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अगर पकड़े गए नेपाली हाथी तो मलासी के जंगल में छोड़े जाएंगेे
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पीलीभीत। टाइगर रिजर्व के रास्ते बरेली की सीमा में पहुंचे नेपाली हाथियों को पकड़ने के प्रयास लगातार जारी हैं। विभागीय अफसरों के अलावा एक्सपर्ट की टीम भी जुटी है। हाथियों को कब ट्रैंक्यूलाइज किया जाए, इसका इंतजार है। पकड़ने के बाद हाथियों को वापस नेपाल भेजने के उपायों पर भी मंथन शुरू हो गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पकड़े जाने के बाद हाथियों को सुरई रेंज से सटे टाइगर रिजर्व के मलासी के जंगल में छोड़ने के निर्देश दिए हैं। ताकि हाथियों को उसी रास्ते से नेपाल भेजा जा सके, जिस रास्ते से वह भारतीय सीमा में घुसे थे।
नेपाल की शुक्लाफांटा सेंक्चुरी से निकलकर टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के लग्गा-भग्गा जंगल पहुंचे दो हाथी पिछले दिनों शारदा नदी और डैम को पार करके महोफ के जंगल क्षेत्र में पहुंच गए थे। जानकारी होते ही वन विभाग सतर्क हो गया, लेकिन दो दिन तक जंगल में रुककर हाथी रात को बाहर की ओर निकल गए। इसके बाद से ही हाथियों का उत्पात शुरू हो गया। अमरिया क्षेत्र से होकर हाथी बहेड़ी (बरेली ) की सीमा में होते हुए रामपुर तक पहुंच गए थे। इस दौरान हाथियों ने एक वनरक्षक समेत चार लोगों को जान ले ली। इसके बाद हाथी पुन: बरेली की सीमा में पहुंच गए। हाथियों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए वन विभाग के उच्च अधिकारी गंभीर हुए। इसके बाद उनकी घेराबंदी शुरू की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद असम, बंगाल से एक्सपर्ट्स बुलाए गए। ट्रैंक्युलाइज करने के प्रयास शुरू किए गए हैं। आबादी क्षेत्र में हाथी कोई जनहानि न कर सकें, इसके लिए फोर्स तैनात कर दिया गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक भी पूरे मामले पर नजर रखे हैं। इधर हाथियों की पकड़ने के साथ उनके वापस भेजने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पत्र जारी कर हाथियों को पकड़े जाने के बाद उत्तराखंड की सुरई रेंज से सटे टाइगर रिजर्व की मालसी कंपार्टमेट में छोड़ने के निर्देश जारी किए है। ताकि हाथियों को जंगल क्षेत्र के पुराने रास्ते से ही नेपाल भेजा जा सके। एफडी एच. राजा मोहन ने बताया कि हाथियों को पकड़े जाने के बाद पुराने रास्ते से ही नेपाल भेजने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए उच्च स्तरीय दिशा निर्देश मिल गए हैं।
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नेपाल की शुक्लाफांटा सेंक्चुरी से निकलकर टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के लग्गा-भग्गा जंगल पहुंचे दो हाथी पिछले दिनों शारदा नदी और डैम को पार करके महोफ के जंगल क्षेत्र में पहुंच गए थे। जानकारी होते ही वन विभाग सतर्क हो गया, लेकिन दो दिन तक जंगल में रुककर हाथी रात को बाहर की ओर निकल गए। इसके बाद से ही हाथियों का उत्पात शुरू हो गया। अमरिया क्षेत्र से होकर हाथी बहेड़ी (बरेली ) की सीमा में होते हुए रामपुर तक पहुंच गए थे। इस दौरान हाथियों ने एक वनरक्षक समेत चार लोगों को जान ले ली। इसके बाद हाथी पुन: बरेली की सीमा में पहुंच गए। हाथियों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए वन विभाग के उच्च अधिकारी गंभीर हुए। इसके बाद उनकी घेराबंदी शुरू की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद असम, बंगाल से एक्सपर्ट्स बुलाए गए। ट्रैंक्युलाइज करने के प्रयास शुरू किए गए हैं। आबादी क्षेत्र में हाथी कोई जनहानि न कर सकें, इसके लिए फोर्स तैनात कर दिया गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक भी पूरे मामले पर नजर रखे हैं। इधर हाथियों की पकड़ने के साथ उनके वापस भेजने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पत्र जारी कर हाथियों को पकड़े जाने के बाद उत्तराखंड की सुरई रेंज से सटे टाइगर रिजर्व की मालसी कंपार्टमेट में छोड़ने के निर्देश जारी किए है। ताकि हाथियों को जंगल क्षेत्र के पुराने रास्ते से ही नेपाल भेजा जा सके। एफडी एच. राजा मोहन ने बताया कि हाथियों को पकड़े जाने के बाद पुराने रास्ते से ही नेपाल भेजने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए उच्च स्तरीय दिशा निर्देश मिल गए हैं।
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