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अखिलेश जी! क्या चुनाव लड़ाने के लिए कोई पैसा भेजा था
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बरेली। लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी की हार से अभी पार्टी उबर भी नहीं पायी थी कि भंग संगठन को भेजे गए 20 लाख रुपए चुनाव में बस्ते के साथ पार्षदों और कार्यकर्ताओं में न बांटने को लेकर बरेली से लखनऊ तक हलचल मच गई है। पूर्व विधायकों और संगठन (जो काफी समय पहले भंग हो चुका है) पदाधिकारियों को चुनाव लड़ाने के लिए हाईकमान की ओर से 20 लाख रुपए भेजे गए थे। यह रकम न प्रत्याशी को मिली, न ही कार्यकर्ताओं को। प्रत्याशी को पैसा न मिलने का मामला हाईकमान के संज्ञान में आने के बाद पार्टी के अंदर माहौल काफी गरम है। सपा के कुछ पूर्व पदाधिकारियों ने अपने मोबाइल नंबर भी कई दिन से बंद कर रखे हैं। इसलिए इस मामले पर असमंजस बढ़ता जा रहा है।
सपा-बसपा गठबंधन ने बरेली लोकसभा सीट से पूर्व मंत्री भगवतसरन गंगवार को अपना प्रत्याशी बनाया था। चूंकि पार्टी की जिला और महानगर इकाई का संगठन पहले से ही भंग था। इसलिए संगठन के जिम्मेदारी पदाधिकारियों के अलावा सपा के पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने भगवत को मन से चुनाव लड़ाने में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। सूत्रों की मानें तो पूर्व मंत्री समेत तीन पूर्व विधायक खुद लोकसभा का टिकट चाहते थे। भंग जिला और महानगर कार्यकारिणी के पूर्व पदाधिकारियों ने भी पूरे चुनाव में सिर्फ चेहरा दिखाने की औपचारिकता भर पूरी की।
सूत्रों की मानें तो सोमवार को लोकसभा प्रत्याशी भगवतसरन गंगवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ बुलाकर फीड बैक लिया। बताया जाता है कि इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रत्याशी से यह बात भी पूछी गई कि प्रदेश मुख्यालय से चुनाव लड़ाने के लिए जो रकम भेजी गई थी, वह मिली या नहीं। भगवत ने इसके जवाब में राष्ट्रीय अध्यक्ष से यह कह दिया कि मुख्यालय से भेजे गए पैसे के बारे में न तो उनको कोई जानकारी है, न ही पार्टी की ओर से कोई पैसा उनको चुनाव के दौरान मिला। सूत्रों के अनुसार कई दिन पहले ही कुछ सपा नेताओं ने हाईकमान तक प्रत्याशी को मुख्यालय द्वारा भेजी गई रकम न मिलने की शिकायत राष्ट्रीय अध्यक्ष से की गई थी। उस पर संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की तह तक जाने का प्रयास किया जा रहा है। लखनऊ मुख्यालय से भंग जिला और महानगर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों से उनके मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो कुछ पदाधिकारियों के मोबाइल नंबर स्विच ऑफ थे। वैसे जिला कार्यकारिणी के बड़े पदाधिकारी ने अपने दोनों मोबाइल नंबर कई दिन से स्विच ऑफ कर रखे हैं। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि क्या कोई पैसा प्रदेश मुख्यालय से बरेली के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने के लिए भेजा गया? अगर 15 से 20 लाख रुपए आए तो वह कहां गए। फिलहाल इस मामले में बरेली से लखनऊ तक हलचल है। इसमें कुछ बड़ेे पार्टी नेताओं पर गाज भी गिर सकती है।
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चुनाव के दौरान अगर प्रत्याशी के लिए कोई पैसा आता है तो भी वह संगठन के माध्यम से ही भेजा जाता है। फिलहाल, बरेली में पार्टी संगठन के पूर्व पदाधिकारियों के पास कोई पैसा आया या नहीं। इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। भगवतसरन गंगवार, सपा-बसपा प्रत्याशी लोकसभा
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सपा-बसपा गठबंधन ने बरेली लोकसभा सीट से पूर्व मंत्री भगवतसरन गंगवार को अपना प्रत्याशी बनाया था। चूंकि पार्टी की जिला और महानगर इकाई का संगठन पहले से ही भंग था। इसलिए संगठन के जिम्मेदारी पदाधिकारियों के अलावा सपा के पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने भगवत को मन से चुनाव लड़ाने में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। सूत्रों की मानें तो पूर्व मंत्री समेत तीन पूर्व विधायक खुद लोकसभा का टिकट चाहते थे। भंग जिला और महानगर कार्यकारिणी के पूर्व पदाधिकारियों ने भी पूरे चुनाव में सिर्फ चेहरा दिखाने की औपचारिकता भर पूरी की।
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सूत्रों की मानें तो सोमवार को लोकसभा प्रत्याशी भगवतसरन गंगवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ बुलाकर फीड बैक लिया। बताया जाता है कि इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रत्याशी से यह बात भी पूछी गई कि प्रदेश मुख्यालय से चुनाव लड़ाने के लिए जो रकम भेजी गई थी, वह मिली या नहीं। भगवत ने इसके जवाब में राष्ट्रीय अध्यक्ष से यह कह दिया कि मुख्यालय से भेजे गए पैसे के बारे में न तो उनको कोई जानकारी है, न ही पार्टी की ओर से कोई पैसा उनको चुनाव के दौरान मिला। सूत्रों के अनुसार कई दिन पहले ही कुछ सपा नेताओं ने हाईकमान तक प्रत्याशी को मुख्यालय द्वारा भेजी गई रकम न मिलने की शिकायत राष्ट्रीय अध्यक्ष से की गई थी। उस पर संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की तह तक जाने का प्रयास किया जा रहा है। लखनऊ मुख्यालय से भंग जिला और महानगर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों से उनके मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो कुछ पदाधिकारियों के मोबाइल नंबर स्विच ऑफ थे। वैसे जिला कार्यकारिणी के बड़े पदाधिकारी ने अपने दोनों मोबाइल नंबर कई दिन से स्विच ऑफ कर रखे हैं। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि क्या कोई पैसा प्रदेश मुख्यालय से बरेली के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने के लिए भेजा गया? अगर 15 से 20 लाख रुपए आए तो वह कहां गए। फिलहाल इस मामले में बरेली से लखनऊ तक हलचल है। इसमें कुछ बड़ेे पार्टी नेताओं पर गाज भी गिर सकती है।
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चुनाव के दौरान अगर प्रत्याशी के लिए कोई पैसा आता है तो भी वह संगठन के माध्यम से ही भेजा जाता है। फिलहाल, बरेली में पार्टी संगठन के पूर्व पदाधिकारियों के पास कोई पैसा आया या नहीं। इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। भगवतसरन गंगवार, सपा-बसपा प्रत्याशी लोकसभा