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किसानों को भा गया 18 फुट लंबा गन्ना

Fri, 11 Nov 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Fri, 11 Nov 2016 12:59 AM IST
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गन्ने की ‘को- 0238’ प्रजाति बरेली के किसानों को खूब रास आ रही है। सामान्य गन्ने की ऊंचाई आमतौर पर आठ से नौ फीट तक होती है लेकिन यह गन्ना 18 फुट तक विस्तार पाता है। नतीजतन, इसका वजन ज्यादा होता है, इसलिए किसानों को यह इतना भाया है कि जिले में मानक से अधिक इस प्रजाति का उत्पादन होने लगा है। किसी भी जिले में गन्ने की कोई एक प्रजाति का रकबा 25 फीसदी से अधिक न होने का मानक है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि उस प्रजाति में कोई बीमारी लगे तो कृषकों का ज्यादा नुकसान न हो लेकिन बरेली में किसानों को यह नई प्रजाति इतनी भा गई है कि रकबा 38 फीसदी से भी ज्यादा हो गया है। जिले में यह गन्ना इस सीजन में 78646 हेक्टेयर रकबे में बोया जा चुका है। अच्छी बात यह है कि अभी तक इस प्रजाति में कोई बीमारी सामने नहीं आई है लेकिन बहुतायत में पैदावार होने से विशेषज्ञों में आशंका बनी हुई है इसलिए वे कृषकों को ट्रेंच विधि से इस गन्ने को खेत में बोने की सलाह दे रहे हैं। ट्रेंच विधि में गन्ने की प्रत्येक पौध को एक निर्धारित दूरी पर लगाया जाता है, इससे बीमारी तथा कीट लगने से आसानी से स्प्रे किया जा सकता है, साथ ही जमीन को पर्याप्त धूप लगने से फफूंदीजनित बीमारी नहीं हो पाती। जड़ों का भी पूरी तरह से विकास होता है और मिट्टी चढ़ने से ज्यादा लंबाई होने से गन्ने के गिरने की समस्या भी नहीं रहती।
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18 फुट लंबा होने की वजह से कृषकों को इस प्रजाति के 10 से 12 गन्ने को समूह में तीन स्थानों पर बंध लगाना पड़ता है। सल्थापल्था गांव के सत्यवीर सिंह और कुम्हरा गांव के रामसेवक ने अपने-अपने 10-10 हेक्टेयर में यह गन्ना बो रखा है। सत्यवीर बताते हैं कि उम्मीद नहीं थी कि यह गन्ना इतना बड़ा होगा, जब बोया तो यकीन हुआ। वह बताते हैं कि यह अरली गन्ना काफी नरम भी होता है। जिला गन्ना अधिकारी शैलेश कुमार मौर्य बताते हैं कि दो साल पहले जब यह प्रजाति नई-नई आई थी तो कृषकों को बड़ी मुश्किल से इसको बोने के लिए प्रेरित कर पाए थे। कुछ किसानों को उदाहरण के रूप में पेश करके पिछले साल 10 फीसदी रकबे में इसकी बुवाई कराने में कामयाबी मिली, और अब तो स्थिति यह है कि कृषक इस गन्ने के अलावा दूसरी प्रजाति नहीं करना चाहते।
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करनाल में विकसित हुई प्रजाति
जिला गन्ना अधिकारी बताते हैं कि ‘को-0238’ प्रजाति का यह गन्ना करनाल के गन्ना शोध संस्थान में विकसित हुआ। इसको वैज्ञानिक बख्शीराम ने विकसित किया है इसलिए किसान आम बोलचाल में बख्शी गन्ना के नाम से भी जानते हैं। 18 फुट लंबाई के साथ इसमें प्रति हेक्टेयर पैदावार एक हजार क्विंटल से लेकर 2700 क्विंटल होती है। सामान्य गन्ने से जहां एक क्विंटल गन्ने में आठ किलो चीनी बनती है वहीं इस प्रजाति में प्रति क्विंटल 11 किलो चीनी का उत्पादन होता है। 
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