट्ठों की चिमनी से निकलने वाले धुएं से लोग दमा के मरीज बनते जा रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा बुरा असर हो रहा है। तमाम ईंट भट्ठों को पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र तक जारी नहीं किए गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को है। ईंट भट्ठों के खनन करने से खेती-किसानी भी चौपट हो रही है। खेत से मिट्टी निकालने से जमीन के पोषक तत्वों में लगातार कमी हो रही है। जमीन ऊसर होने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
खनन के दायरे में नहीं आते ईंट भट्ठा
प्रशासन की मानें तो बरेली में जितने भी ईंट भट्ठे चल रहे हैं, उनमें लाइसेंस धारक भट्ठों को भी खनन अधिकारी एनओसी नहीं देते क्योंकि ईंटें बनाने के लिए मिट्टी का खनन इसके दायरे में नहीं आता है। वर्तमान में ईंट भट्ठा मालिक समाधान योजना पर काम कर रहे हैं, इसके लिए अलग से खनन के लिए लाइसेंस जारी नहीं किया जाता।
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चिमनी के धुएं से तीन गुना बढ़ा प्रदूषण
पर्यावरणविद् डॉ. डीके सक्सेना का कहना है कि ईंट भट्ठों की चिमनी से निकलने वाले धुएं से आरएसपीएम, एसपीएम, पार्टीकुलेटमेटर, सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड भी लगातार तीन से चार गुना बढ़ रहा है। इससे न केवल वायु प्रदूषित हो रही है बल्कि जमीन में भी पोषकतत्व कम हो रहे हैं। प्रदूषित हवा से न केवल मानव बल्कि पशु पक्षियों में भी रोग पनप रहे हैं।
सांस, दमा और चर्म रोगी बढ़े
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य का कहना है कि धुएं से सबसे ज्यादा खतरा सांस और दमा रोगियों को है। लगातार धुएं में सांस लेने से फेफड़े खराब होने का डर रहता है। हार्ट को प्रॉब्लम हो सकती है। चिमनी के प्रदूषण से चर्म रोग फैलने का भी खतरा रहता है। जिस इलाके में ईंट भट्ठे होते हैं, वहां इस तरह के रोगी बढ़ जाते हैं।
आरटीआई से मांगी जानकारी
अनाधिकृत ईंट भट्ठों पर कार्रवाई के लिए अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट मोहम्मद खालिद जिलानी ने अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी। उसमें यह पता चला कि इतनी बड़ी संख्या में ईंट भट्ठे अवैध हैं जिनकी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य विभागों से एनओसी नहीं ली गई है। वह न्यायालय में अवैध ईंट भट्ठों को बंद कराने के लिए जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासन ने बंद कराया तिगरा का ईंट भट्ठा
बरेली। तिगरा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत किसी भी विभाग की एनओसी लिए बिना चालू हुआ भट्ठा प्रशासन ने बंद करा दिया। एसडीएम (सदर) अनुपम शुक्ला ने बताया कि जिस जगह ईंट भट्ठा लगाया गया है, वहां नियमानुसार लग ही नहीं सकता। ईंट भट्ठा लगाने में एनजीटी के मानकों का पालन नहीं किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भट्ठे का संचालन रोकने के लिए लिखा था, इसलिए प्रशासन ने पहले ईंट भट्ठे को सील किया। इसके बाद उसे बंद करा दिया गया। एसडीएम ने बताया कि प्रशासन के एक बार बंद कराने के बाद अगर भट्ठा चालू हुआ तो भट्ठा मालिक पर सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बरेली की विभिन्न तहसीलों के ग्रामीण इलाकों में 234 ईंट भट्ठे चल रहे हैं। अगर इनमें निर्धारित मानकों के पालन की बात करें तो केवल 54 ही वैध हैं। बाकी 180 ईंट भट्ठा मालिकों ने न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी ली है, न ही उनको खनन करने की सरकारी परमीशन मिली है। ईंट भट्ठा मालिक खेतों से बिना परमीशन बेतहाशा खनन कर रहे हैं। भट्ठों की चिमनी से निकलने वाले धुएं से लोग दमा के मरीज बनते जा रहे हैं। बच्चों के स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा बुरा असर हो रहा है। तमाम ईंट भट्ठों को पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र तक जारी नहीं किए गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को है। ईंट भट्ठों के खनन करने से खेती-किसानी भी चौपट हो रही है। खेत से मिट्टी निकालने से जमीन के पोषक तत्वों में लगातार कमी हो रही है। जमीन ऊसर होने का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
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खनन के दायरे में नहीं आते ईंट भट्ठा
प्रशासन की मानें तो बरेली में जितने भी ईंट भट्ठे चल रहे हैं, उनमें लाइसेंस धारक भट्ठों को भी खनन अधिकारी एनओसी नहीं देते क्योंकि ईंटें बनाने के लिए मिट्टी का खनन इसके दायरे में नहीं आता है। वर्तमान में ईंट भट्ठा मालिक समाधान योजना पर काम कर रहे हैं, इसके लिए अलग से खनन के लिए लाइसेंस जारी नहीं किया जाता।
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चिमनी के धुएं से तीन गुना बढ़ा प्रदूषण
पर्यावरणविद् डॉ. डीके सक्सेना का कहना है कि ईंट भट्ठों की चिमनी से निकलने वाले धुएं से आरएसपीएम, एसपीएम, पार्टीकुलेटमेटर, सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड भी लगातार तीन से चार गुना बढ़ रहा है। इससे न केवल वायु प्रदूषित हो रही है बल्कि जमीन में भी पोषकतत्व कम हो रहे हैं। प्रदूषित हवा से न केवल मानव बल्कि पशु पक्षियों में भी रोग पनप रहे हैं।
सांस, दमा और चर्म रोगी बढ़े
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य का कहना है कि धुएं से सबसे ज्यादा खतरा सांस और दमा रोगियों को है। लगातार धुएं में सांस लेने से फेफड़े खराब होने का डर रहता है। हार्ट को प्रॉब्लम हो सकती है। चिमनी के प्रदूषण से चर्म रोग फैलने का भी खतरा रहता है। जिस इलाके में ईंट भट्ठे होते हैं, वहां इस तरह के रोगी बढ़ जाते हैं।
आरटीआई से मांगी जानकारी
अनाधिकृत ईंट भट्ठों पर कार्रवाई के लिए अधिवक्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट मोहम्मद खालिद जिलानी ने अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी। उसमें यह पता चला कि इतनी बड़ी संख्या में ईंट भट्ठे अवैध हैं जिनकी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत अन्य विभागों से एनओसी नहीं ली गई है। वह न्यायालय में अवैध ईंट भट्ठों को बंद कराने के लिए जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासन ने बंद कराया तिगरा का ईंट भट्ठा
बरेली। तिगरा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत किसी भी विभाग की एनओसी लिए बिना चालू हुआ भट्ठा प्रशासन ने बंद करा दिया। एसडीएम (सदर) अनुपम शुक्ला ने बताया कि जिस जगह ईंट भट्ठा लगाया गया है, वहां नियमानुसार लग ही नहीं सकता। ईंट भट्ठा लगाने में एनजीटी के मानकों का पालन नहीं किया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भट्ठे का संचालन रोकने के लिए लिखा था, इसलिए प्रशासन ने पहले ईंट भट्ठे को सील किया। इसके बाद उसे बंद करा दिया गया। एसडीएम ने बताया कि प्रशासन के एक बार बंद कराने के बाद अगर भट्ठा चालू हुआ तो भट्ठा मालिक पर सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी जाएगी।