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अब एमए उर्दू फाइनल, गलत पेपर कांबिनेशन ने बर्बाद किया कई छात्रों का साल
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बरेली। बीकॉम की तरह ही पेपर कांबिनेशन की गड़बड़ी के चलते एमए उर्दू फाइनल में भी कई छात्र फेल हो गए हैं। अब तक छात्रों की संख्या तो सामने नहीं आई है, लेकिन इस गड़बड़ी के लिए विश्वविद्यालय को जिम्मेदार माना जा रहा है। एक पेपर में फेल होने वाले छात्रों को तो इंप्रूवमेंट का मौका मिल जाएगा लेकिन जो दो विषय में फेल होंगे, उनका साल बर्बाद होना तय है। सिस्टम की इस चूक के चलते बी कॉम फाइनल ईयर के करीब एक हजार से ज्यादा छात्रों का साल बर्बाद हो चुका है। लेकिन विश्वविद्यालय इस खामी को सही नहीं कर रहा। ये दिक्कत कई सालों से हो रही है। छात्र-छात्राएं परीक्षा से पहले इसकी शिकायत भी करते हैं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जाता है।
ये है खामी
एमए उर्दू में आठ पेपर होते हैं, जिसमें चार पेपर फर्स्ट ईयर में और चार पेपर फाइनल ईयर में चयनित करने होते हैं। अब तक ऐसा कोई सिस्टम तैयार नहीं हो सका है, जिसमें ये तय हो सके कि कौन से पेपर फर्स्ट ईयर में लेने हैं और कौन से फाइनल में। इसके चलते दोनों ही साल का परीक्षा फार्म भरने के दौरान सभी पेपर के विकल्प खुलकर सामने आ जाते हैं। जानकारी के अभाव में तमाम छात्र फाइनल ईयर में भी वही पेपर चयनित कर लेते हैं, जो उन्होंने पहले साल में पढ़े हैं। इस तरह पेपर कांबिनेशन गलत होने पर विश्वविद्यालय उन्हें अनुपस्थित मान लेता है। इसमें जिन छात्रों ने सिर्फ एक पेपर ही दोबारा भरा होता है तो उन्हें इंप्रूवमेंट परीक्षा देकर पास होने का मौका मिल जाता है। मगर जिनके दो या उससे ज्यादा पेपर फर्स्ट ईयर वाले ही होते हैं, उनका साल बर्बाद हो जाता है।
कई साल से गड़बड़ी, फिर भी नहीं ध्यान
छात्रनेता इमरान अंसारी का कहना है कि यह गड़बड़ी पिछले कई सालों से चल रही है। परीक्षा शुरू होने से पहले ही उन्होंने कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल को ज्ञापन देकर इसमें सुधार कराने की मांग की थी। इस पर कुलपति ने परीक्षा विभाग के कर्मचारियों को बुलाकर सुधार करने को भी कहा था लेकिन कर्मचारियों ने ध्यान नहीं दिया। इसका खामियाजा एमए फाइनल उर्दू के कई छात्रों को फेल होकर भुगतना पड़ा है।
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ये है खामी
एमए उर्दू में आठ पेपर होते हैं, जिसमें चार पेपर फर्स्ट ईयर में और चार पेपर फाइनल ईयर में चयनित करने होते हैं। अब तक ऐसा कोई सिस्टम तैयार नहीं हो सका है, जिसमें ये तय हो सके कि कौन से पेपर फर्स्ट ईयर में लेने हैं और कौन से फाइनल में। इसके चलते दोनों ही साल का परीक्षा फार्म भरने के दौरान सभी पेपर के विकल्प खुलकर सामने आ जाते हैं। जानकारी के अभाव में तमाम छात्र फाइनल ईयर में भी वही पेपर चयनित कर लेते हैं, जो उन्होंने पहले साल में पढ़े हैं। इस तरह पेपर कांबिनेशन गलत होने पर विश्वविद्यालय उन्हें अनुपस्थित मान लेता है। इसमें जिन छात्रों ने सिर्फ एक पेपर ही दोबारा भरा होता है तो उन्हें इंप्रूवमेंट परीक्षा देकर पास होने का मौका मिल जाता है। मगर जिनके दो या उससे ज्यादा पेपर फर्स्ट ईयर वाले ही होते हैं, उनका साल बर्बाद हो जाता है।
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कई साल से गड़बड़ी, फिर भी नहीं ध्यान
छात्रनेता इमरान अंसारी का कहना है कि यह गड़बड़ी पिछले कई सालों से चल रही है। परीक्षा शुरू होने से पहले ही उन्होंने कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल को ज्ञापन देकर इसमें सुधार कराने की मांग की थी। इस पर कुलपति ने परीक्षा विभाग के कर्मचारियों को बुलाकर सुधार करने को भी कहा था लेकिन कर्मचारियों ने ध्यान नहीं दिया। इसका खामियाजा एमए फाइनल उर्दू के कई छात्रों को फेल होकर भुगतना पड़ा है।
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