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13 हजार किसान अब भी कर्ज माफी की आस में

Fri, 06 Jul 2018 12:42 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Fri, 06 Jul 2018 12:42 AM IST
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13 k farmers still waiting for loan waiver
loan
जिले के करीब 13 हजार किसान अभी कर्ज माफी की आस लगाए बैठे हैं। इसमें दस हजार किसान ऐसे हैं जिनके आवेदन पर शासन ने आपत्ति लगा रखी है। इन आवेदनों का अब दोबारा से सत्यापन होगा। शासन के फिर से शुरू किए गए पोर्टल पर जिले के 3178 और किसानों ने कर्ज माफी के लिए आवेदन किया है। इन आवेदनों की जांच भी शुरू कर दी गई है।
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विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का वायदा किया था। योगी सरकार बनने के बाद किसानों के एक लाख रुपये तक का ऋण माफ करने का एलान किया गया। ऋण मोचन योजना के तहत प्रदेश के हर जिले में कैंप लगाकर किसानों को कर्ज माफी के प्रमाण पत्र बांटे गए। पहली सूची में जिले के एक लाख 30 हजार 297 किसानों ने कर्जमाफी के लिए आवेदन किया था। इनमें 95130 किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया गया।
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इसके बाद भी जिले के हजारों किसान योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए। किसानों ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। यह मामला शासन स्तर पर पहुंचा। इसके बाद शासन ने दोबारा ऋण मोचन की प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू की। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत कुल 37268 किसानों ने आवेदन किया। आवेदनों के सत्यापन के बाद में 13347 किसानों को पात्र श्रेेणी में रखा गया और उनके आवेदन शासन को भेज दिए गए। शासन ने 3546 किसानों को पात्र माना। बाकी 9801 किसानों के फार्म वापस सत्यापन को लौटा दिए गए। इसी बीच में दोबारा पोर्टल को शुरू कर दिया गया। जिसमें 3178 आवेदन और आए है। जिसका सत्यापन भी इन आवेदन के साथ में चल रहा है।
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शासन ने आधार कार्ड, खतौनी पर जताई आपत्ति
सरकार की चल रही ऋण मोचन योजना का लाभ दिलाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से 13347 किसानों की लिस्ट भेजी गई थी। इसमें शासन स्तर से 9801 किसानों के आधार कार्ड, खाता संख्या, खेत के रकबे (खतौनी) पर आपत्ति आदि जताई है।

बैंकों के खेल में किसान बेहाल
जिले में स्थिति बैंक ने एनपीए को कम करने के चक्कर में बड़ा खेलकर दिया। उन्होंने खुद का लॉस बचाने के चक्कर में किसानों के खातों में रुपये इधर से उधर कर दिए। जिस वजह से सैकड़ों किसान कर्जमाफी योजना से वंचित रह गए।


लोन के लिए लगातार बनाया जा रहा दबाव
- जिले में बैंकों की ओर से लगातार किसानों पर दबाव बनाया जाता है, इनमें खासतौर पर प्राइवेट बैंक शामिल हैं, जो लोगों को आसानी से कर्ज तो मुहैया कर देते हैं लेकिन उसके बाद लगातार लोन चुकाने का दबाव बनाया जाता है।
 
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