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निषेधाज्ञा पर दिनभर खामोशी शाम को अफसर बोले... प्रदर्शन की परमिशन दी थी

Fri, 14 Jun 2019 02:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2019 02:40 AM IST
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निषेधाज्ञा पर दिनभर खामोशी शाम को अफसर बोले... प्रदर्शन की परमिशन दी थी
बरेली। नगर निगम में दो दिन पहले ही पार्षदों का प्रदर्शन और हंगामा रोकने के लिए धारा 144 लागू करने वाला जिला प्रशासन बृहस्पतिवार को पार्षदों और भाजपा के संयुक्त प्रदर्शन के दौरान दिन भर खामोश रहा। निषेधाज्ञा के उल्लंघन के सवालों पर अफसर पूरे दिन गोलमोल जवाब देते रहे, लेकिन शाम को अफसरों ने साफ किया कि पार्षदों के बाकायदा परमिशन लेने के बाद नगर निगम में प्रदर्शन किया है। इसलिए इस मामले में किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।
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नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने डीएम वीरेंद्र कुमार को शिकायत भेजी थी कि वेंडर जोन में शामिल न होने के बावजूद इंदिरानगर मार्केट में वेंडरों के लिए अवैध रूप से पोर्टेबल शॉप रखी गई हैं। डीएम ने इसकी जांच सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार से कराई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर आयुक्त ने सड़क पर कब्जा करने के मामले में पार्षद विनोद सैनी और व्यापारी नेता दर्शनलाल भाटिया पर रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इस कार्रवाई के खिलाफ भाजपा के पार्षदों ने नगर निगम में आंदोलन शुरू कर दिया था जो लगातार उग्र होता जा रहा था। मंगलवार को नगर आयुक्त के छुट्टी पर लौटने के बाद हंगामा और उग्र होने की आशंका में सिटी मजिस्ट्रेट ने नगर निगम में सरकारी काम में बाधा डाले जाने और शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका जताते हुए दो सौ मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी।
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निषेधाज्ञा के बावजूद बृहस्पतिवार को जब पार्षद और भाजपा के पदाधिकारी तमाम भीड़ के साथ नगर निगम परिसर में इकट्ठे हुए तो प्रशासन के अफसर नदारद नजर आए। पूरे दिन प्रदर्शन चला लेकिन अफसरों ने यह साफ नहीं किया कि नगर निगम में निषेधाज्ञा का उल्लंघन हुआ या नहीं। शाम को प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया कि नगर निगम में अनुमति लेने के बाद ही प्रदर्शन किया गया है। इसमें कानून के उल्लंघन जैसी कोई बात नहीं है।
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‘परमिशन लेने के बाद ही नगर निगम में धरना दिया गया है। जहां तक धारा 144 की बात है तो वह सिर्फ नगर निगम में नहीं बल्कि पूरे जिले में लागू है। इसका कड़ाई से अनुपालन भी कराया जा रहा है।’ -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी



‘शांति व्यवस्था के लिए मजिस्ट्रेट धारा 144 लागू कर सकते हैं। मगर इसका मतलब यह नहीं है कि पब्लिक को अपनी बात कहने से रोका जाए। यह जरूर है कि निषेधाज्ञा के दौरान प्रदर्शन करने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी चाहिए। कानून का उल्लंघन करने की इजाजत किसी को नहीं मिलनी चाहिए।’ - रणवीर प्रसाद, कमिश्नर






 
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