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जानलेवा हमले में दो सगे भाइयों को सात-सात साल की सजा
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बदायूं। साढ़े 12 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश देवराज प्रसाद सिंह ने दो सगे भाइयों को मुजरिम करार देते हुए सात-सात साल की कड़ी कैद सहित 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
थाना धनारी (अब संभल) क्षेत्र के गांव नगला चतुर्भानपुर निवासी वादी मुकुट सिंह ने 13 अक्टूबर 2006 को रिपोर्ट लिखाई थी कि वह अपने चाचा सरदार सिंह और चचेरे भाई महीपाल सिंह के साथ अपने घेर में बैठा था, तभी गांव के ही सत्यवीर और बाबा पुत्रगण लखपत यादव मोटरसाइकिल से आए। दोनों ने आते ही गाली गलौज करनी शुरू कर दी। सत्यवीर ने अपने हाथ में लिए हुए नाजायज तमंचे से जान से मारने की नीयत से गोली चलाई जो उसके चचेरे भाई महीपाल को लगी। शोर पर गांव के बहुत से लोग इकट्ठे हो गए। उनके ललकारने पर आरोपी सत्यवीर और बाबा बाइक लेकर भाग गए। पुलिस ने सत्यवीर और बाबा के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
अपर सत्र न्यायाधीश देवराज प्रसाद सिंह ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी मदन लाल राजपूत और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद सत्यवीर और बाबा को मुजरिम करार देते हुए सात-सात साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई, साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला।
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थाना धनारी (अब संभल) क्षेत्र के गांव नगला चतुर्भानपुर निवासी वादी मुकुट सिंह ने 13 अक्टूबर 2006 को रिपोर्ट लिखाई थी कि वह अपने चाचा सरदार सिंह और चचेरे भाई महीपाल सिंह के साथ अपने घेर में बैठा था, तभी गांव के ही सत्यवीर और बाबा पुत्रगण लखपत यादव मोटरसाइकिल से आए। दोनों ने आते ही गाली गलौज करनी शुरू कर दी। सत्यवीर ने अपने हाथ में लिए हुए नाजायज तमंचे से जान से मारने की नीयत से गोली चलाई जो उसके चचेरे भाई महीपाल को लगी। शोर पर गांव के बहुत से लोग इकट्ठे हो गए। उनके ललकारने पर आरोपी सत्यवीर और बाबा बाइक लेकर भाग गए। पुलिस ने सत्यवीर और बाबा के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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अपर सत्र न्यायाधीश देवराज प्रसाद सिंह ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी मदन लाल राजपूत और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद सत्यवीर और बाबा को मुजरिम करार देते हुए सात-सात साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई, साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला।
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