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सपा के दिग्गजों के बूथों पर हारी गठबंधन प्रत्याशी रुचिवीरा

Sun, 26 May 2019 01:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 26 May 2019 01:41 AM IST
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सपा के दिग्गजों के बूथों पर हारी गठबंधन प्रत्याशी रुचिवीरा
बरेली। सपा-बसपा गठबंधन की आंवला से प्रत्याशी रुचिवीरा भले ही पूरे दमखम से मैदान में डटी रहीं। उनको वोट भी खूब मिले, लेकिन तमाम यादव और दलितों के अलावा मुस्लिम बहुल बूथों पर उनको भाजपा से कम वोट मिले। इनमें कुछ सपा के दिग्गज भी हैं, जो अपने बूथ से गठबंधन की प्रत्याशी को नहीं जिता पाए। मुस्लिम बहुल केंद्रों पर भाजपा के पक्ष में वोट पड़ना आश्चर्यजनक माना जा रहा है।
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सपा नेता अरविंद यादव के गांव मेहतरपुर करोड़ में भाजपा प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप के वोट गठबंधन से अधिक निकले। जबकि यह गांव यादव और दलित बहुल है। अरविंद यादव सपा के जिला उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। एक समय उनको जिलाध्यक्ष पद का दावेदार भी माना जाता था। इसी गांव में सपा के जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र मुखर्जी और सपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष और पूर्व ब्लाक प्रमुख रह चुके राजबाबू यादव भी रहते हैं। इसके बाद भी इस गांव से भाजपा प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप को बसपा प्रत्याशी रुचिवीरा से ज्यादा वोट मिले। सपा नेता अरविंद अपना बूथ भी हार गए। यहां भाजपा को बसपा से अधिक वोट मिला। सपा नेता के गांव में तीनों बूथों पर भाजपा को बसपा से बढ़त मिली। भाजपा को 1140 और बसपा को 670 वोट मिले। एक अन्य यादव बहुल गांव भूड़ में भी भाजपा ने बसपा को हराया। दलित बहुल गांव खजुरिया (जिसमें 90 फीसदी से ज्यादा जाटव रहते हैं) में कुल 332 वोट पड़े। इसमें भाजपा को 256 वोट मिले। खजुरिया में रहने वाले लोगों का पड़ोसी गांव उमरिया वालों से कांवड़ निकालने को लेकर पिछले साल विवाद हो गया था। उमरिया वालों ने खजुरिया के लोगों को कांवड़ नहीं निकालने दी थी। भाजपा विधायक पप्पू भरतौल भी कांवड़ निकालने को लेकर पुलिस प्रशासन से भिड़ गए थे। मगर लोकसभा चुनाव में खजुरिया के दलितों ने बसपा के बजाय भाजपा को वोट दिए।
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‘ मैं स्वीकार करता हूं कि अपना बूथ नहीं जिता पाया। राजबाबू प्रसपा को लड़ा थे। दूसरे सपा के पूर्व ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत सदस्य कांग्रेस को लड़ा रहे थे। दोनों यादव प्रधान भी सपा में नहीं थे। ऐसे में बूथ हारना मजबूरी थी। मैने सपा को ही वोट डलवाए।’
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- अरविंद यादव, सपा नेता
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