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सुबह साजोसामान समेटकर खनन माफिया निकले, दोपहर को जांच करने पहुंची प्रशासन की टीम
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बहेड़ी। खनन के पट्टे निरस्त होने के बावजूद नरायन नगला के मोहम्मदपुर घाट पर रविवार तक खनन बंद नहीं हुआ था। जिन पोकलैंड मशीनों को इंस्पेक्टर ने पिछले दिनों सीज किया था, माफिया उन्हें रिलीज कराने के उन्हीं के जरिये अवैध खनन में जुटे हुए थे। सोमवार को इस अवैध खनन की खबर अमर उजाला में छपी तो हड़कंप मचा और माफिया आखिरकार यहां से अपना सारा साजोसामान समेटकर चलते बने। कुछ घंटों बाद उनकी धरपकड़ के लिए प्रशासन की टीम भी पहुंची लेकिन तब तक मैदान साफ हो चुका था।
नराननगला में रविवार को अमर उजाला की टीम पहुंची थी तो यहां ताजा रेत के तमाम ढेरों के साथ फड़ भी लगे हुए थे। पोकलैंड और डंपरों के टायरों के निशान भी गवाही दे रहे थे कि यहां अवैध खनन लगातार जारी है। गांव वालों ने भी इसकी पुष्टि की। सोमवार को अमर उजाला में मौके की तस्वीरों के साथ खबर छपी तो खनन करने वाले सुबह ही अपना सामान समेटकर वहां से चलते बने। इसके कुछ देर बाद प्रशासन की भेजी टीम मौके पर जांच करने पहुंची लेकिन तब वहां दूर दूर तक कोई आदमी नहीं दिखा। जो रेत के ढेर थे वे जैसे के तैसे छोड़ दिए गए थे। टियूला गांव में भी चल रहा खनन बंद मिला। इस गांव के लोग भी खनन को लेकर काफी गुस्से में थे। उन्होंने कहा कि अब यहां जरा भी अवैध खनन किया गया तो वे खुद खनन करने वालों को पकड़कर पुलिस को सौंप देंगे। फिलहाल बहेड़ी की किच्छा नदी को मशीनों और डंपरों से निजात मिल गई है। ग्रामीण भी रात में होने वाले वाहनों के शोर से निजात मिलने से खुश हैं। ब्यूरो
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नराननगला में रविवार को अमर उजाला की टीम पहुंची थी तो यहां ताजा रेत के तमाम ढेरों के साथ फड़ भी लगे हुए थे। पोकलैंड और डंपरों के टायरों के निशान भी गवाही दे रहे थे कि यहां अवैध खनन लगातार जारी है। गांव वालों ने भी इसकी पुष्टि की। सोमवार को अमर उजाला में मौके की तस्वीरों के साथ खबर छपी तो खनन करने वाले सुबह ही अपना सामान समेटकर वहां से चलते बने। इसके कुछ देर बाद प्रशासन की भेजी टीम मौके पर जांच करने पहुंची लेकिन तब वहां दूर दूर तक कोई आदमी नहीं दिखा। जो रेत के ढेर थे वे जैसे के तैसे छोड़ दिए गए थे। टियूला गांव में भी चल रहा खनन बंद मिला। इस गांव के लोग भी खनन को लेकर काफी गुस्से में थे। उन्होंने कहा कि अब यहां जरा भी अवैध खनन किया गया तो वे खुद खनन करने वालों को पकड़कर पुलिस को सौंप देंगे। फिलहाल बहेड़ी की किच्छा नदी को मशीनों और डंपरों से निजात मिल गई है। ग्रामीण भी रात में होने वाले वाहनों के शोर से निजात मिलने से खुश हैं। ब्यूरो
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