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पुलिस की कार्यशैली से कोर्ट खफा, मुख्य सचिव को भेजकर गाइड लाइन जारी करने को कहा
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बरेली। एससी एसटी एक्ट के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट ने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर दिशा निर्देश जारी करने को कहा है । इसके अलावा दलित उत्पीड़न के मामलों में रिपोर्ट न दर्ज करने पर कई थानाध्यक्षों को नोटिस भी दिया है।
विशेष न्यायाधीश शकील अहमद खां की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि पुलिस प्रशासन की ओर से एससी एसटी एक्ट के मामलों में गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में दिलचस्पी नहीं ले रही है। इस वजह से अधिनीयम के तहत आने वाले मुकदमों के तेजी से निपटारे में दिक्कतें आ रही हैं। जबकि ऐसे मुकदमों का विचारण न्यायालय के मामला संज्ञान में लिए जाने के दो माह के अंदर पूरा हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर अभियुक्तों की उपस्थिति ही नहीं होगी या आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने के बाद अभियुक्तों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जारी किए गए सम्मन वारंट या कुर्की का निष्पादन नहीं होगा तो दो माह के अंदर मुकदमे का निस्तारण होना असंभव है।
पत्र में कहा गया कि एक्ट के तहत प्रावधान है कि पीड़ित सूचनाकर्ता या साक्षियों के खिलाफ हिंसा या धमकियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करना उनका कर्तव्य है, वो चाहे मौखिक हो या लिखित। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। इस वजह से न्यायालय में बड़ी तादाद में परिवाद पत्र और रिपोर्ट दर्ज करने के लिए अर्जियां दाखिल की जा रही हैं। उन्हाेेंने कहा कि इस बारे में जिलाधिकारी और एसएसपी और संबंधित थानों को दिशा निर्देश दिए जाएं, जिससे मामलों का जल्द निस्तारण हो सके। विशेष न्यायाधीश ने दलित उत्पीड़न के कई मामलों में रिपोर्ट दर्ज न करने पर थाना सुभाष नगर, इज्जत नगर , कैँट, आंवला , शाही व क्योलड़िया के थानाध्यक्षों को नोटिस भेज कर जवाब तलब किया।
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विशेष न्यायाधीश शकील अहमद खां की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि पुलिस प्रशासन की ओर से एससी एसटी एक्ट के मामलों में गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में दिलचस्पी नहीं ले रही है। इस वजह से अधिनीयम के तहत आने वाले मुकदमों के तेजी से निपटारे में दिक्कतें आ रही हैं। जबकि ऐसे मुकदमों का विचारण न्यायालय के मामला संज्ञान में लिए जाने के दो माह के अंदर पूरा हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर अभियुक्तों की उपस्थिति ही नहीं होगी या आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने के बाद अभियुक्तों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जारी किए गए सम्मन वारंट या कुर्की का निष्पादन नहीं होगा तो दो माह के अंदर मुकदमे का निस्तारण होना असंभव है।
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पत्र में कहा गया कि एक्ट के तहत प्रावधान है कि पीड़ित सूचनाकर्ता या साक्षियों के खिलाफ हिंसा या धमकियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करना उनका कर्तव्य है, वो चाहे मौखिक हो या लिखित। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। इस वजह से न्यायालय में बड़ी तादाद में परिवाद पत्र और रिपोर्ट दर्ज करने के लिए अर्जियां दाखिल की जा रही हैं। उन्हाेेंने कहा कि इस बारे में जिलाधिकारी और एसएसपी और संबंधित थानों को दिशा निर्देश दिए जाएं, जिससे मामलों का जल्द निस्तारण हो सके। विशेष न्यायाधीश ने दलित उत्पीड़न के कई मामलों में रिपोर्ट दर्ज न करने पर थाना सुभाष नगर, इज्जत नगर , कैँट, आंवला , शाही व क्योलड़िया के थानाध्यक्षों को नोटिस भेज कर जवाब तलब किया।
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