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होलिका दहन के बाद उड़े रंग-गुलाल
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बरेली। फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन कर बुराई पर अच्छाई का संदेश शहरवासियों ने दिया। बुधवार को भद्रा का मान सुबह 10.46 से रात 8.46 बजे तक करीब दस घंटे तक होने से होलिका दहन को लेकर लोग असमंजस में रहे। इसके चलते लोगों ने पंडितों से विचार विमर्श कर रात नौ बजे जिले भर में करीब 2556 जगहों पर होलिका दहन किया। इसके बाद एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाया और बड़ों से आशीर्वाद लिया।
इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा का मान रात 8.46 बजे तक होने से लोग पूजन और दहन के समय को लेकर असमंजस में रहे। ज्योतिषाचार्यों ने दहन का समय रात नौ बजे के बाद शुभ बताया था, लेकिन पूजन का समय स्पष्ट नहीं था। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग होने से भद्रा के समय भी पूजन किए जाने की जानकारी होने के चलते महिलाओं ने सूर्यास्त के साथ ही, विधि विधान से पूजन संपन्न कर लिया। होलिका में गन्ने, चने समेत अन्य परंपरागत सामग्री होलिका में अर्पित की गई। रात नौ बजने के साथ ही, संजयनगर होली चौराहा, सुभाषनगर, भूड़, गांधी उद्यान, अक्षर विहार, पुराना शहर, बिहारीपुर, सिटी स्टेशन, जाटवपुरा, प्रेमनगर, जगतपुर, जोगीनवादा, संजय नगर, कर्मचारी नगर, इज्जतनगर समेत अन्य इलाकों में होलिका दहन शुरू हो गया। हालांकि, कुछ स्थानों पर परंपरानुसार भोर में होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के बाद घर में अशुभ छाया दूर करने के लिए होलिका की राख भी साथ ले गए। इसके साथ ही लोगों ने एकदूसरे को गले मिलकर होली की शुभकामनाएं दी और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
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इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा का मान रात 8.46 बजे तक होने से लोग पूजन और दहन के समय को लेकर असमंजस में रहे। ज्योतिषाचार्यों ने दहन का समय रात नौ बजे के बाद शुभ बताया था, लेकिन पूजन का समय स्पष्ट नहीं था। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग होने से भद्रा के समय भी पूजन किए जाने की जानकारी होने के चलते महिलाओं ने सूर्यास्त के साथ ही, विधि विधान से पूजन संपन्न कर लिया। होलिका में गन्ने, चने समेत अन्य परंपरागत सामग्री होलिका में अर्पित की गई। रात नौ बजने के साथ ही, संजयनगर होली चौराहा, सुभाषनगर, भूड़, गांधी उद्यान, अक्षर विहार, पुराना शहर, बिहारीपुर, सिटी स्टेशन, जाटवपुरा, प्रेमनगर, जगतपुर, जोगीनवादा, संजय नगर, कर्मचारी नगर, इज्जतनगर समेत अन्य इलाकों में होलिका दहन शुरू हो गया। हालांकि, कुछ स्थानों पर परंपरानुसार भोर में होलिका दहन किया गया। होलिका दहन के बाद घर में अशुभ छाया दूर करने के लिए होलिका की राख भी साथ ले गए। इसके साथ ही लोगों ने एकदूसरे को गले मिलकर होली की शुभकामनाएं दी और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
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