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अवैध संबंधों को लेकर हुए कत्ल में दो सगे भाई समेत तीन को उम्रकैद
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शाहजहांपुर। कांट थाना क्षेत्र के गांव भंडेरी में छह साल राकेश की हत्या के मामले में गांव के ही दो सगे भाइयों और उनके बहनोई को एडीजे सप्तम ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
गांव भंडेरी निवासी राकेश पुत्र गंगाराम 28 मार्च 2013 को पत्नी और बच्चों के साथ सोया था। अगले दिन 29 मार्च को सुबह उसका शव गांव के बाहर खेत में पाकड़ के नीचे पड़ा मिला। भाई धर्मपाल की तहरीर पर गांव के ही बृजेश व उसके भाई सुभाष और बहनोई अमर सिंह निवासी चांदपुर तिलहर को नामजद किया गया था। जिसमें उसने रंजिश का उल्लेख करते हुए बताया कि तीन वर्ष पहले इन अभियुक्तों में से बृजेश को राकेश ने एक महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। इसके बाद दोनों के बीच मारपीट हुई। आरोप लगाया कि बृजेश ने उसी समय राकेश की हत्या करने की धमकी दी थी।
धर्मपाल के मुताबिक होली के 10-12 दिन पहले बृजेश ने उसके भाई व परिवार वालों से बोलचाल शुरू कर दी। 28 मार्च की रात बृजेश पहले पिता गंगाराम को बुला ले गया। उन्हें शराब पिलाई। इसके बाद उसके भाई राकेश को रात 10 बजे बृजेश व सुभाष बुलाकर अपने घर ले गए। अगले दिन सुबह पाकड़ के नीचे उसका शव मिला। गांव के दयाराम और सुरेश ने बृजेश, सुभाष व अमर सिंह को वहां शव फेंकते हुए देखा था।
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विवेचना के उपरांत तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान व सरकारी वकील विनोद कुमार शुक्ला के तर्कों को सुनने के बाद आरोप सिद्ध होने पर अपर सत्र न्यायाधीश (सप्तम) नरेंद्र कुमार ने बृजेश, सुभाष, अमर सिंह को उम्रकैद व 27-27 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके साथ ही जुर्माने की धनराशि में से आधी धनराशि धर्मपाल को प्रतिकर के रूप में दिलाए जाने का आदेश दिया।
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गांव भंडेरी निवासी राकेश पुत्र गंगाराम 28 मार्च 2013 को पत्नी और बच्चों के साथ सोया था। अगले दिन 29 मार्च को सुबह उसका शव गांव के बाहर खेत में पाकड़ के नीचे पड़ा मिला। भाई धर्मपाल की तहरीर पर गांव के ही बृजेश व उसके भाई सुभाष और बहनोई अमर सिंह निवासी चांदपुर तिलहर को नामजद किया गया था। जिसमें उसने रंजिश का उल्लेख करते हुए बताया कि तीन वर्ष पहले इन अभियुक्तों में से बृजेश को राकेश ने एक महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया था। इसके बाद दोनों के बीच मारपीट हुई। आरोप लगाया कि बृजेश ने उसी समय राकेश की हत्या करने की धमकी दी थी।
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धर्मपाल के मुताबिक होली के 10-12 दिन पहले बृजेश ने उसके भाई व परिवार वालों से बोलचाल शुरू कर दी। 28 मार्च की रात बृजेश पहले पिता गंगाराम को बुला ले गया। उन्हें शराब पिलाई। इसके बाद उसके भाई राकेश को रात 10 बजे बृजेश व सुभाष बुलाकर अपने घर ले गए। अगले दिन सुबह पाकड़ के नीचे उसका शव मिला। गांव के दयाराम और सुरेश ने बृजेश, सुभाष व अमर सिंह को वहां शव फेंकते हुए देखा था।
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विवेचना के उपरांत तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयान व सरकारी वकील विनोद कुमार शुक्ला के तर्कों को सुनने के बाद आरोप सिद्ध होने पर अपर सत्र न्यायाधीश (सप्तम) नरेंद्र कुमार ने बृजेश, सुभाष, अमर सिंह को उम्रकैद व 27-27 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके साथ ही जुर्माने की धनराशि में से आधी धनराशि धर्मपाल को प्रतिकर के रूप में दिलाए जाने का आदेश दिया।