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निजी अस्पतालों से आशा वर्करों की सांठगांठ का खुलासा

Mon, 24 Jun 2019 01:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jun 2019 01:13 AM IST
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निजी अस्पतालों से आशा वर्करों की सांठगांठ का खुलासा
निघासन खीरी (लखीमपुर खीरी)। सीएमओ रविवार को अचानक कस्बे में निजी अस्पतालों के निरीक्षण को पहुंचे तो कई खुलासे हुए। आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए निजी अस्पतालों में भेज रही हैं, यह तो एक अस्पताल के रजिस्टर में लिखा पढ़ी में सामने आ गया। बहराइच से भी सरकारी डॉक्टरों के यहां आकर निजी प्रैक्टिस करने का खुलासा हुआ।
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सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल तीन अस्पतालों के दौरे के बाद सिंगाही रोड स्थित गुप्ता क्लीनिक पहुंचे। वहीं भर्ती रजिस्टर पर प्रसूताओं के नाम के आगे आशा वर्करों के नाम लिखे देख सीएमओ ने जब जानकारी की तो मालूम हुआ कि आशा वर्कर प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को लेकर आती हैं। हिसाब-किताब में कोई गड़बड़ी न हो इसलिए प्रसूताओं के नाम के आगे ही आशा वर्करों के नाम कर्मचारियों ने लिख लिए थे। इस पर सीएमओ ने रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिया। कहा कि अब जांच के बाद ही पता चलेगा कि इस अस्पताल में अब तक आशा वर्करों ने कितनी महिलाएं डिलीवरी के लिए भेजीं।
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गुप्ता क्लीनिक से पहले इंडेन गैस एजेंसी के नजदीक बिना नाम के चल रहे एक क्लीनिक पर जब सीएमओ पहुंचे तो उन्हें आता देखकर वहां मौजूद डॉक्टर पिछले दरवाजे से फरार हो गया। पता चला कि वह बहराइच से यहां निजी प्रैक्टिस के लिए आते हैं। सीएमओ की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध तरीके से चल रहे निजी अस्पतालों में ताला पड़ गया।
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गुप्ता हॉस्पिटल में आशा वर्कर द्वारा गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए ले जाने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले की जांच कराई जाएगी, जिससे आशाओं की सेवा समाप्ति की जा सके।
-डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
अस्पताल में कुछ कमियां पाई गई हैं, जिन्हें ठीक कर लिया जाएगा। आशा वर्करों की ओर से प्रसूताओं को भेजे जाने की बात निराधार है। सोमवार को सीएमओ ने दफ्तर में बयान के लिए बुलाया है, जहां हम अपना पक्ष रखेंगे।
- डॉ. जगत गुप्ता, संचालक, गुप्ता क्लीनिक, निघासन

मोटे कमीशन के फेर में आशा वर्कर गर्भवती को ले जाती हैं निजी अस्पताल
आशा वर्कर को गांवों में तैनात कर गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा देने का प्रदेश सरकार का उद्देश्य अपनी राह से भटक गया है। आशा वर्कर ने सरकारी अस्पताल में मुफ्त में डिलीवरी कराने के बजाए मोटी कमीशन के चक्कर में निजी अस्पतालों से सांठगांठ कर ली है। यह पूरा गिरोह बनकर लंबे समय से काम कर रहा है, मगर इसका खुलासा रविवार को सीएमओ के निघासन के गुप्ता क्लीनिक पहुंचने से हुआ। इसके बाद हड़कंप मचा हुआ है।
आशा वर्कर एक निश्चित मानदेय तो पाती ही हैं, डिलीवरी कराने पर भी उन्हें करीब 12 सौ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह रकम दो टुकड़ों में दी जाती है। एक बार रकम पाने के बाद जब दूसरी का नंबर आता है तो वह मौका होता है डिलीवरी कराने का। तब आशा वर्कर को निजी अस्पताल की याद आ जाती है। दरअसल, वहां डिलीवरी कराने पर पांच हजार रुपये तक मिल जाते हैं। वहीं अस्पताल वालों का अपना धंधा निकल पड़ता है, उन्हें भी एक डिलीवरी पर दस हजार तक का फायदा हो जाता है। आशा वर्कर गांव की गर्भवती महिलाओं को गुमराह कर देती हैं। उन्हें तो कुल मिलाकर 20 हजार की चपत लग जाती है। बरेली में कुछ समय पहले ही एक मामला खुला था, वहां से सिटी स्टेशन रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में बाकायदा जिले भर की कई आशा वर्कर के साथ डॉक्टर ने मीटिंग की थी। मामला खुलने के बाद जांच चल रही है।

गुप्ता क्लीनिक में जमीन में दबाया जा रहा था ‘मेडिकल वेस्ट’ भी
निघासन। सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया तो वह यह देखकर हतप्रभ रह गए कि यहां मेडिकल कचरे को जमीन में दबाया जा रहा था। सीएमओे ने गुप्ता क्लीनिक में यह स्थिति मिलने के बाद वहां मौजूद अस्पताल के स्टाफ की फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा कि इस तरह जमीन में दबाने से संक्रमण फैलेगा, जिससे लोग बीमार होंगे। सीएमओ ने बॉयोवेस्ट निस्तारण कंपनी से संपर्क कर इसे उन्हीं को देने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि मानक के अनुसार बॉयोवेस्ट को डिब्बे में ढककर रखें। उन्होंने भविष्य में मेडिकल कचरा जमीन में न दबाने के कड़े निर्देश दिए।
बॉयोवेस्ट निस्तारण का ये है नियम
एसीएमओ डॉ. आरपी दीक्षित का कहना है कि अस्पताल चाहें सरकारी हो या फिर निजी। हर जगह लाल, पीला, नीला और सफेद रंग का डिब्बा होना चाहिए। लाल रंग के डिब्बे में प्लास्टिक की बोतल आदि, पीले डिब्बे में मानव वेस्ट एवं नीले में कांच संबंधी की सामग्री और सफेद डिब्बे में नुकीले चीजें जैसे सुई आदि रखी डालना चाहिए। उन्होंने बताया कि जिला एवं महिला अस्पताल का बॉयोवेस्ट लेने के लिए रोजाना गाड़ी आती है। जबकि निजी अस्पतालों को इसकी स्वयं व्यवस्था करनी होती है।

पोस्टमार्टम हाउस एक महीने में चालू होने की जताई उम्मीद
सीएमओ रविवार को निघासन के कुल चार निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। सबसे पहले ढखेरवा रोड स्थित सम्राट हॉस्पिटल पहुंचकर पंजीकरण संबंधी प्रपत्र देखे। सब कुछ ठीक मिलने के बाद वह सिंगाही रोड़ स्थित सूर्या हॉस्पिटल पहुंचे। वहां मौजूद स्टाफ पंजीकरण प्रपत्र नहीं दिखा सका। इसके बाद वह इंडेन गैस एजेंसी के निकट बिना नाम के चल रहे क्लीनिक पहुंचे। यहां खुलासा हुआ कि सरकारी डॉक्टर बहराइच से आकर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। इन तीन के बाद ही सीएमओ गुप्ता क्लीनिक पहुंचे थे। सीएमओ ने बाद में निर्माणाधीन पोस्टमार्टम हाउस का भी निरीक्षण किया। कमरों की टूटी फर्श एवं उगी झाड़ियों को देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। सीएमओ ने बताया कि मरम्मत का कार्य चल रहा है। इसके शुरू होने में करीब एक माह का समय लगेगा। सीएचसी में स्ट्रेचर आदि न मिलने पर उन्होंने डॉ. पीके रावत को व्यवस्थाएं दुरूस्त करने के निर्देश दिए।
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