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चौपुला-रामगंगा हाईवे- रोड चौड़ी करने के नाम पर भी धांधली
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बरेली। बदायूं-बरेली फोरलेन प्रोजेेक्ट में गड़बड़ी की शिकायत शासन में पहुंची है। आरोप है कि इस फोरलेन का हिस्सा रहे चौपुला से रामगंगा ब्रिज के करीब सात किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण के काम में भी धांधली हुई है। निर्माणदायी संस्था पीएनसी ने केवल सड़क के किनारों को चौड़ा किया है। बीच में पुरानी सड़क पर ही डिवाइडर बनाकर पेमेंट पूरी सड़क के काम का करा लिया है। इससे पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीडब्ल्यूडी की टेक्निकल ऑडिट सेल (टीएसी) इस पूरे प्रोजेक्ट की जांच कर रही है। वर्ष 2016-17 में राजमार्ग संख्या-33 बरेली-बदायूं फोरलेन को बनाने में करीब 280 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। शासन के साथ ही मई 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी तक इस सड़क के निर्माण में गोलमाल होने की शिकायत पहुंची थी। इसमें यह धांधली भी खासतौर से बताई गई है कि चौपुला से रामगंगा ब्रिज तक सड़क का चौड़ीकरण होना था। इसमें सड़क के दोनों ओर सड़क को डेढ़ से दो मीटर तक चौड़ा कर दिया गया, लेकिन पुरानी सड़क को उखाड़कर उसको फिर से नहीं बनाया गया। ठेका कंपनी ने पुरानी सड़क पर ही डिवाइडर बना दिया। बताते हैं कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की साठगांठ के बाद पूरी रोड बनाने का पेमेंट करा लिया गया है। टीएसी इसकी भी जांच कर रही हैं। पीडब्ल्यूडी के उच्चाधिकारी इस मामले में फिलहाल कुछ कहने से मना कर रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी को 15 दिनों में पूरी करनी थी जांच
हाईकोर्ट ने इस मामले में 15 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट देने के आदेश पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को दिए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस आदेश को डेढ़ माह हो रहे हैं, लेकिन शासन की तरफ से इस जांच के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है, जबकि इस संबंध में शासन को कई बार लेटर भी जारी किए जा चुके हैं।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद पीडब्ल्यूडी की टेक्निकल ऑडिट सेल (टीएसी) इस पूरे प्रोजेक्ट की जांच कर रही है। वर्ष 2016-17 में राजमार्ग संख्या-33 बरेली-बदायूं फोरलेन को बनाने में करीब 280 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। शासन के साथ ही मई 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी तक इस सड़क के निर्माण में गोलमाल होने की शिकायत पहुंची थी। इसमें यह धांधली भी खासतौर से बताई गई है कि चौपुला से रामगंगा ब्रिज तक सड़क का चौड़ीकरण होना था। इसमें सड़क के दोनों ओर सड़क को डेढ़ से दो मीटर तक चौड़ा कर दिया गया, लेकिन पुरानी सड़क को उखाड़कर उसको फिर से नहीं बनाया गया। ठेका कंपनी ने पुरानी सड़क पर ही डिवाइडर बना दिया। बताते हैं कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की साठगांठ के बाद पूरी रोड बनाने का पेमेंट करा लिया गया है। टीएसी इसकी भी जांच कर रही हैं। पीडब्ल्यूडी के उच्चाधिकारी इस मामले में फिलहाल कुछ कहने से मना कर रहे हैं।
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पीडब्ल्यूडी को 15 दिनों में पूरी करनी थी जांच
हाईकोर्ट ने इस मामले में 15 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट देने के आदेश पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को दिए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस आदेश को डेढ़ माह हो रहे हैं, लेकिन शासन की तरफ से इस जांच के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है, जबकि इस संबंध में शासन को कई बार लेटर भी जारी किए जा चुके हैं।
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