फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   440 स्कूल बसें सड़कों पर, आग बुझाने के यंत्र किसी में नहीं

440 स्कूल बसें सड़कों पर, आग बुझाने के यंत्र किसी में नहीं

Fri, 22 Feb 2019 12:44 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Fri, 22 Feb 2019 12:44 AM IST
विज्ञापन
440 स्कूल बसें सड़कों पर, आग बुझाने के यंत्र किसी में नहीं
बरेली। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार जिले भर में 440 स्कूल बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। स्कूल टाइम में बच्चे लाने ले जाने के अलावा विभिन्न मार्गों पर डग्गामारी भी करती हैं। इसकी जानकारी पुलिस और परिवहन विभाग भी रखता है लेकिन सफेदपोशों के प्रभाव में सड़कों पर कहीं न कहीं ‘मौत’ दौड़ती रहती है। नेशनल हाईवे पर यह पहला मौका नहीं है, जब स्कूल बस का हादसा हुआ हो। इससे पहले एक अन्य कॉलेज की बस खाई में पलट चुकी है, मगर स्कूल प्रबंधन आंखें मूंदे बैठा है।
विज्ञापन

स्कूलों से संबद्ध ज्यादातर बसों के मानक आधे अधूरे हैं। पायदान हो या खिड़कियां, एक भी मानक पूरा नहीं है। नियमानुसार खिड़कियों पर शीशे के साथ जाली भी लगना चाहिए और पायदान फोल्डिंग वाला हो जो उतरते-चढ़ते समय जमीन से छह इंच ऊपर रहे। हर बस में अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता के साथ-साथ इसको चलाने की ट्रेनिंग भी कंडक्टर और ड्राइवर को देना जरूरी है लेकिन शायद ही कोई बस स्टाफ हो जिसे इसकी जानकारी हो। आधे से ज्यादा बस ड्राइवरों के पास हैवी पब्लिक व्हीकल चलाने के लाइसेंस भी नहीं हैं। ड्राइवर यातायात नियमों से भी परिचित नहीं होते। यही वजह है कि बच्चों को कहीं भी चढ़ाने-उतारने में लग जाते हैं। ड्राइवर की लापरवाही से लोटस कॉलेज की बस दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बची। बस में बैठे 45 स्कूली बच्चों में से ज्यादातर ने कूदकर जान बचायी। हादसा होने की स्थिति में किससे मदद मांगी जाए और किसे फोन किया जाए, इसकी सूची भी किसी भी बसों में नहीं लगी है।
विज्ञापन


लाइसेंस होगा रद
परिवहन विभाग बस हादसे के बाद जागा है। उसने कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ ड्राइवर कंडक्टर के लाइसेंस भी रद करने का फैसला किया है। साथ ही, बस का परमिट और रजिस्ट्रेशन रद करने को कहा है। इसके लिए बस मालिक को नोटिस दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


चलेगा अभियान
कृष्णा पब्लिक स्कूल के बाद अब फोकस स्कूल बस हादसा हुआ है। परिवहन विभाग ने जिले भर में संयुक्त चेकिंग अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत स्कूल से संबंधित बस, थ्री व्हीलर, ऑटो और अन्य वाहनों की भी चेकिंग होगी।

हर वर्ष होती है चेकिंग
आरटीओ के आंकड़ों के अनुसार जिले में 440 स्कूल बसों का रजिस्ट्रेशन है। प्रत्येक वर्ष जुलाई से अगस्त तक (दो माह) अभियान चलाकर वाहनों की जांच होती है। बताया कि पिदले वर्ष जांच की गई तो सभी वाहनों का फिटनेस सही मिला। आवश्यक उपकरण भी लगे पाए गए। इसके बाद ही उन्हेें ‘ओके’ रिपोर्ट दी गई।


सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार स्कूल बस में क्या हो
- बस का रंग पीला हो और उसमें स्कूल का स्टाफ हो।
- स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर लिखा हो।
- बस 15 वर्ष से ज्यादा पुरानी न हो, फर्स्ट एड बॉक्स हो।
- स्कूल और रूट संबंधी पूरी जानकारी लिखी हो।
- बस की बॉडी स्टील की और उसमेें फुट स्टेप हो।
- खिड़की से बाहर शरीर का कोई अंग न निकले।
- आपातकालीन निकास द्वार और फिटनेस सर्टिफिकेट हो।
- बस के चालक व परिचालक के पास पहचान पत्र हो।
- रफ्तार 40 और 60 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा न हो।
- बस का फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य है।
- शहर में रफ्तार 15 से 20 किलोमीटर तक मान्य।

परिवहन कार्यालय में दर्ज सभी स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच के बाद ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। अभियान चलाकर वाहनों की चेकिंग भी की जाती है। कोई खामी मिलने पर कार्रवाई भी हो रही है। - उदयवीर सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed