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शीरान जायदाद से बेदखल नहीं, बस गुजारा भत्ता नहीं देना चाहते
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बरेली। शीरान की ओर से गुजारा भत्ता माफ करने की गुहार लगाने के बाद मंगलवार को निदा ने जवाब दाखिल किया। इसमें उन्होंने कहा कि शीरान गुजारा भत्ता नहीं देना चाहते हैं। वह आज भी अपने परिवार के साथ है। घरवालों ने उन्हें जायदाद से बेदखल नहीं किया है। शीरान की तरफ से कोर्ट में दाखिल की अर्जी में भी वही पता है जो पहले था।
मामला एफटीसी प्रथम अजय सिंह की अदालत में है। निदा ने अपने वकील हुमैर खान के जरिए दाखिल जवाब में कहा, शीरान की ओर से यह भी कहा गया कि निदा कंप्यूटर की जानकार हैं और ब्यूटीशियन का कोर्स कर रखा है। वहीं, सच्चाई यह है कि उनकी आय का कोई साधन ही नहीं है। वह अदालत के निर्धारित गुजारा भत्ता पर ही आश्रित हैं। निदा ने अपने जवाब में कहा कि शादी के बाद से ही उसके ससुरालवालों का व्यवहार ठीक नहीं रहा। दहेज में उससे डस्टर कार मांगी गई। असमर्थता जताने पर नौकरानियां हटाकर घर का सारा काम उनसे कराया जाने लगा। भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था। ससुरालवालोें के विरोध की वजह से उन्होंने एमकॉम की परीक्षा भी छोड़ दी। वह गर्भवती हुईं तो फिर कार का दबाव डालना शुरू कर दिया। कुछ दिन बाद मारपीटकर घर से निकाल दिया। मारपीट की वजह से उनका गर्भपात हो गया। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 6 मई की तारीख तय की है।
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मामला एफटीसी प्रथम अजय सिंह की अदालत में है। निदा ने अपने वकील हुमैर खान के जरिए दाखिल जवाब में कहा, शीरान की ओर से यह भी कहा गया कि निदा कंप्यूटर की जानकार हैं और ब्यूटीशियन का कोर्स कर रखा है। वहीं, सच्चाई यह है कि उनकी आय का कोई साधन ही नहीं है। वह अदालत के निर्धारित गुजारा भत्ता पर ही आश्रित हैं। निदा ने अपने जवाब में कहा कि शादी के बाद से ही उसके ससुरालवालों का व्यवहार ठीक नहीं रहा। दहेज में उससे डस्टर कार मांगी गई। असमर्थता जताने पर नौकरानियां हटाकर घर का सारा काम उनसे कराया जाने लगा। भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था। ससुरालवालोें के विरोध की वजह से उन्होंने एमकॉम की परीक्षा भी छोड़ दी। वह गर्भवती हुईं तो फिर कार का दबाव डालना शुरू कर दिया। कुछ दिन बाद मारपीटकर घर से निकाल दिया। मारपीट की वजह से उनका गर्भपात हो गया। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 6 मई की तारीख तय की है।
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